पति की जिंदगी बचाने पत्नी भी किडनी डोनर Source : Live Cities
किशनगंज: विवाह के सात फेरे केवल एक सामाजिक या धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवनभर हर सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ निभाने और हर परिस्थिति में साथ खड़े रहने का अटूट वचन होते हैं। बिहार के किशनगंज जिले से सामने आई एक भावुक और प्रेरणादायक घटना ने इस वचन को वास्तविक जीवन में साकार कर दिखाया है। ठाकुरगंज प्रखंड की रहने वाली 37 वर्षीय सविता देवी ने अपने गंभीर रूप से बीमार पति कृष्ण कुमार सिन्हा को नया जीवन देने के लिए अपनी एक किडनी दान करने का फैसला लिया है। पति की जान बचाने के लिए उठाए गए इस साहसिक कदम ने न सिर्फ उनके अटूट प्रेम और समर्पण को साबित किया है, बल्कि पूरे समाज के सामने मानवता, त्याग और अंगदान की एक प्रेरणादायक मिसाल भी पेश की है। सविता देवी के इस निर्णय की हर ओर सराहना हो रही है और लोग इसे रिश्तों की सच्ची मजबूती का सबसे बड़ा उदाहरण बता रहे हैं।
दोनों किडनियां फेल होने के बाद डॉक्टरों ने दी ट्रांसप्लांट की सलाह, चंडीगढ़ में होगा इलाज
जानकारी के अनुसार, ठाकुरगंज के पूर्व उपमुख्य पार्षद तथा वर्तमान उपमुख्य पार्षद उर्मिला देवी के प्रतिनिधि कृष्ण कुमार सिन्हा पिछले काफी समय से गंभीर किडनी रोग से जूझ रहे हैं। लगातार स्वास्थ्य खराब रहने के बाद जब उनकी विस्तृत चिकित्सकीय जांच कराई गई, तो डॉक्टरों ने पाया कि उनकी दोनों किडनियां लगभग पूरी तरह काम करना बंद कर चुकी हैं। मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद चिकित्सकों ने स्पष्ट कर दिया कि अब उनका जीवन बचाने का सबसे प्रभावी और जरूरी उपाय किडनी ट्रांसप्लांट ही है। यह खबर सुनते ही परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक ओर कृष्ण कुमार सिन्हा की बिगड़ती सेहत की चिंता थी, तो दूसरी ओर समय पर उपयुक्त डोनर मिलने की चुनौती सामने थी। परिवार के सभी सदस्य चिंता में डूब गए थे, क्योंकि हर गुजरता दिन मरीज की स्थिति को और अधिक गंभीर बना सकता था। ऐसे मुश्किल समय में इलाज के लिए चंडीगढ़ के एक प्रतिष्ठित अस्पताल का चयन किया गया, जहां उनका किडनी प्रत्यारोपण किया जाएगा।
मेरी किडनी ले लीजिए, लेकिन इन्हें बचा लीजिए, पत्नी के एक फैसले ने बदल दी उम्मीद
जब परिवार के सामने यह सबसे कठिन घड़ी आई और डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट के लिए डोनर की आवश्यकता बताई, तब सविता देवी ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी एक किडनी दान करने का फैसला कर लिया। बताया जाता है कि उन्होंने डॉक्टरों और परिजनों से भावुक होकर कहा, मेरी किडनी ले लीजिए, लेकिन इन्हें बचा लीजिए। सविता देवी के इन शब्दों ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया। उनके इस निस्वार्थ निर्णय ने निराशा में डूबे परिवार को फिर से उम्मीद की नई रोशनी दिखाई। फिलहाल किडनी प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया के लिए आवश्यक मेडिकल जांच, टिश्यू मैचिंग, कानूनी औपचारिकताएं और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। सभी रिपोर्ट अनुकूल रहने के बाद चंडीगढ़ के अस्पताल में ऑपरेशन किया जाएगा। परिवार और शुभचिंतक भगवान से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि ऑपरेशन सफल हो और कृष्ण कुमार सिन्हा जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी सकें।
त्याग और समर्पण की बनी मिसाल, अंगदान के प्रति भी दिया बड़ा संदेश
सविता देवी का यह निर्णय केवल एक पत्नी द्वारा अपने पति की जान बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक गहरा संदेश भी है। आज भी अंगदान को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां और झिझक देखने को मिलती है, लेकिन सविता देवी ने अपने फैसले से यह साबित कर दिया कि समय आने पर किसी अपने की जिंदगी बचाने से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। जैसे ही यह खबर सामने आई, ठाकुरगंज सहित पूरे किशनगंज जिले में इसकी चर्चा होने लगी। सोशल मीडिया पर भी लोग सविता देवी के साहस, प्रेम और त्याग की जमकर सराहना कर रहे हैं। समाजसेवियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों ने इसे रिश्तों की मजबूती और मानवता का अद्भुत उदाहरण बताया है। उनका मानना है कि आज के समय में, जब रिश्तों में दूरियां बढ़ने की बातें अक्सर सुनने को मिलती हैं, ऐसे में सविता देवी ने अपने फैसले से यह साबित कर दिया कि सच्चा प्रेम केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कठिन से कठिन परिस्थिति में किए गए त्याग और समर्पण से पहचाना जाता है। यह घटना आने वाले समय में अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करने और उन्हें प्रेरित करने का भी काम करेगी। पूरा ठाकुरगंज और किशनगंज जिला आज सविता देवी के साहस पर गर्व महसूस कर रहा है और कृष्ण कुमार सिन्हा के सफल ऑपरेशन एवं शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहा है।
