पटना। बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में शुक्रवार को घटनाक्रम तेजी से बदलता नजर आया। भरत तिवारी की मां आशा देवी और अन्य परिजनों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात कर न्याय की मांग रखी। इस मुलाकात के कुछ ही घंटों बाद राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए भोजपुर जिले के जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीओ को पद से हटा दिया। वहीं, एनकाउंटर के समय क्षेत्र के एसडीपीओ रहे डीएसपी राजेश शर्मा को भी उनकी वर्तमान जिम्मेदारी से हटाकर पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया। इस कार्रवाई को भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सरकार के बड़े फैसले के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद बदला घटनाक्रम
शुक्रवार को भरत तिवारी की मां आशा देवी सहित परिवार के अन्य सदस्य पटना स्थित मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष पूरे मामले को रखा और न्याय दिलाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने परिजनों को निष्पक्ष कार्रवाई और न्याय का भरोसा दिलाया।
मुख्यमंत्री से मुलाकात समाप्त होने के कुछ ही समय बाद सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से आदेश जारी कर जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीओ साकेत कुमार को उनके पद से हटा दिया गया। आदेश के अनुसार उन्हें अगले आदेश तक सामान्य प्रशासन विभाग, पटना में वापस बुला लिया गया है।
एनकाउंटर के समय तैनात रहे डीएसपी पर भी कार्रवाई
सरकार ने केवल एसडीओ के खिलाफ ही नहीं, बल्कि एनकाउंटर के समय जगदीशपुर के एसडीपीओ रहे राजेश शर्मा के संबंध में भी कार्रवाई की। गृह विभाग ने आदेश जारी कर उन्हें उनकी वर्तमान पोस्टिंग से हटाते हुए पुलिस मुख्यालय में पदस्थापन की प्रतीक्षा में भेज दिया।
राजेश शर्मा पहले जगदीशपुर में एसडीपीओ थे और बाद में उनका स्थानांतरण मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो में किया गया था। अब उन्हें वहां से भी हटाकर पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया है।
एसडीओ को हटाने की मांग क्यों उठ रही थी?
भरत तिवारी के परिजनों का आरोप है कि वह बिलौटी गांव के पास बसाए जा रहे बाढ़ पीड़ितों से जुड़े मुद्दे को लगातार उठा रहे थे। उनका कहना है कि इस मामले में प्रशासन की कथित लापरवाही के खिलाफ भरत तिवारी कई बार जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीओ साकेत कुमार से मिले थे, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि एक अवसर पर एसडीओ कार्यालय में मौजूद गार्ड ने भरत तिवारी के साथ कथित रूप से मारपीट की थी। इसी वजह से परिवार लगातार एसडीओ के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा था।
सोशल मीडिया विवाद के बाद पुलिस पहुंची थी कार्रवाई के लिए
जानकारी के अनुसार, भरत तिवारी प्रशासन के खिलाफ लगातार सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। आरोप है कि उन्होंने तत्कालीन एसडीओ के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा और धमकी भरे संदेश भी साझा किए थे। इसके बाद पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए पहुंची थी।
इसी कार्रवाई के दौरान 17 जून को हुए एनकाउंटर में गोली लगने से भरत तिवारी की मौत हो गई। इस घटना के बाद से मामला लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
परिजनों ने दर्ज कराया है हत्या का मुकदमा
भरत तिवारी के परिजनों ने शाहपुर थाने में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या की धाराओं में मामला दर्ज कराया है। इस एफआईआर में तत्कालीन एसडीपीओ राजेश शर्मा का नाम भी शामिल है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्हें पहले जगदीशपुर के एसडीपीओ पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय भेजा गया था। बाद में राज्य सरकार ने उनकी तैनाती मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो में कर दी थी। इस नई पोस्टिंग को लेकर भी सवाल उठे थे और भरत तिवारी के परिजनों ने सरकार की आलोचना की थी।
नई पोस्टिंग पर भी उठे थे सवाल
राजेश शर्मा की नई नियुक्ति को लेकर परिजनों ने लगातार आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि जिस अधिकारी का नाम एफआईआर में आरोपी के रूप में दर्ज है, उसे दूसरी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना उचित नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर परिवार ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान भी अपनी बात रखी थी।
अब सरकार द्वारा उन्हें वर्तमान जिम्मेदारी से हटाकर पुलिस मुख्यालय भेजे जाने को इस मामले में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
