नई दिल्ली। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन और कार्यकर्ताओं की हिरासत को लेकर राजनीतिक घमासान तेज होता दिखाई दे रहा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आंदोलन को समर्थन देते हुए युवाओं के साथ फिर सड़कों पर उतरने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन और देश के युवा एक बार फिर बड़ी संख्या में प्रदर्शन करेंगे और उनकी आवाज पहले से अधिक मजबूती के साथ पूरे देश में गूंजेगी। राहुल गांधी ने यह भी घोषणा की कि वह मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात कर दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई का मुद्दा उठाएंगे। उनके बयान के बाद CJP के प्रदर्शन को लेकर सियासी बहस और तेज हो गई है।
CJP के तीन नेताओं की हिरासत के बाद आंदोलन की कमान अजिंक्य शिंदे को
CJP के प्रदर्शन से जुड़े अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को हिरासत में लिए जाने के बाद संगठन ने आंदोलन की जिम्मेदारी अजिंक्य शिंदे को सौंपने की घोषणा की है। उन्होंने रविवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है। इससे पहले दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था।
प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग की गई तथा कई स्थानों पर आवाजाही पर नियंत्रण लगाया गया। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करना चाहती है। पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी।
अब राहुल गांधी के आंदोलन में शामिल होने के ऐलान ने इस मामले को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया है कि विपक्ष और युवा प्रदर्शन के जरिए अपनी मांगों को आगे बढ़ाएंगे।
राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने अपने बयान में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस का रवैया प्रदर्शनकारियों के प्रति कठोर रहा है और महिलाओं तथा युवाओं के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है। ये आरोप राहुल गांधी की ओर से लगाए गए हैं।
उन्होंने कहा, “अमित शाह की दिल्ली पुलिस खुद तो गुंडागर्दी पर उतर ही आई- RSS-BJP के असली गुंडों को भी महिलाओं और युवाओं पर हिंसा करने की खुली छूट और बढ़ावा दे रही है। जैसा मैंने कहा था, मोगैंबो मोदी और उसकी सरकार जितना दबाएगी, Gen Z और छात्रों का गुस्सा उतना ही बढ़ेगा।”
राहुल गांधी ने अपने बयान में केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि विरोध की आवाज को दबाने से युवाओं का आक्रोश कम नहीं होगा। उनके मुताबिक, छात्र और युवा इस मुद्दे पर पीछे हटने के बजाय अपनी आवाज को और बुलंद करेंगे।
12 अक्टूबर को सड़कों पर उतरने का ऐलान, युवाओं से जुड़ने की अपील
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि 12 अक्टूबर को कांग्रेस, INDIA गठबंधन और देश के युवा बड़ी संख्या में एक बार फिर सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने दावा किया कि इस बार आंदोलन की आवाज पहले से ज्यादा व्यापक होगी।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार जितनी चाहे पुलिस तैनात कर सकती है, लेकिन प्रदर्शनकारी डरने वाले नहीं हैं। राहुल गांधी ने कहा, “अमित शाह, जितनी पुलिस लानी है, 10 हजार, 20 हजार, 40 हजार, ले आइए। BJP-RSS के जितने गुंडे बुलाने हैं, बुला लीजिए। हम डरने वाले नहीं हैं। पीछे हटने वाले नहीं हैं। ये लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है!”
राहुल गांधी के इस बयान से स्पष्ट है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक दबाव बनाए रखना चाहती है। हालांकि, प्रस्तावित प्रदर्शन में कितने लोग शामिल होंगे और कार्यक्रम किन-किन स्थानों पर आयोजित किए जाएंगे, इसकी विस्तृत जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात कर उठाएंगे संविधान और लोकतंत्र का मुद्दा
राहुल गांधी ने घोषणा की कि वह सोमवार, 12 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से भी मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर संविधान और लोकतंत्र से जुड़े सवाल उठ रहे हैं, ऐसे में कानून के संरक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने कहा, “सोमवार को हम मुख्य न्यायाधीश से भी मिलेंगे और मांग करेंगे कि जब दिल्ली की सड़कों पर संविधान को तार-तार किया जा रहा है और लोकतंत्र को कुचला जा रहा है, तब कानून के संरक्षक आंखों पर पट्टी डाल कर नहीं बैठ सकते। संविधान की धज्जियां उड़ेंगी और हम चुप बैठेंगे? ऐसा हरगिज़ नहीं होगा। जवाबदेही तय करवाकर रहेंगे!”
राहुल गांधी के अनुसार, प्रस्तावित मुलाकात के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई और जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात का समय और उससे संबंधित अन्य औपचारिक जानकारियां उपलब्ध नहीं हैं।
राहुल गांधी ने कहा- विरोधियों की रणनीति को समझते हैं
राहुल गांधी ने इससे पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से भी केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधा था। उन्होंने लिखा कि वह नरेंद्र मोदी और आरएसएस से जुड़े लोगों के खिलाफ एक दशक से अधिक समय से संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना था कि लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण वह अपने विरोधियों की रणनीति और चालों को समझते हैं।
उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी दावा किया कि विरोधियों का दायरा धीरे-धीरे सिमट रहा है। राहुल गांधी के इस बयान को मौजूदा राजनीतिक विवाद और CJP के प्रदर्शन के संदर्भ में देखा जा रहा है।
उनके बयानों से संकेत मिलता है कि कांग्रेस इस मामले को केवल एक संगठन के प्रदर्शन तक सीमित रखने के बजाय संविधान, लोकतांत्रिक अधिकारों और पुलिस कार्रवाई से जुड़े व्यापक राजनीतिक मुद्दे के रूप में पेश करना चाहती है।
शनिवार को कांग्रेस ने प्रदर्शन से बनाई दूरी
CJP के आंदोलन को लेकर कांग्रेस की भूमिका भी चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस बुधवार से शुक्रवार तक दिल्ली में प्रदर्शन कर रही थी, लेकिन शनिवार को जब CJP ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश की और राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई, तब कांग्रेस ने उस दिन के प्रदर्शन में सीधे तौर पर हिस्सा नहीं लिया।
हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने अपने बयानों के जरिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र सरकार की आलोचना जारी रखी। राहुल गांधी शनिवार को चेन्नई में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होने गए थे।
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि शनिवार को कांग्रेस की ओर से CJP के प्रदर्शन में प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं थी, जबकि बाद में राहुल गांधी ने युवाओं और INDIA गठबंधन के साथ नए प्रदर्शन का ऐलान किया। इससे आंदोलन को लेकर कांग्रेस की आगे की रणनीति पर ध्यान केंद्रित हो गया है।
राजनीतिक टकराव के बीच आगे की कार्रवाई पर नजर
CJP के प्रदर्शन, कार्यकर्ताओं की हिरासत और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी ने आंदोलन को समर्थन देते हुए 12 अक्टूबर को युवाओं के साथ सड़कों पर उतरने और मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करने की घोषणा की है। वहीं, CJP की ओर से भी रविवार को विरोध प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया गया है।
आने वाले घटनाक्रम में यह महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित प्रदर्शन किस रूप में आयोजित होते हैं और उठाए गए मुद्दों पर संबंधित पक्षों की क्या प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल राहुल गांधी के बयान ने इस विवाद को नई राजनीतिक दिशा दी है और संविधान, लोकतंत्र तथा प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।
