सूरज की तपिश दिन-ब-दिन और खतरनाक होती जा रही है। उत्तर प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत में गर्मी अपने चरम पर है और कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को पार कर चुका है। सुबह के समय से ही तेज धूप और गर्म हवाओं का असर महसूस होने लगता है, जबकि दोपहर होते-होते हालात और भी मुश्किल हो जाते हैं। बढ़ती गर्मी का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। अस्पतालों और क्लीनिकों में सिर दर्द, चक्कर आना, थकान, कमजोरी और डिहाइड्रेशन की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर में पानी की कमी को मामूली समस्या समझना बड़ी भूल साबित हो सकती है, क्योंकि यही कमी आगे चलकर हीट एक्सॉशन, हीट स्ट्रोक और अन्य गंभीर स्वास्थ्य परेशानियों का कारण बन सकती है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि इस मौसम में पर्याप्त पानी पीना, धूप से बचना और शरीर को हाइड्रेट रखना किसी दवा से कम नहीं है।
डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेतों को पहचानना है जरूरी
विशेषज्ञ बताते हैं कि शरीर में पानी की कमी होने पर सबसे पहले सिर दर्द, चक्कर आना, मुंह सूखना, अत्यधिक थकान और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई लोग इन्हें सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह शरीर का चेतावनी संकेत होता है। शरीर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है और यही पानी शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने, पोषक तत्वों को पहुंचाने तथा अंगों के सुचारु संचालन में मदद करता है। जब शरीर जरूरत के मुताबिक पानी नहीं पाता, तो कई शारीरिक प्रक्रियाएं प्रभावित होने लगती हैं।
सिर्फ पानी नहीं, इलेक्ट्रोलाइट्स की भी होती है जरूरत
गर्मी में लगातार पसीना निकलने के कारण शरीर से सोडियम, पोटैशियम और अन्य जरूरी मिनरल्स भी बाहर निकल जाते हैं। इसलिए केवल पानी पीना ही पर्याप्त नहीं होता। विशेषज्ञ नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी, ओआरएस और मौसमी फलों के सेवन की सलाह देते हैं। तरबूज, खरबूजा, खीरा और संतरा जैसे फलों में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर को प्राकृतिक रूप से हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। वहीं कैफीन और अधिक शुगर वाले पेय पदार्थों का ज्यादा सेवन शरीर में पानी की कमी को बढ़ा सकता है।
गर्मी से बचाव के लिए जीवनशैली में करें छोटे बदलाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनना, छाता या टोपी का इस्तेमाल करना और दिनभर नियमित अंतराल पर पानी पीना बेहद जरूरी है। कई लोग तब पानी पीते हैं जब उन्हें प्यास लगती है, जबकि प्यास लगना इस बात का संकेत है कि शरीर में पानी की कमी शुरू हो चुकी है। यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, उल्टी, भ्रम की स्थिति, बेहोशी या सांस लेने में परेशानी महसूस हो, तो इसे हीट स्ट्रोक का संकेत मानते हुए तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। गर्मी के इस मौसम में थोड़ी सी सावधानी गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से बचा सकती है।
