नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से दिया गया अल्टीमेटम शनिवार यानी 26 सितंबर को पूरा हो रहा है। संगठन ने पहले मुख्य चुनाव आयुक्त से 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने की मांग की थी और अब कहा है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। संगठन की ओर से आंदोलन को लेकर तैयारियां शुरू किए जाने की बात भी कही गई है।
CJP का यह अभियान चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच सामने आया है। संगठन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे के अलावा SIR प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों की स्वतंत्र जांच और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया में बदलाव की मांग भी रखी है।
48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद 2 अक्टूबर के आंदोलन का ऐलान
कॉकरोच जनता पार्टी ने 24 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए 48 घंटे की समयसीमा तय की थी। इसके बाद संगठन की ओर से कहा गया कि यदि शनिवार तक इस्तीफा नहीं दिया जाता है तो 2 अक्टूबर से आंदोलन शुरू किया जाएगा।
CJP की ओर से सोशल मीडिया पर भी आंदोलन को लेकर संदेश जारी किए गए हैं। संगठन ने जंतर-मंतर पर समर्थकों की मौजूदगी से जुड़े वीडियो साझा करते हुए आगामी प्रदर्शन की तैयारी का संकेत दिया है। संगठन ने अपने अभियान को चुनाव आयोग में सुधार की मांग से जोड़ा है।
SIR को लेकर CJP ने लगाए गंभीर आरोप
CJP ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। संगठन के संयोजक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक सौरव दास तथा आशुतोष रांका ने ‘इलेक्शन कमीशन ठीक करो’ अभियान के तहत अपनी मांगें सामने रखी हैं।
संगठन का दावा है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूचियों से बाहर हुए हैं। CJP ने दावा किया है कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक वैध नाम हटाए गए हैं। यह आंकड़ा संगठन की ओर से किया गया दावा है और इसी के आधार पर उसने चुनाव आयोग से प्रक्रिया की पारदर्शिता स्पष्ट करने की मांग की है।
CJP का कहना है कि चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मतदाता सूची से हटाए गए प्रत्येक नाम के संबंध में कानूनी और समीक्षा योग्य प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं। संगठन ने SIR के दौरान लिए गए निर्णयों की स्वतंत्र जांच की मांग भी की है।
जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने की मांग
कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी मांगों में SIR के तहत नाम हटाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। संगठन ने सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने तक जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल करने की मांग भी रखी है।
इसके अलावा CJP ने मतदाता सूची से जुड़े सभी रिकॉर्ड उच्चतम न्यायालय या किसी स्वतंत्र न्यायिक समिति को सौंपे जाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड और फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा से उठाए जा रहे सवालों की जांच की जा सकती है।
ये आरोप और मांगें CJP की ओर से रखी गई हैं। चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े विषयों पर विभिन्न राजनीतिक दलों और पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की रिपोर्ट से बढ़ी चर्चा
CJP का आंदोलन ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर कथित मतभेदों की एक रिपोर्ट ने राजनीतिक बहस को तेज किया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि पिछले कुछ महीनों में दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी।
इस रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हुईं। CJP ने भी इसी घटनाक्रम को अपने अभियान का आधार बनाया है।
चुनाव आयोग की नियुक्ति व्यवस्था में बदलाव की मांग
CJP ने केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तक अपना अभियान सीमित नहीं रखा है। संगठन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और नियुक्ति व्यवस्था में बदलाव की मांग भी उठाई है।
संगठन की ओर से 2023 के उस कानून को निरस्त करने की मांग की गई है, जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित है। CJP ने इसके स्थान पर ऐसी व्यवस्था तैयार करने की मांग की है जिसमें नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए और नागरिक समाज की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो।
संगठन का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था से जुड़े निर्णयों और नियुक्तियों में पारदर्शिता तथा सार्वजनिक विश्वास महत्वपूर्ण है। इसी आधार पर उसने नियुक्ति व्यवस्था में बदलाव की मांग रखी है।
2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन का दावा
CJP की ओर से 2 अक्टूबर से नए चरण के आंदोलन की घोषणा की गई है। संगठन ने कहा है कि यदि उसकी मांग पूरी नहीं होती है तो गांधी जयंती के दिन से आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन की ओर से इसे देशव्यापी विरोध के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
CJP ने अपने अभियान को चुनाव आयोग में सुधार, मतदाता सूची की पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों से जोड़ा है। संगठन के पदाधिकारियों ने समर्थकों से आंदोलन की तैयारी करने की अपील भी की है।
अब 26 सितंबर के बाद क्या होगा?
CJP की ओर से तय की गई समयसीमा शनिवार 26 सितंबर को पूरी हो रही है। ऐसे में अब संगठन की अगली कार्रवाई पर नजर है। संगठन ने पहले ही 2 अक्टूबर से आंदोलन शुरू करने की घोषणा कर दी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच SIR, मतदाता सूची में बदलाव, चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। CJP ने अपने आरोपों और मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाने की घोषणा की है, जबकि चुनाव आयोग से संबंधित मुद्दों पर अलग-अलग राजनीतिक पक्ष अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
फिलहाल 26 सितंबर की समयसीमा पूरी होने के बाद CJP की अगली रणनीति और 2 अक्टूबर से प्रस्तावित आंदोलन को लेकर घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है।
