बिहार की राजनीति में एक बार फिर एनकाउंटर और कानून-व्यवस्था बड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर और मुजफ्फरपुर में जगवीर राय की मौत को लेकर उठे सवाल अब सियासी बहस का केंद्र बन गए हैं। पूर्णिया से सांसद और जन अधिकार पार्टी के संस्थापक पप्पू यादव ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को सीधे निशाने पर लेते हुए बिहार में हुए सभी एनकाउंटरों की CBI जांच की मांग कर दी है। उनका आरोप है कि कई मामलों में निष्पक्ष जांच नहीं हुई और सच सामने आना जरूरी है। मुजफ्फरपुर में धरने पर बैठे पप्पू यादव के बयान ने न केवल बिहार की राजनीति को गर्मा दिया है, बल्कि कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।भरत तिवारी एनकाउंटर पर पप्पू यादव | फोटो: NDTV

भरत तिवारी एनकाउंटर पर पप्पू यादव | फोटो: NDTV

मुजफ्फरपुर से उठी आवाज, जगवीर राय की मौत पर शुरू हुआ विरोध

सोमवार को पूर्णिया सांसद पप्पू यादव मुजफ्फरपुर पहुंचे, जहां उन्होंने गायघाट थाना क्षेत्र में हुई जगवीर राय की मौत के मामले को लेकर धरना दिया। इस दौरान उन्होंने प्रशासन और सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। पप्पू यादव ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या परिवार की नहीं, बल्कि न्याय और कानून के राज की लड़ाई है। उन्होंने दावा किया कि मुजफ्फरपुर में अपराध, दबंगई और राजनीतिक संरक्षण की संस्कृति ने आम लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। बिना नाम लिए उन्होंने एक जेडीयू नेता पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग खुद को मुख्यमंत्री से कम नहीं समझते। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर के लोगों को ऐसे प्रभावशाली नेताओं के दबाव से मुक्ति मिलनी चाहिए। पप्पू यादव ने यह भी कहा कि अगर अपराध और अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़नी पड़े, तो वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उनके मुताबिक, जनता को सुरक्षा और न्याय दिलाना राजनीति से बड़ा मुद्दा है।

भरत तिवारी एनकाउंटर पर उठे सवाल, CBI जांच की मांग तेज

भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पहले से ही राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्षी दल लगातार इस मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। इसी कड़ी में पप्पू यादव ने भी मामले को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी के नेता खुद इस एनकाउंटर को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि किसी मंत्री या राजनीतिक दल को पुलिस कार्रवाई पर संदेह है, तो मामले की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। पप्पू यादव ने मांग की कि भरत तिवारी एनकाउंटर की जांच CBI से कराई जाए और इसकी निगरानी किसी वर्तमान न्यायाधीश की देखरेख में हो। उनका कहना है कि इस तरह के मामलों में केवल पुलिस की रिपोर्ट पर्याप्त नहीं होती, बल्कि जनता का विश्वास बहाल करने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भरत तिवारी को विशेष रूप से निशाना बनाया गया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बिना सच्चाई सामने नहीं आएगी।

‘सिर्फ एक मामला नहीं, बिहार के सभी एनकाउंटरों की जांच हो’

पप्पू यादव की मांग सिर्फ भरत तिवारी केस तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले वर्षों में हुए सभी एनकाउंटरों की CBI जांच कराई जानी चाहिए। उनका तर्क है कि हर पुलिस मुठभेड़ की स्वतंत्र समीक्षा जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कार्रवाई कानूनी और पारदर्शी तरीके से हुई है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि जहां-जहां दलितों और कमजोर वर्गों के लोगों की भीड़ द्वारा हत्या की गई है, उन सभी मामलों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक दबाव के कारण सच्चाई सामने नहीं आ पाती। इसलिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। पप्पू यादव ने कहा कि यदि किसी भी मामले में पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

बिहार की राजनीति में नया मुद्दा, सरकार पर बढ़ सकता है दबाव

पप्पू यादव के बयान ऐसे समय में आए हैं जब बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। एनकाउंटर, अपराध और मॉब लिंचिंग जैसे मुद्दे पहले से ही राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। अब CBI जांच की मांग ने इस विवाद को और बड़ा बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भरत तिवारी एनकाउंटर और अन्य मामलों को लेकर विपक्ष आगामी चुनावी राजनीति में सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है। वहीं सरकार और पुलिस प्रशासन का पक्ष है कि सभी कार्रवाई कानून के दायरे में की गई हैं और किसी भी मामले में जांच से पीछे हटने का सवाल नहीं है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि एनकाउंटर और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठे सवाल जल्द थमने वाले नहीं हैं। आने वाले दिनों में यदि इस मुद्दे पर राजनीतिक दबाव बढ़ता है, तो सरकार को अधिक विस्तृत जवाब देना पड़ सकता है। फिलहाल बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है-क्या राज्य में हुए एनकाउंटरों की स्वतंत्र जांच होगी, या यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाएगा?