बिहार की राजधानी पटना में एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। दारोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा में कथित गड़बड़ी और धांधली के आरोपों को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे हैं। सैकड़ों छात्र-छात्राएं मेन्स परीक्षा रद्द करो के नारे लगाते हुए सड़कों पर उतर आए हैं और जेपी गोलंबर की तरफ आक्रोश मार्च निकाल रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि बिहार पुलिस एसआई भर्ती की मुख्य परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया था, जिसके कारण परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पटना कॉलेज परिसर से शुरू हुए इस विरोध मार्च में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल हुए। छात्रों का कहना है कि 27 मई को 1799 पदों के लिए आयोजित दारोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा में पेपर लीक की घटना हुई थी। उनका दावा है कि इस संबंध में उन्होंने आर्थिक अपराध इकाई (EOU), मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी आवेदन देकर जांच और कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, अब तक परीक्षा रद्द करने या मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे अभ्यर्थियों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

जेपी गोलंबर पर पुलिस की कड़ी तैयारी

अभ्यर्थियों के इस बड़े प्रदर्शन और जेपी गोलंबर तक मार्च की सूचना मिलते ही पटना पुलिस और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए गांधी मैदान के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। विशेष रूप से जेपी गोलंबर पर मजबूत बैरिकेडिंग लगाई गई है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। प्रशासन ने किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त इंतजाम भी किए हैं। प्रदर्शनकारियों की संख्या और उनके बढ़ते आक्रोश को देखते हुए वज्र वाहन के साथ-साथ वाटर कैनन भी मौके पर मंगवाया गया है। पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।

परीक्षा रद्द कराने की मांग पर अड़े अभ्यर्थी

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं का कहना है कि उनका विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग इस मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच नहीं कराते। छात्रों की मांग है कि दारोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और पूरी प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा की जाए।

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि केवल प्रश्नपत्र लीक का मामला ही नहीं, बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया में भी कई तरह की विसंगतियां सामने आई हैं। उनका कहना है कि इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहे और योग्य उम्मीदवारों के साथ न्याय हो सके।

गौरतलब है कि बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) की ओर से आयोजित इस मुख्य परीक्षा में राज्य के पांच विभिन्न केंद्रों पर करीब 36 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। अब परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे हैं। वहीं, बढ़ते विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहे हैं और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।