erere | Source: ererभोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड को लेकर शुरू हुआ आंदोलन मंगलवार को उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च कर रहे गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) के डॉक्टरों को पुलिस ने रोकने की कोशिश की। हमीदिया अस्पताल के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव के बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज किया। इस कार्रवाई में चार इंटर्न डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

14,337 से 30 हजार रुपये स्टाइपेंड करने की मांग

गांधी मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से अपने स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों की मांग है कि वर्तमान 14,337 रुपये के मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए। प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि सरकार की ओर से करीब डेढ़ महीने पहले उनकी मांग पर अमल करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

इसी मांग को लेकर बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर सोमवार को गांधी मेडिकल कॉलेज से मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने निकले। प्रदर्शनकारियों का मार्ग मोती मस्जिद और कमला पार्क होते हुए सीएम हाउस की तरफ था। डॉक्टर अपनी मांग को सरकार तक सीधे पहुंचाने के लिए आगे बढ़ रहे थे।

हमीदिया अस्पताल के पास बढ़ा तनाव

मार्च के दौरान हमीदिया अस्पताल के गेट के सामने पुलिस ने भारी बल तैनात किया था। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी। डॉक्टरों ने जब आगे बढ़ने का प्रयास किया तो मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

पुलिस और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच धक्का-मुक्की के बाद स्थिति बिगड़ गई। इसके बाद पुलिस की ओर से वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया और लाठीचार्ज किया गया। कार्रवाई के दौरान कई डॉक्टरों को चोटें आईं।

चार डॉक्टरों को गंभीर चोटें

पुलिस कार्रवाई में चार इंटर्न डॉक्टरों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई है। एक डॉक्टर की आंख में गंभीर चोट लगी है। दूसरे डॉक्टर को इलाज के लिए आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया। तीसरे डॉक्टर के पैर में फ्रैक्चर हुआ है, जबकि चौथे डॉक्टर के कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा है।

घटना के बाद घायल डॉक्टरों और उनके साथियों में पुलिस कार्रवाई को लेकर काफी नाराजगी देखी गई। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने सवाल उठाया कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकों के साथ इस तरह की कार्रवाई क्यों की गई। डॉक्टरों ने कहा कि वे अपराधी नहीं हैं और उनके साथ इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है।

चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने की बातचीत की कोशिश

घटना के बाद चिकित्सा शिक्षा आयुक्त धनराजू एस. मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से बातचीत करने और स्थिति को सामान्य करने का प्रयास किया। हालांकि, डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर लिखित आश्वासन पर अड़े रहे।

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना था कि केवल मौखिक आश्वासन से उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा। वे सरकार से अपनी मांग पर लिखित आश्वासन चाहते थे। इसी मुद्दे को लेकर मौके पर गतिरोध बना रहा।

पुलिस कार्रवाई के बाद जूडा ने लिया बड़ा फैसला

डॉक्टरों पर पुलिस कार्रवाई के बाद जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JUDA) ने आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया। जूडा अध्यक्ष डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मंगलवार से नियमित ओपीडी और एलेक्टिव ओटी सेवाएं बंद रहेंगी।

हालांकि, जूडा ने मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर सेवाओं को जारी रखने की बात कही है। इसका मतलब है कि नियमित बाह्य रोगी विभाग और निर्धारित ऑपरेशन से जुड़ी सेवाओं पर आंदोलन का असर पड़ेगा, जबकि आपातकालीन एवं गंभीर मरीजों की सेवाएं जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

पीएमटीए ने घटना को बताया 'ब्लैक डे'

इस घटना पर पीएमटीए के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीया ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पुलिस कार्रवाई और अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए इस दिन को डॉक्टरों के लिए 'ब्लैक डे' करार दिया।

डॉ. राकेश मालवीया ने अधिकारियों के असंवेदनशील रवैए और पुलिस के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार बताया। उन्होंने घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

भोपाल के पुराने शहर में चार घंटे तक यातायात प्रभावित

डॉक्टरों के प्रदर्शन का असर केवल अस्पताल और प्रशासनिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा। विरोध प्रदर्शन के कारण भोपाल के पुराने शहर के कई इलाकों में यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। लालघाटी, वीआईपी रोड, कमला पार्क और न्यू मार्केट तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

बताया गया कि कई मार्गों पर करीब चार घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। इस दौरान वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा और कई प्रमुख रास्तों पर यातायात की रफ्तार बेहद धीमी रही।

प्रशासनिक अधिकारी मौके पर डटे रहे

स्थिति को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए प्रशासन की ओर से भी वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजा गया। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद रहे और स्थिति पर नजर बनाए रखी।

हालांकि, देर रात तक प्रदर्शनकारी डॉक्टर कमला पार्क के पास डटे रहे। एक ओर डॉक्टर अपनी मांगों पर लिखित आश्वासन की मांग कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने आंदोलन और यातायात व्यवस्था को संभालने की चुनौती बनी रही।

अब आगे क्या होगा?

इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन पुलिस कार्रवाई के बाद और गंभीर हो गया है। डॉक्टरों की मुख्य मांग 14,337 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये स्टाइपेंड करने की है। सरकार की ओर से पहले आश्वासन दिए जाने की बात डॉक्टरों ने कही है, लेकिन लिखित आश्वासन नहीं मिलने के कारण गतिरोध बना हुआ है।

जूडा के ओपीडी और एलेक्टिव ओटी सेवाएं बंद करने के ऐलान के बाद अब अस्पताल की नियमित सेवाओं पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर सेवाएं जारी रखने की घोषणा की गई है।