केदारनाथ जहाँ लोग सिर्फ दर्शन ही नहीं, बल्कि श्रद्धा, उम्मीद और आस्था लेकर पहुंचते हैं। हिमालय की चोटियों के बीच बसे इस प्राचीन तीर्थधाम में हर भक्त एक ही विश्वास के साथ आता है कि भगवान शिव के दरबार में सब बराबर हैं।लेकिन इसी पवित्र स्थान पर एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने न सिर्फ भक्तों को चौंका दिया, बल्कि तीर्थपुरोहितों को भी आक्रोशित कर दिया।जब आम लोग घंटों कतार में खड़े थे और किसी विशेष अतिथि के लिए रास्ता साफ होता दिखा सवाल अचानक गूंज उठा क्या केदारनाथ में VIP संस्कृति वापस आ गई है?

और बस, इसी सवाल ने मंदिर परिसर का माहौल बदल दिया नारे लगे, विरोध तेज हुआ और प्रशासन के दावों पर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए।


किस वजह से भड़का विवाद?

उद्योगपति गौतम अडानी अपनी पत्नी के साथ केदारनाथ पहुंचे और जलाभिषेक किया। इसके बाद तीर्थपुरोहितों को लगा कि VIP एंट्री जारी है। इसी को लेकर उनका गुस्सा फूट पड़ा और विरोध खुलकर सामने आ गया।


तीर्थपुरोहितों का जोरदार विरोध

मंदिर परिसर में तीर्थपुरोहित एकजुट होकर बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के खिलाफ नारेबाज़ी करने लगे।उनकी मुख्य मांगें थीं।VIP गेट तुरंत बंद किया जाए आम श्रद्धालुओं को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है

भगवान के दरबार में भेदभाव नहीं होना चाहिए तीर्थपुरोहितों ने कहा कि VIP प्रवेश से आस्था की समानता की भावना आहत होती है।


सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विरोध का वीडियो

मंदिर परिसर में हुई नारेबाज़ी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।कई श्रद्धालुओं ने भी सवाल उठाए यदि VIP दर्शन बंद हैं, तो फिर VIP एंट्री कैसे हुई?सरकार के दावे और ज़मीनी स्थिति में अंतर क्यों?


सरकार के दावे पर उठे सवाल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई अधिकारी पहले ही कह चुके थे कि इस बार किसी भी प्रकार का VIP प्रवेश नहीं दिया जाएगा।लेकिन घटनास्थल से सामने आई तस्वीरें और वीडियो इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।


भाजपा की सफाई

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि कोई VIP दर्शन नहीं हो रहा है।सब भक्तों को समान रूप से दर्शन दिए जा रहे हैं।कुछ लोग मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।


कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने जवाब देते हुए कहा यदि BKTC अध्यक्ष के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है, तो उसे यात्रा विरोध कैसे कहा जा सकता है?यह मामला राजनीति नहीं, बल्कि गलत व्यवस्था का है।

कांग्रेस ने कहा कि हर विरोध को राजनीतिक एजेंडा बताना उचित नहीं है।VIP दर्शन पर विवाद हर वर्ष सामने आता रहा है, लेकिन इस बार तीर्थपुरोहितों का खुला विरोध, वायरल वीडियो और राजनीतिक आरोप–प्रत्यारोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है।