
भीषण गर्मी के दौरान कई बार एयर कंडीशनर (AC) लगातार चलाने के बाद भी कमरा अपेक्षित रूप से ठंडा नहीं हो पाता। आमतौर पर लोग इसका कारण AC की क्षमता या अत्यधिक गर्म मौसम को मानते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसकी एक बड़ी वजह घर की छत भी हो सकती है। दिनभर तेज धूप पड़ने से छत गर्म हो जाती है और वही गर्मी धीरे-धीरे कमरे के भीतर पहुंचती रहती है। ऐसे में केवल AC चलाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती।
छत की गर्मी बढ़ा देती है कमरे का तापमान
गर्मियों के मौसम में कंक्रीट और सीमेंट से बनी छतें पूरे दिन सूर्य की गर्मी को अपने भीतर सोखती रहती हैं। बाद में यही गर्मी कमरे के अंदर फैलती है, जिससे घर का तापमान लंबे समय तक अधिक बना रहता है। इसी वजह से एयर कंडीशनर को भी कमरे को ठंडा करने में ज्यादा समय और ऊर्जा लगानी पड़ती है, जिसका सीधा असर बिजली के बिल पर पड़ता है।
2019 की रिसर्च में सामने आया नया समाधान
साल 2019 में इटली के शोधकर्ताओं स्टेफानो फैंटुची और वेलेंटीना सेरा ने इस समस्या पर एक अध्ययन किया। यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल Energy and Buildings में प्रकाशित हुई थी। अध्ययन में यह जांचा गया कि यदि घर की छत के नीचे 'लो एमिसिविटी' (Low Emissivity) तकनीक पर आधारित रिफ्लेक्टिव एल्युमीनियम फॉइल की पतली परत लगाई जाए, तो क्या यह गर्मी को कम करने में मदद कर सकती है।
शोध में पाया गया कि यह तकनीक छत के जरिए कमरे में आने वाली गर्मी को 10 प्रतिशत से लेकर 53 प्रतिशत तक कम कर सकती है। हालांकि, इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि सामग्री को किस प्रकार और किन परिस्थितियों में लगाया गया है।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
रिसर्च में इस्तेमाल की गई सामग्री सामान्य रसोई में उपयोग होने वाली एल्युमीनियम फॉइल नहीं थी। यह एक विशेष प्रकार की रिफ्लेक्टिव इंसुलेशन सामग्री थी, जो 'लो एमिसिविटी' तकनीक पर आधारित होती है। इसका उद्देश्य गर्मी को सोखना नहीं, बल्कि उसे वापस परावर्तित (रिफ्लेक्ट) करना होता है।
सामान्य कंक्रीट या सीमेंट की छतें सूर्य की गर्मी को अपने भीतर संग्रहित कर धीरे-धीरे कमरे की ओर छोड़ती हैं। इसके विपरीत, यह चमकदार रिफ्लेक्टिव परत गर्मी के बड़े हिस्से को वापस बाहर की ओर भेज देती है, जिससे छत कम गर्म होती है और कमरे का तापमान नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
अमेरिकी ऊर्जा विभाग भी बता चुका है प्रभावी तकनीक
अमेरिका के ऊर्जा विभाग (U.S. Department of Energy) के अनुसार इस प्रकार की तकनीक को Radiant Barrier यानी गर्मी रोकने वाली परत कहा जाता है। यह तकनीक तब सबसे बेहतर परिणाम देती है, जब इसकी चमकदार सतह के सामने थोड़ी खुली हवा या खाली जगह हो। यदि इसे किसी सतह पर बिना गैप के सीधे चिपका दिया जाए, तो इसकी प्रभावशीलता कम हो सकती है।
इटली में किया गया था वास्तविक परीक्षण
शोधकर्ताओं ने इटली के ट्यूरिन शहर में स्थित एक भवन की छत के नीचे बने कमरे में इस तकनीक का परीक्षण किया। इसके लिए छत के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न प्रकार की रिफ्लेक्टिव सामग्री, जैसे कम-एमिसिविटी वाली एल्युमीनियम फॉइल और रिफ्लेक्टिव पेंट का उपयोग किया गया।
इसके बाद वास्तविक तापमान और गर्मी से जुड़े आंकड़ों के आधार पर कंप्यूटर मॉडल तैयार किया गया। इस अध्ययन का शीर्षक "Investigating the performance of reflective insulation and low emissivity paints for the energy retrofit of roof attics" था। परीक्षण के नतीजों ने यह संकेत दिया कि यह तकनीक वास्तविक परिस्थितियों में भी प्रभावी साबित हो सकती है।
हर जगह एक जैसा नहीं मिलता फायदा
शोध में यह भी स्पष्ट किया गया कि इस तकनीक का परिणाम सभी स्थानों पर समान नहीं होता। इसका असर मौसम, छत की बनावट, छत के रंग और सामग्री को लगाने के तरीके पर निर्भर करता है। गर्म और धूप वाले क्षेत्रों में इसका प्रभाव अधिक देखा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार गहरे रंग की छतें हल्के रंग की छतों की तुलना में अधिक गर्मी सोखती हैं। इसलिए ऐसी छतों पर रिफ्लेक्टिव बैरियर का लाभ अपेक्षाकृत अधिक मिल सकता है। वहीं यदि सामग्री को गलत दिशा में लगाया जाए या आवश्यक एयर गैप न छोड़ा जाए, तो इसकी कार्यक्षमता कम हो सकती है।
