दक्षिण कोरिया में बढ़ती बुजुर्ग आबादी और अकेलेपन की समस्या से निपटने के लिए तकनीक का अनोखा इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां 'ह्योडोल' नाम की एक AI गुड़िया हजारों बुजुर्गों के लिए साथी बनकर उभरी है। यह सिर्फ बातचीत ही नहीं करती, बल्कि उनके स्वास्थ्य, खान-पान और दवाओं का भी ध्यान रखती है।


अकेलेपन से जूझ रहे बुजुर्गों को मिला नया साथी

78 वर्षीय बैंग चुन-जा कई वर्षों से अकेले रह रही थीं और अक्सर तनाव तथा अकेलेपन का सामना करती थीं। लेकिन अब उनके घर लौटने पर उनका स्वागत कोई इंसान नहीं, बल्कि 'ह्योडोल' नाम की एक AI गुड़िया करती है। स्थानीय प्रशासन की ओर से दी गई यह स्मार्ट डॉल उनसे बातें करती है, गाने सुनाती है और समय पर दवा व भोजन लेने की याद भी दिलाती है।


सिर्फ खिलौना नहीं, परिवार का हिस्सा बन रही AI डॉल

दक्षिण कोरिया में अब तक 14,500 से अधिक ह्योडोल AI गुड़ियां बुजुर्गों को दी जा चुकी हैं। कई बुजुर्ग इन्हें महज एक मशीन नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्य की तरह मानने लगे हैं। बढ़ती उम्र में जब परिवार के लोग साथ नहीं होते, तब यह AI डॉल भावनात्मक सहारा देने का काम करती है।


स्वास्थ्य और दिनचर्या पर भी रखती है नजर

ह्योडोल डॉल को खास तौर पर बुजुर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह उनकी नींद, खान-पान, दर्द के स्तर और मानसिक स्थिति से जुड़ी जानकारियों को रिकॉर्ड करती है। साथ ही यह नियमित रूप से उन्हें जरूरी कामों की याद दिलाती रहती है ताकि उनकी दिनचर्या प्रभावित न हो।


खतरे का संकेत मिलते ही पहुंचाती है सूचना

इस AI डॉल की सबसे खास बात यह है कि अगर इसे किसी असामान्य स्थिति का अंदेशा होता है, तो यह तुरंत केयरटेकर्स या संबंधित लोगों को सूचना भेज देती है। इससे बुजुर्गों की सुरक्षा और देखभाल पहले से बेहतर हो पाती है।


तन्हाई दूर करने के लिए बनाया गया खास सिस्टम

ह्योडोल को तैयार करने वाली टीम का कहना है कि इसे बुजुर्गों के मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह यूजर्स से हाथ पकड़ने को कहती है, उनसे प्यार भरे अंदाज में बात करती है और उन्हें भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ महसूस कराने की कोशिश करती है। इसका मकसद सिर्फ तकनीकी मदद देना नहीं, बल्कि बुजुर्गों को अकेलेपन से बाहर निकालना भी है।


तकनीक और इंसानियत का अनोखा मेल

दक्षिण कोरिया में AI आधारित यह पहल दिखाती है कि आधुनिक तकनीक सिर्फ काम को आसान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन में भावनात्मक सहारा भी बन सकती है। ह्योडोल जैसी AI गुड़ियां अब उन बुजुर्गों के लिए उम्मीद की नई किरण बन रही हैं, जो लंबे समय से अकेलेपन का सामना कर रहे हैं।