जीतन राम मांझी(फोटो- नवभारतटाइम्स.कॉम)जीतन राम मांझी(फोटो- नवभारतटाइम्स.कॉम)

बिहार के बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नया मोड़ आ गया है। एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी की मां आशा देवी के आवेदन पर पांच दिन बाद भोजपुर जिले के शाहपुर थाने में हत्या का मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में एनकाउंटर में शामिल पांच पुलिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाया गया है। दूसरी ओर, इस मामले पर सियासत भी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए एनकाउंटर को जस्टिफाइड बताया है। मांझी के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।

मृतक की मां के आवेदन पर पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का केस

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत तिवारी की 17 जून 2026 को पुलिस एनकाउंटर में गोली लगने के बाद इलाज के दौरान पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में मौत हो गई थी। घटना के बाद से ही परिजन लगातार पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे थे।

मंगलवार को मृतक की मां आशा देवी के आवेदन के आधार पर शाहपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में जगदीशपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी (SHO) राजेश मालाकार समेत पांच पुलिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाया गया है।

आशा देवी ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि घटना के समय भरत तिवारी फेसबुक पर लाइव था। उनके अनुसार वीडियो में साफ दिखाई देता है कि भरत ने अपनी पिस्तौल फेंक दी थी, जिसके बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया और फिर पांच गोलियां मार दीं। परिवार का आरोप है कि यह पुलिस मुठभेड़ नहीं बल्कि हत्या का मामला है। परिजनों की मांग है कि दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और उन्हें सख्त से सख्त सजा मिले।

डॉक्टर के बयान और जांच से मामले ने पकड़ा तूल

भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। सोमवार को आरा सदर अस्पताल के उस डॉक्टर का बयान भी सामने आया, जिन्होंने एनकाउंटर के बाद भरत तिवारी का प्राथमिक उपचार किया था। डॉक्टर के अनुसार, भरत तिवारी को चार से पांच गोलियां लगी थीं।

एनकाउंटर को लेकर पहले ही कई सवाल उठाए जा चुके हैं। मामले में न्यायिक जांच की मांग भी लगातार की जा रही है। राजनीतिक दबाव बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन का फैसला किया है। अब पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच और भी अहम हो गई है।

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जीतन राम मांझी ने एनकाउंटर को बताया जस्टिफाइड, बयान पर बढ़ा सियासी विवाद

इसी बीच केंद्रीय मंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भरत तिवारी एनकाउंटर को सही ठहराते हुए पुलिस का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यदि भरत तिवारी मानसिक रूप से विक्षिप्त था, जैसा कि उसका परिवार दावा कर रहा है, तो उसके हाथ में पिस्तौल क्यों थी और परिवार ने उससे हथियार क्यों नहीं छीना।

मांझी ने कहा कि देश में आए दिन पुलिसकर्मियों पर हमले हो रहे हैं और कई मामलों में पुलिसकर्मी अपनी जान भी गंवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस कार्रवाई करती है तो उस पर सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन पुलिसकर्मियों पर होने वाले हमलों पर उतनी चर्चा नहीं होती। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो घटना हुई है, हम उस एनकाउंटर को जस्टिफाइड मानते हैं।

मांझी के इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। इससे पहले भी वे कई बार अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं। इस बार भी उनके बयान पर विपक्ष समेत कई नेताओं ने सवाल उठाए हैं।

एनकाउंटर पर बिहार की राजनीति गरमाई, कई नेताओं ने उठाए सवाल

भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार में राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा समेत कई नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह और सांसद पप्पू यादव भी इस मामले में सरकार को घेर चुके हैं। लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव और विवाद के बीच सरकार ने न्यायिक आयोग गठित कर जांच शुरू करा दी है। अब सभी की नजर इस जांच पर टिकी है कि एनकाउंटर परिस्थितियों के अनुसार हुआ था या फिर परिजनों के आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज होने के बाद इस केस ने नया कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले लिया है।