
लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पेश होने के दौरान सदन की कार्यवाही।Source : Chrome
देशभर में पेपर लीक के मामलों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी के बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' पेश किया। हालांकि, विपक्ष के जोरदार हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही बाधित हो गई और चर्चा शुरू होने से पहले ही लोकसभा स्थगित करनी पड़ी।
नए बिल में क्या होगा?
सरकार का कहना है कि संशोधित विधेयक का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक जैसे अपराधों पर कड़ी रोक लगाना है। प्रस्तावित प्रावधानों के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की व्यवस्था की गई है। साथ ही जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
सजा और जुर्माने के कड़े प्रावधान
बिल में पेपर लीक के दोषियों के लिए कम से कम पांच साल और अधिकतम दस साल की सजा का प्रस्ताव है। वहीं यदि मामला संगठित अपराध की श्रेणी में आता है, तो सात साल तक की न्यूनतम सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
विपक्ष के हंगामे से नहीं हो सकी चर्चा
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में यह विधेयक पेश किया। सरकार की योजना इस पर कई घंटे चर्चा कराने की थी, लेकिन विपक्षी दलों के विरोध और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हो गई। लगातार हंगामे के चलते लोकसभा को स्थगित करना पड़ा।
एनडीए ने बनाई थी खास रणनीति
इस विधेयक पर चर्चा के लिए एनडीए ने युवा सांसदों को आगे रखने की रणनीति बनाई थी। भाजपा की ओर से बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या सहित कई सांसद अपनी बात रखने वाले थे। इसके अलावा जेडीयू, टीडीपी, शिवसेना, एनसीपी, अपना दल और एलजेपी (रामविलास) के सांसदों को भी चर्चा में भाग लेना था।
नए शिक्षा मंत्री पर भी रही नजर
लोकसभा की कार्यवाही के दौरान नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी भी सदन में मौजूद रहे। प्रश्नकाल में शिक्षा विभाग से जुड़े कई मुद्दों पर सवाल उठाए गए। हाल ही में शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह पहला बड़ा संसदीय सत्र था, जिसमें शिक्षा मंत्रालय से जुड़े अहम विधेयक को पेश किया गया।
