गर्मी से राहत लेकर आया मानसून, लेकिन कानपुर के लिए पहली ही बारिश कई सवाल भी छोड़ गई। कुछ घंटों की बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी। सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, प्रमुख चौराहों पर यातायात थम गया और प्रदेश के बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल लाला लाजपत राय (हैलेट) अस्पताल तक जलभराव की चपेट में आ गया। नगर निगम के दावों, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और मानसून पूर्व तैयारियों पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शहर के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को पानी से भरी सड़कों, जाम और बदहाल व्यवस्था का सामना करना पड़ा।कानपुर में पहली बारिश से जलभराव | फोटो: एनडीटीवी

कानपुर में पहली बारिश से जलभराव | फोटो: एनडीटीवी

पहली बारिश ने खोल दी तैयारियों की परतें

कानपुर में मानसून की पहली जोरदार बारिश ने यह साफ कर दिया कि शहर अभी भी बारिश से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। स्वरूप नगर के दा चार्ट चौराहा, जरीब चौकी, गुमटी नंबर, पीरोड, कौशलपुरी, साकेत नगर, गोविंद नगर, फजलगंज, रावतपुर, मरियमपुर और चावला मार्केट जैसे कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं। कई स्थानों पर सीएम ग्रिड और अन्य विकास परियोजनाओं के तहत खोदी गई सड़कें बारिश के पानी से खतरनाक बन गईं। दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक प्रभावित रहे, जबकि कई जगहों पर वाहन रेंगते नजर आए। आम लोगों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली बारिश ही उन तैयारियों की वास्तविक तस्वीर दिखा देती है।

हैलेट अस्पताल में मरीजों की बढ़ी मुश्किलें

बारिश का सबसे चिंताजनक असर जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल लाला लाजपत राय (हैलेट) अस्पताल में देखने को मिला। अस्पताल परिसर में पानी भर जाने से मरीजों, उनके परिजनों, बुजुर्गों, बच्चों और स्वास्थ्यकर्मियों को घुटनों तक पानी में चलकर अस्पताल तक पहुंचना पड़ा। इलाज के लिए आने वाले लोगों ने सवाल उठाया कि जिस अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सबसे बेहतर होनी चाहिए, वहां जलभराव जैसी समस्या लगातार क्यों बनी हुई है। अस्पताल परिसर में पानी जमा होने से मरीजों के आवागमन के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि हल्की बारिश में ही यदि यह स्थिति बन रही है, तो लगातार बारिश के दौरान हालात और गंभीर हो सकते हैं।

मेट्रो परियोजना और अधूरे नालों ने बढ़ाई परेशानी

शहर के कई हिस्सों में जलभराव की वजह केवल बारिश नहीं, बल्कि अधूरी परियोजनाएं और खराब जल निकासी व्यवस्था भी मानी जा रही है। देवकी चौराहा के पास मेट्रो निर्माण के दौरान तोड़े गए नालों की समय पर मरम्मत नहीं होने और चौक नाले के चौड़ीकरण का काम अधूरा रहने से काकादेव, आरटीओ मार्ग, लाजपत नगर और सर्वोदय नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में पानी भर गया। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से हो रहे शहरी विकास कार्यों के साथ यदि ड्रेनेज सिस्टम को समानांतर मजबूत नहीं किया गया, तो हर मानसून में इसी तरह की समस्याएं सामने आती रहेंगी। स्थानीय नागरिकों ने भी जल निकासी व्यवस्था की नियमित सफाई और स्थायी समाधान की मांग की है।

बारिश से राहत भी, चुनौती भी; अब अगली परीक्षा लगातार मानसून की

मौसम विभाग के अनुसार बारिश के बाद शहर का अधिकतम तापमान घटकर 33.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे लोगों को उमस और भीषण गर्मी से राहत मिली। हालांकि राहत के साथ शहर को जलभराव, ट्रैफिक जाम और अव्यवस्थित शहरी ढांचे की चुनौती भी झेलनी पड़ी। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। ऐसे में नगर निगम, जलकल विभाग और संबंधित एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त कर नागरिकों को राहत दी जाए। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो लगातार बारिश शहर के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।