सुबह दफ्तर जाते समय एक कप कॉफी, दिनभर काम के बीच च्विंगम चबाना और शाम को व्यायाम—आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ये सब बिल्कुल सामान्य आदतें लगती हैं। लेकिन अब विशेषज्ञ इन छोटी-छोटी आदतों को लेकर एक बड़ी चेतावनी दे रहे हैं। उनका कहना है कि ये आदतें अनजाने में हमारे शरीर में ऐसे तत्व पहुंचा रही हैं, जो भविष्य में माता-पिता बनने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।

इस चिंता के केंद्र में है माइक्रोप्लास्टिक्स। ये बेहद छोटे प्लास्टिक कण होते हैं, जो हमारी रोजमर्रा की चीजों से निकलकर शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, च्विंगम भी इन कणों का एक बड़ा स्रोत बन सकता है।
प्रजनन स्वास्थ्य विशेषज्ञ फीबी हॉवेल्स बताती हैं कि एक च्विंगम चबाने के दौरान सैकड़ों सूक्ष्म प्लास्टिक कण शरीर में जा सकते हैं। खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश कण च्विंगम चबाने के शुरुआती कुछ मिनटों में ही बाहर निकलते हैं। ये कण धीरे-धीरे शरीर में जमा होते रहते हैं और हार्मोन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं।
मामला सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन सूक्ष्म प्लास्टिक कणों में मौजूद रसायन—जैसे बीपीए, फ्थेलेट्स और पीएफएएस—शरीर के हार्मोन संतुलन को बिगाड़ सकते हैं। पुरुषों में इससे शुक्राणु संख्या, गुणवत्ता और गति पर असर पड़ सकता है, जबकि महिलाओं में अंडोत्सर्जन और मासिक चक्र प्रभावित हो सकता है।
हालिया शोध भी इस चिंता को मजबूत करते हैं। 2025 में यूरोपीय मानव प्रजनन एवं भ्रूण विज्ञान सोसायटी में प्रस्तुत एक अध्ययन में पाया गया कि प्रजनन उपचार करा रही 69 प्रतिशत महिलाओं और 55 प्रतिशत पुरुषों के नमूनों में सूक्ष्म प्लास्टिक कण मौजूद थे। वहीं, न्यू मेक्सिको विश्वविद्यालय की 2024 की एक शोध में मानव वृषण ऊतकों में भी इन कणों की मौजूदगी सामने आई।
चौंकाने वाली बात यह है कि यह खतरा सिर्फ च्विंगम तक सीमित नहीं है। चाय के थैले, बाहर से लाए गए कॉफी कप, प्लास्टिक के डिब्बे और कृत्रिम कपड़े—ये सभी सूक्ष्म प्लास्टिक कणों के स्रोत हैं। खासकर जब ये चीजें गर्म होती हैं, तब इनमें से ज्यादा कण निकलते हैं और सीधे शरीर में पहुंच जाते हैं।
डॉक्टर मानते हैं कि प्लास्टिक को पूरी तरह जीवन से हटाना संभव नहीं है, लेकिन इसके प्रभाव को कम जरूर किया जा सकता है। छोटे-छोटे बदलाव—जैसे प्लास्टिक की जगह कांच या मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल, प्राकृतिक कपड़े पहनना और च्विंगम की जगह अन्य विकल्प चुनना—इस जोखिम को कम कर सकते हैं।
आज के समय में प्रजनन क्षमता सिर्फ उम्र या खानपान पर निर्भर नहीं रह गई है, बल्कि हमारे आसपास का वातावरण भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है। ऐसे में अगर भविष्य में माता-पिता बनने की योजना है, तो इन सामान्य दिखने वाली आदतों पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। क्योंकि कई बार खतरा वहीं छिपा होता है, जहां हम सबसे कम उम्मीद करते हैं।
