पटना। NEET UG 2026 में धांधली और अनियमितता के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कार्रवाई का दायरा भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। मुख्य सरगना डॉ. रविशंकर समेत तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसी की नजर उन मेडिकल छात्रों पर भी है, जिनके संबंध फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से जुड़े होने की आशंका जांच में सामने आई है। EOU के अनुसार, डॉ. रविशंकर और उसके भाई अश्विनी कुमार ने NEET UG 2026 के परिणाम के बाद मेडिकल कॉलेजों में पंजीकरण के लिए कई अभ्यर्थियों को कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए थे।

फर्जी आय, जाति और विकलांगता प्रमाणपत्रों का मामला

जांच एजेंसी को यह भी जानकारी मिली है कि डॉ. रविशंकर और अश्विनी कुमार द्वारा तैयार कराए गए कथित फर्जी आय, जाति और विकलांगता प्रमाणपत्रों के आधार पर पहले भी कई मेडिकल अभ्यर्थियों का मेडिकल कॉलेजों में नामांकन हो चुका है। इस जानकारी के सामने आने के बाद EOU ने मामले में जुड़े संभावित लोगों की पहचान शुरू कर दी है।

प्रारंभिक पूछताछ के आधार पर जांच एजेंसी ने कई मेडिकल, नर्सिंग और डेंटल छात्रों के अलावा अलग-अलग जिलों के बायोमीट्रिक मैनपावर सप्लायर, वेंडर तथा कथित तौर पर फर्जी आधार और अन्य प्रमाणपत्र तैयार करने में शामिल लोगों को चिह्नित किया है। इन लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए EOU कार्यालय बुलाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

PMCH और NMCH समेत कई मेडिकल कॉलेजों के छात्र जांच के दायरे में

EOU अब उन मेडिकल छात्रों से भी पूछताछ करने की तैयारी कर रही है, जिनका नामांकन पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH), नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (NMCH) सहित अन्य प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में हुआ है और जिनका संबंध कथित फर्जी प्रमाणपत्रों से सामने आया है।

जांच एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किस प्रक्रिया के तहत हुआ, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कराने या इस्तेमाल करने में छात्रों की क्या भूमिका रही। पूछताछ और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही मामले की आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।

तीनों आरोपी जेल भेजे गए, अब रिमांड की तैयारी

EOU सूत्रों के मुताबिक, NEET UG 2026 धांधली के मामले में गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को प्रारंभिक पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। जांच एजेंसी अब उनसे विस्तृत पूछताछ करना चाहती है।

जांच में लखीसराय में NEET पुनर्परीक्षा के दौरान तीन केंद्रों पर कथित धांधली के अलावा मई 2026 में आयोजित NEET मुख्य परीक्षा और इससे पहले हुई NEET परीक्षाओं में भी आरोपियों की कथित भूमिका की जांच की जा रही है। इसी वजह से EOU स्वतंत्रता दिवस के बाद आरोपियों को रिमांड पर लेने के लिए न्यायालय में आवेदन करने की तैयारी में है।

रविशंकर पर MBBS परीक्षा में भी सेटिंग का आरोप

EOU की जांच में पावापुरी मेडिकल कॉलेज के छात्र रविशंकर उर्फ सम्राट को लेकर भी कई जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, रविशंकर ने MBBS परीक्षा में भी कथित तौर पर सेटिंग कराई थी। इसके अलावा 29 जुलाई को आयोजित BPSSC की हवलदार अनुदेशक परीक्षा में भी बायोमीट्रिक वेंडरों की मदद से कथित धांधली कराने के प्रमाण मिलने की बात EOU ने कही है।

जांच के मुताबिक, रविशंकर ने NEET पुनर्परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को मेडिकल कॉलेजों में पंजीकरण और काउंसलिंग के लिए कथित तौर पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र, विकलांगता प्रमाणपत्र और आय प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए। इसके बदले में मोटी रकम वसूले जाने का भी आरोप जांच में सामने आया है।

अश्विनी कुमार के ठिकानों से मिले कई दस्तावेज

EOU ने रविशंकर के भाई अश्विनी कुमार के खिलाफ भी अलग से प्राथमिकी दर्ज की है। जांच एजेंसी के मुताबिक, अश्विनी कुमार के रामकृष्णा नगर स्थित संध्या हाइट अपार्टमेंट और किराये पर लिए गए सुनैना अपार्टमेंट के फ्लैट से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए थे।

बरामद सामग्री में आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित MBBS परीक्षा की कई खाली बुकलेट, AEDO यानी सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी परीक्षा से संबंधित सामग्री, पुलिस चयन आयोग की परीक्षा के परीक्षार्थियों के एडमिट कार्ड, स्कूल के अंकपत्र, मूल प्रमाणपत्र और स्थानांतरण प्रमाणपत्र (TC) समेत कई दस्तावेज शामिल बताए गए हैं।

जिनके दस्तावेज मिले, उन्हें भी बुलाया जा रहा

EOU अब बरामद दस्तावेजों से जुड़े लोगों का सत्यापन कर रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, जिन व्यक्तियों के एडमिट कार्ड, विकलांगता प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक आदि जब्त किए गए हैं, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है।

सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित लोगों को नोटिस भेजकर आर्थिक अपराध इकाई के कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य दस्तावेजों के स्रोत, उनके इस्तेमाल और पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच करना है।

जांच का दायरा क्यों बढ़ रहा है?

NEET UG 2026 से जुड़े इस मामले में जांच अब केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रह गई है। EOU की जांच में कथित फर्जी प्रमाणपत्र, बायोमीट्रिक व्यवस्था, मेडिकल कॉलेज पंजीकरण, काउंसलिंग और अन्य परीक्षाओं से जुड़े तार सामने आने के बाद एजेंसी अलग-अलग स्तर पर दस्तावेजों और संबंधित लोगों का सत्यापन कर रही है।

मेडिकल, नर्सिंग और डेंटल छात्रों के अलावा बायोमीट्रिक मैनपावर सप्लायर, वेंडर और कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों को जांच के दायरे में लाया जाना इसी विस्तारित जांच का हिस्सा है।

आगे क्या करेगी EOU?

EOU अब गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ करने की तैयारी में है। साथ ही फर्जी प्रमाणपत्रों से जुड़े मेडिकल छात्रों और अन्य व्यक्तियों को नोटिस देकर पूछताछ तथा दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। अलग-अलग ठिकानों से बरामद दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित फर्जीवाड़े का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है।

NEET UG 2026 धांधली मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मेडिकल कॉलेजों में नामांकन और पंजीकरण से जुड़े कथित फर्जी प्रमाणपत्रों का पहलू भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। फिलहाल EOU गिरफ्तार आरोपियों से आगे की पूछताछ और चिह्नित छात्रों तथा अन्य संदिग्ध लोगों के दस्तावेजों के सत्यापन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।