CM हाउस मार्च के दौरान भोपाल में प्रदर्शन करते किसान। | Source: Chrome

CM हाउस मार्च के दौरान भोपाल में प्रदर्शन करते किसान।Source : Chrome

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। किसान क्रांति पदयात्रा लेकर पहुंचे प्रदर्शनकारी अब मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने की तैयारी में हैं। आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों 100 प्रतिशत मूंग खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार पर फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

CM आवास की ओर बढ़ेंगे किसान

बुधवार, 29 जुलाई को भोपाल पहुंचे किसान मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की तैयारी में हैं। मंगलवार देर रात कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने किसान प्रतिनिधियों से बातचीत कर आंदोलन खत्म कराने की कोशिश की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद किसानों ने साफ कर दिया कि वे धरना खत्म नहीं करेंगे और आज सीएम हाउस तक मार्च करेंगे।

सरकार ने खेती बढ़वाई, अब खरीद से पीछे हटने का आरोप

प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि सरकार ने खुद मूंग की खेती बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया था, लेकिन अब फसल खरीदने से पीछे हट रही है। किसानों का दावा है कि एक एकड़ पर उन्हें 10 से 12 हजार रुपये तक का नुकसान हो रहा है। उनका यह भी कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रही हैं, जबकि नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र से आए हैं, लेकिन उनसे भी नाराज हैं।

युवा और Gen-Z किसानों ने संभाला आंदोलन

इस बार आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी कमान युवा और Gen-Z किसानों के हाथ में है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस आंदोलन में पारंपरिक किसान नेतृत्व कम दिखाई दे रहा है और नई पीढ़ी आगे बढ़कर अपनी आवाज बुलंद कर रही है। किसानों ने दावा किया कि यदि जरूरत पड़ी तो वे भोपाल में भी अपनी ताकत उसी तरह दिखाएंगे, जैसी देश ने हाल के दूसरे आंदोलनों में देखी है।

25 दिनों से जारी था आंदोलन, अब राजधानी पहुंचे किसान

भोपाल पहुंचने से पहले किसान करीब 25 दिनों तक अलग-अलग जिला मुख्यालयों पर धरना देते रहे। उनका आरोप है कि स्थानीय प्रशासन और सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया। इसी वजह से आंदोलन को राजधानी तक लाने का फैसला किया गया। वर्तमान में धरने में शामिल अधिकांश किसान नर्मदापुरम और आसपास के करीब 12 जिलों से आए हैं, जिनमें नर्मदा किनारे के इलाकों के किसान बड़ी संख्या में शामिल हैं।

आठ मांगें, लेकिन दो मुद्दों पर सरकार से फैसला चाहते हैं किसान

किसानों के अनुसार उनकी कुल आठ मांगें हैं, लेकिन सरकार से बातचीत के लिए 13 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने दो प्रमुख मांगों को प्राथमिकता दी है। पहली मांग है कि मूंग की फसल की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए। दूसरी मांग खाद वितरण में लागू टोकन सिस्टम को खत्म कर व्यवस्था को आसान और पारदर्शी बनाया जाए।

भोपाल में स्कूल बंद, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

किसान आंदोलन के कारण भोपाल के कई स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। जानकारी के अनुसार मंगलवार को करीब 500 किसान तीन जिलों की सीमाओं पर लगाए गए पुलिस बैरिकेड पार कर नर्मदापुरम से भोपाल पहुंचे। देर रात उन्होंने सड़क पर ही धरना शुरू कर दिया। किसान प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं, लेकिन बातचीत बेनतीजा रही।

रातभर सड़क पर डटे रहे किसान

सरकार से सकारात्मक जवाब नहीं मिलने के बाद किसान होशंगाबाद रोड पर पुलिस के अंतिम बैरिकेड के पास धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक वे यहां से नहीं हटेंगे। प्रशासन ने देर रात तक बातचीत की कोशिश की, लेकिन किसान अपनी बात पर अडिग रहे और सड़क पर ही रात बिताई।

सड़क किनारे बनाया भोजन, आंदोलन जारी रखने का ऐलान

धरने के दौरान किसानों ने सड़क पर ही आग जलाकर दाल-बाटी तैयार की। टमाटर और मिर्च भूनकर भरता बनाया और वहीं भोजन किया। किसानों ने कहा कि यदि आंदोलन लंबा चलता है तो वे महीने भर के राशन की भी व्यवस्था कर लेंगे और अपनी मांगें पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रखेंगे।

ट्रैफिक डायवर्जन लागू, प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

किसान आंदोलन के चलते भोपाल में कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है। नर्मदापुरम रोड से आने वाले वाहन 11 मील बाईपास, खजूरी कला और पिपलानी मार्ग का उपयोग करें। एमपी नगर से नर्मदापुरम रोड जाने वाले लोगों को गोविंदपुरा और पटेल नगर मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है। वहीं, एम्स जाने वाले वाहन कटरा हिल्स और बागसेवनिया मार्ग से आवागमन कर सकते हैं। प्रशासन ने लोगों से वैकल्पिक

मार्गों का उपयोग करने की अपील की है।