erer | Source: ereनई दिल्ली। गर्मी के मौसम में पंखा घर की सबसे जरूरी चीजों में शामिल हो जाता है। ऐसे में अगर पंखा पहले की तरह तेज हवा देना बंद कर दे या उसकी गति अचानक कम हो जाए तो अक्सर लोग इसे पुराना समझकर नया पंखा खरीदने की तैयारी करने लगते हैं। लेकिन हर बार धीमी गति का मतलब पंखे का खराब होना नहीं होता। कई बार छोटी सी तकनीकी समस्या, गंदगी या किसी हिस्से में खराबी के कारण भी पंखे की रफ्तार कम हो सकती है।

नया पंखा खरीदने से पहले कुछ जरूरी चीजों की जांच करा लेने से अनावश्यक खर्च से बचा जा सकता है। खासकर पुराने पंखे में अगर धीरे-धीरे स्पीड कम हुई है तो उसे तुरंत बदलने के बजाय पहले यह पता करना जरूरी है कि समस्या वास्तव में कहां है।

1. सबसे पहले पंखे की धूल साफ करें

पंखे की गति कम होने की सबसे सामान्य वजहों में से एक लंबे समय से जमा धूल भी हो सकती है। पंखे के ब्लेड, मोटर के आसपास और ऊपर के हिस्से में धूल की मोटी परत जमा होने पर पंखे के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।

अगर काफी समय से पंखे की सफाई नहीं हुई है तो सबसे पहले बिजली का कनेक्शन बंद करके पंखे को अच्छी तरह साफ करें। ब्लेड और मोटर के आसपास जमी धूल हटाने के बाद पंखे की गति में अंतर दिखाई दे सकता है। सफाई के दौरान सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें और बिजली चालू रहते हुए पंखे की सफाई न करें।

2. कैपेसिटर की खराबी भी हो सकती है वजह

अगर पंखा चल तो रहा है लेकिन पहले की तुलना में काफी धीमा हो गया है, तो कैपेसिटर की जांच कराना जरूरी है। पंखे के संचालन में कैपेसिटर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और इसमें खराबी आने पर पंखे की गति प्रभावित हो सकती है।

ऐसी स्थिति में किसी योग्य इलेक्ट्रीशियन से कैपेसिटर की जांच कराएं। अगर कैपेसिटर खराब पाया जाता है तो उसे बदलने के बाद पंखे की गति सामान्य हो सकती है। बिजली से जुड़े इस काम को खुद करने के बजाय प्रशिक्षित व्यक्ति से ही करवाना सुरक्षित है।

3. कहीं रेगुलेटर तो नहीं दे रहा धोखा?

कई बार पंखे की मोटर में कोई बड़ी समस्या नहीं होती, बल्कि खराबी रेगुलेटर में होती है। अगर रेगुलेटर घुमाने के बावजूद पंखे की गति में ज्यादा बदलाव नहीं हो रहा है या पंखा लगभग एक ही रफ्तार पर चलता रहता है, तो रेगुलेटर की जांच करानी चाहिए।

पुराने या खराब रेगुलेटर की वजह से पंखे की स्पीड नियंत्रित करने में परेशानी हो सकती है। जांच के बाद जरूरत पड़ने पर रेगुलेटर बदलवाया जा सकता है। इसलिए सिर्फ पंखे को देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि खराबी मोटर में ही है।

4. पुरानी वायरिंग को नजरअंदाज न करें

पंखे की धीमी गति के पीछे घर की विद्युत वायरिंग में खराबी भी एक कारण हो सकती है। अगर वायरिंग पुरानी है या कहीं कनेक्शन ढीला है तो पंखे के संचालन पर असर पड़ सकता है।

अगर पंखा कभी तेज और कभी धीमा चलता है, बीच-बीच में आवाज करता है या बार-बार बिजली से जुड़ी समस्या सामने आती है, तो वायरिंग और कनेक्शन की जांच किसी इलेक्ट्रीशियन से करानी चाहिए। ढीले या खराब कनेक्शन को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।

5. आवाज और मोटर के ज्यादा गर्म होने पर दें ध्यान

पंखे की धीमी गति के साथ अगर मोटर से असामान्य आवाज भी आ रही है या मोटर वाला हिस्सा जरूरत से ज्यादा गर्म हो रहा है, तो समस्या को केवल धूल या रेगुलेटर से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

ऐसी स्थिति में पंखे को बंद कर देना बेहतर है और किसी जानकार इलेक्ट्रीशियन से इसकी जांच करानी चाहिए। मोटर या अंदर के किसी अन्य हिस्से में खराबी होने की स्थिति में समय रहते मरम्मत कराना जरूरी हो सकता है।

किन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?

अगर पंखा अचानक बहुत धीमा हो जाए, बार-बार गति बदलने लगे, असामान्य आवाज करे, मोटर जरूरत से ज्यादा गर्म हो या वायरिंग से जुड़ी समस्या दिखाई दे, तो उसे लगातार चलाते रहना सही नहीं है। ऐसी स्थिति में पहले बिजली बंद कराकर विशेषज्ञ से जांच करवाना सुरक्षित विकल्प है।

वहीं अगर समस्या केवल धूल जमा होने या किसी सामान्य हिस्से की खराबी के कारण है तो जरूरी मरम्मत और सफाई के बाद पुराने पंखे का इस्तेमाल जारी रखा जा सकता है।

नया पंखा खरीदने की जरूरत कब पड़ सकती है?

अगर पंखे की सफाई कराने, कैपेसिटर और रेगुलेटर की जांच करने तथा वायरिंग को चेक कराने के बाद भी उसकी गति सामान्य नहीं होती, तो मोटर या किसी अन्य आंतरिक हिस्से में बड़ी खराबी की संभावना हो सकती है। बार-बार खराब होने वाले पंखे में मरम्मत की लागत और उसकी स्थिति को देखते हुए नया पंखा लेने पर विचार किया जा सकता है।

हालांकि, केवल स्पीड कम होने के आधार पर तुरंत नया पंखा खरीदना जरूरी नहीं है। पहले समस्या का कारण पता करना अधिक उपयोगी हो सकता है।