
ईरान की कथित ‘लेडी डॉन’ शमीम माफी की गिरफ्तारी ने इंटरनेशनल हथियार तस्करी की दुनिया में हलचल मचा दी है। Los Angeles International Airport पर हुई इस गिरफ्तारी ने एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जो लंबे समय से बेहद चुपचाप काम कर रहा था।
44 साल की शमीम माफी को शनिवार रात उस वक्त पकड़ा गया, जब वह फ्लाइट पकड़ने वाली थी। उस पर आरोप है कि वह ईरान से जुड़े नेटवर्क के लिए काम करते हुए हथियारों की दलाली कर रही थी। जांच एजेंसियां उसे सिर्फ एक ब्रोकर नहीं, बल्कि पूरे ऑपरेशन की अहम कड़ी मान रही हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, माफी कैलिफोर्निया के वुडलैंड हिल्स में रहती थी और 2016 से अमेरिका की स्थायी निवासी है। लेकिन उसकी असली पहचान इससे कहीं अलग थी। आरोप है कि उसने ड्रोन, बम, बम फ्यूज और भारी मात्रा में गोला-बारूद जैसे खतरनाक हथियारों की डील करवाई—और ये सब सूडान जैसे संघर्षग्रस्त इलाके में भेजे जा रहे थे।
बताया जा रहा है कि यह पूरा नेटवर्क बहुत ही प्लानिंग के साथ चलाया जा रहा था। माफी ने ओमान में रजिस्टर्ड ‘Atlas International Business’ नाम की कंपनी के जरिए इस धंधे को मैनेज किया। इसी कंपनी के जरिए करोड़ों डॉलर के ट्रांजैक्शन किए गए। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में ही इस कंपनी को 70 लाख डॉलर से ज्यादा का भुगतान मिला।
इस केस की सबसे दिलचस्प बात यह है कि माफी ने अपने नेटवर्क को छुपाने के लिए कई देशों का इस्तेमाल किया। तुर्की और यूएई जैसे देशों के जरिए डील्स को अंजाम दिया जाता था। नवंबर 2023 में उसे तुर्की में बड़े बिजनेस लीडर्स के साथ देखा गया, जहां उसे एक इंटरनेशनल बिजनेस वुमन के तौर पर पेश किया गया। यही उसकी सबसे बड़ी चाल थी—ग्लैमर के पीछे असली खेल छुपाना।
जांच में सामने आया कि वह बार-बार इस्तांबुल जाती थी, जहां से शिपमेंट्स को वैध दिखाने की कोशिश होती थी। अलग-अलग देशों के कानूनों का फायदा उठाकर वह लंबे समय तक एजेंसियों को चकमा देती रही, लेकिन आखिरकार उसका नेटवर्क बेनकाब हो गया।
इस पूरे मामले में ‘मोहाजेर-6’ ड्रोन की डील सबसे अहम मानी जा रही है। यह ड्रोन निगरानी और हमले दोनों के लिए इस्तेमाल होता है। आरोप है कि माफी ने सूडान के रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर इसकी सप्लाई करवाई। इसके अलावा हजारों बम फ्यूज और गोला-बारूद भी भेजा गया—वो भी ऐसे समय में, जब सूडान गृहयुद्ध से जूझ रहा था।
जांच एजेंसियों का कहना है कि माफी सीधे तेहरान के खुफिया अधिकारियों के संपर्क में थी। फोन रिकॉर्ड्स से यह भी पता चला कि वह उनके निर्देशों पर काम कर रही थी। इस दौरान उसने अमेरिकी कानूनों का उल्लंघन किया, जो दुश्मन देशों के साथ आर्थिक लेनदेन पर रोक लगाते हैं।
उसकी कहानी में एक बड़ा मोड़ 2020 में आया, जब ईरान सरकार ने उसकी पैतृक संपत्ति जब्त कर ली। इसके बाद उसे ऑफर मिला कि अगर वह अमेरिका में रहकर उनके लिए काम करे, तो संपत्ति वापस मिल सकती है। यहीं से उसने इस खतरनाक रास्ते पर कदम रखा।
गिरफ्तारी के समय वह इस्तांबुल जाने वाली फ्लाइट लेने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही उसे हिरासत में ले लिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसके पास से कैश भी बरामद हुआ। हालांकि, पूछताछ में उसने खुद को निर्दोष बताया है।
अगर कोर्ट में आरोप साबित होते हैं, तो शमीम माफी को 20 साल तक की सजा हो सकती है। अमेरिकी एजेंसियां इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मामला मान रही हैं।
पूरी कहानी यही दिखाती है कि आज के दौर में हथियारों की तस्करी सिर्फ बंदूक और बारूद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बिजनेस, डिप्लोमेसी और टेक्नोलॉजी का भी बड़ा रोल है। शमीम माफी ने इन्हीं सबका इस्तेमाल कर एक ऐसा नेटवर्क खड़ा किया, जो दिखने में ग्लैमरस था, लेकिन असल में बेहद खतरनाक।
