Source: Navbharat Times

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भोपाल: राजधानी भोपाल में शुक्रवार को विकास कार्यों की समीक्षा के लिए बुलाई गई जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक उस वक़्त विवादों में घिर गया। शहर के नए मास्टर प्लान को लेकर शुरू हुई चर्चा देखते ही देखते तीखी बहस में बदल गई। बैठक में मौजूद नेताओं और अधिकारियों के सामने बीजेपी और कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। मामला तब और बिगड़ गया, जब बीजेपी नेता ने कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद से “औकात में रहो” कह दिया। इस टिप्पणी से नाराज होकर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील बैठक छोड़कर बाहर निकल गए।

नए मास्टर प्लान की मांग पर शुरू हुई बहस

भोपाल कलेक्ट्रेट में सांसद आलोक शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में शहर के विकास से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भोपाल के लिए नया मास्टर प्लान लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि शहर अब भी वर्ष 2005 के मास्टर प्लान के आधार पर आगे बढ़ रहा है, जबकि बढ़ती आबादी और बदलती जरूरतों को देखते हुए नए प्लान की सख्त जरूरत है।

बीच में दखल के बाद बढ़ा विवाद

आरिफ मसूद अपनी बात सांसद आलोक शर्मा के सामने रख रहे थे। तभी फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत ने बीच में हस्तक्षेप किया। दोनों नेताओं के बीच बहस शुरू हो गई और देखते ही देखते माहौल गर्म हो गया। आरोप है कि इसी दौरान प्रमोद राजपूत ने विधायक से “औकात में रहो” कह दिया, जिसके बाद बैठक में तनाव बढ़ गया।

नाराज होकर बाहर निकले आरिफ मसूद और आतिफ अकील

इस टिप्पणी से नाराज कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। दोनों नेता बीच बैठक से उठकर बाहर चले गए। बैठक में मौजूद सांसद और अन्य जनप्रतिनिधि उन्हें रोकने की कोशिश करते रहे, लेकिन दोनों विधायक अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बाहर निकल गए।

बैठक के बाद आरिफ मसूद ने कहा कि जब भोपाल के लिए नया मास्टर प्लान ही नहीं है, तो शहर के विकास की कल्पना करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ शहर के विकास की बात कर रहे थे, लेकिन बीच में आकर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह उचित नहीं है।

कई बड़े अधिकारी भी रहे मौजूद

‘दिशा’ समिति की इस बैठक में सांसद आलोक शर्मा के अलावा बीजेपी विधायक भगवानदास सबनानी, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन और महापौर मालती राय समेत जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। विकास कार्यों की समीक्षा के लिए बुलाई गई यह बैठक राजनीतिक विवाद की वजह से चर्चा का विषय बन गई।