ere | Source: ereनई दिल्ली | अंदरूनी कलह और एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच चुनाव आयोग (ECI) की तरफ से एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अन्य चुनाव आयुक्तों एस एस संधू और विवेक जोशी के साथ एक हाई-लेवल बैठक की। इस बैठक के बाद आयोग ने जो प्रेस विज्ञप्ति जारी की है, उसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। आइए जानते हैं इस पूरी उच्चस्तरीय बैठक के अंदर की हर एक बड़ी और अहम बात।

अंदरूनी टकराव की खबरों पर विराम, आयोग ने बताई पूरी सच्चाई

पिछले कुछ दिनों से मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि चुनाव आयोग के भीतर एसआईआर के फैसलों को लेकर भारी मतभेद और अंदरूनी टकराव चल रहा है। इसी बीच कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तक कर डाली थी।

इन तमाम अटकलों और विवादों पर करारा जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने साफ किया है कि आयोग का हर एक फैसला पूरी तरह से सर्वसम्मति से लिया गया है। प्रेस नोट में स्पष्ट किया गया कि कैबिनेट सचिव को लिखा गया पत्र किसी भी नीतिगत मामले से जुड़ा नहीं था, और एसआईआर को लेकर जो भी आदेश दिए गए हैं, वे सभी आयुक्तों की रजामंदी से ही पास हुए हैं।

भविष्य के फैसलों पर पारदर्शिता का बड़ा ऐलान

विवादों के बीच आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए कड़े कदम उठाने का फैसला किया है। भविष्य में आयोग की हर बैठक का एजेंडा पहले ही जारी कर दिया जाएगा और बैठकों से जुड़ी सभी जानकारियां सीधे जनता के सामने सार्वजनिक की जाएंगी। इसके साथ ही, अधिकारियों की किसी भी विदेश यात्रा के लिए अब आयोग की पूर्व अनुमति लेना भी अनिवार्य कर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और एसआईआर का पूरा सफर

आयोग ने स्पष्ट किया कि 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एसआईआर का आदेश सर्वसम्मति से मंजूर किया गया था। बिहार से शुरू हुई यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल और देश के अन्य राज्यों तक बढ़ाई गई।

आयोग ने याद दिलाया कि 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी एसआईआर कराने के चुनाव आयोग के इस निर्णय को पूरी तरह से कानून सम्मत ठहराया था। इसके अलावा 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को अलग-अलग राज्यों के लिए जारी एसआईआर कार्यक्रमों को भी पूर्ण आयोग की मंजूरी मिली थी।

गोवा के मामलों पर आयोग की सफाई और बड़ी राहत

गोवा में एसआईआर के दौरान कुछ मतदाताओं के नाम छूटने के मामले पर आयोग ने बड़ा एक्शन लिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के निर्देश पर बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) ने ऐसे मतदाताओं के घर-घर जाकर फॉर्म एकत्र किए। सामने आया है कि 97 में से 81 मतदाताओं ने सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भर दिया है।

इसके अलावा, दिल्ली और महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारियों के विशेष अनुरोध पर आयोग ने इन दोनों राज्यों में एसआईआर के तहत दावे और आपत्तियों के लिए समय सीमा बढ़ाने का बड़ा फैसला किया है।

पात्र नागरिकों के लिए आयोग का विशेष संदेश

आयोग ने जोर देकर कहा है कि एसआईआर प्रक्रिया का एकमात्र उद्देश्य सटीक और त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करना है। जिन पात्र नागरिकों के नाम किसी वजह से मतदाता सूची में छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं।

सूची में नाम जोड़ने के लिए घर-घर सहायता, ऑनलाइन सुनवाई, कमजोर वर्ग के लिए विशेष शिविर और अतिरिक्त समय देने की व्यवस्था की गई है। नागरिक आयोग के आधिकारिक मतदाता सेवा प्लेटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

क्या आपको लगता है कि चुनाव आयोग के इन कड़े और स्पष्ट फैसलों से विपक्ष का विरोध शांत हो पाएगा या आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ेगा?