छत्रपति संभाजीनगर। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा है कि वह खुद रांची जाकर आंदोलन में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि वह नहीं चाहते कि आंदोलन का केंद्र उनसे हटकर उनका चेहरा बन जाए। दीपके के मुताबिक, झारखंड में चल रहे आंदोलन का नेतृत्व देवेंद्र नाथ महतो कर रहे हैं और उनकी प्राथमिकता आंदोलन के नेता को मजबूत करना है, न कि खुद को उसके चेहरे के रूप में सामने लाना।
पहले बीमारी बताई, अब खुद दीपके ने स्पष्ट की वजह
अभिजीत दीपके ने इससे पहले झारखंड नहीं पहुंच पाने की वजह टाइफाइड होना बताई थी। हालांकि, अब उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी टीम रांची पहुंच चुकी है और आंदोलनकारियों के साथ लगातार काम कर रही है, लेकिन वह स्वयं वहां जाने की योजना नहीं बना रहे हैं।
छत्रपति संभाजीनगर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में दीपके ने झारखंड के छात्रों के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने रांची में विधानसभा मार्च के दौरान छात्रों पर हुए बल प्रयोग की आलोचना भी की।
‘आंदोलन का चेहरा देवेंद्र महतो ही रहें’
झारखंड जाने के सवाल पर अभिजीत दीपके ने कहा कि उनकी टीम पहले ही वहां पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के नेता देवेंद्र नाथ महतो हैं, जो नौ दिनों से अनशन पर हैं। उनके अनुसार, उनकी टीम आंदोलन को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है।
दीपके ने कहा कि फिलहाल उनका उद्देश्य देवेंद्र नाथ महतो से आंदोलन का ध्यान हटाना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि आंदोलन का फोकस उसी नेतृत्व पर बना रहे, जो इस समय छात्रों की लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है।
‘वहां जाकर अपना चेहरा चमकाना हमारा काम नहीं’
अभिजीत दीपके ने कहा कि उनकी टीम आंदोलनकारियों के संपर्क में है और वह स्वयं भी झारखंड के छात्रों से लगातार बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब देवेंद्र नाथ महतो विधानसभा की ओर जा रहे थे, तब उनकी टीम भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही थी।
दीपके ने कहा कि उनका काम आंदोलन के नेतृत्व को मजबूत करना है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वहां जाकर अपना चेहरा चमकाना उनका उद्देश्य नहीं है। उनके अनुसार, महत्वपूर्ण यह है कि वह इस लड़ाई में छात्रों और आंदोलनकारियों का साथ दे रहे हैं या नहीं और उनकी ओर से पूरा समर्थन दिया जा रहा है।
रांची में छात्रों पर बल प्रयोग की निंदा
अभिजीत दीपके ने रांची में विधानसभा मार्च के दौरान छात्रों पर हुए बल प्रयोग की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि झारखंड में जो कुछ हुआ, वह बहुत खराब था। उन्होंने इसकी तुलना 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम से की।
दीपके के मुताबिक, झारखंड में छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठियां चलाई गईं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजनीतिक दल प्रदर्शन करते हैं, तब भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल उसी तरह क्यों नहीं किया जाता और छात्रों के प्रदर्शनों में ही इस तरह की कार्रवाई क्यों देखने को मिलती है।
देवेंद्र नाथ महतो की स्थिति को लेकर जताई चिंता
अभिजीत दीपके ने बताया कि उनकी देवेंद्र नाथ महतो से बातचीत हुई है। उनके अनुसार, महतो ने उन्हें बताया कि पुलिसकर्मियों ने उन पर लाठियां चलाईं और उनके साथ मारपीट की। दीपके ने दावा किया कि महतो अस्पताल में हैं और उनकी हालत चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि सभी सरकारों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने से आखिर क्या हासिल होता है। दीपके के मुताबिक, छात्र अपने अधिकारों और भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उनके खिलाफ लाठीचार्ज या किसी तरह की क्रूरता नहीं होनी चाहिए।
छात्र आंदोलन से दूरी नहीं, अलग तरीके से समर्थन
अभिजीत दीपके के बयान से यह स्पष्ट है कि झारखंड आंदोलन से उनकी दूरी समर्थन की कमी की वजह से नहीं है। वह अपनी टीम के जरिए आंदोलनकारियों के साथ जुड़े रहने की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि टीम रांची में मौजूद है और आंदोलन को मजबूत करने के लिए काम कर रही है।
उनकी रणनीति का केंद्र यह है कि आंदोलन का नेतृत्व देवेंद्र नाथ महतो के हाथ में ही रहे और बाहरी राजनीतिक या संगठनात्मक चेहरों की वजह से छात्रों के मुद्दे की प्रमुखता कम न हो।
जंतर-मंतर आंदोलन के बाद झारखंड पर नजर
अभिजीत दीपके इससे पहले केंद्र सरकार के खिलाफ जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक चले आंदोलन के कारण भी चर्चा में रहे हैं। अब झारखंड के छात्र आंदोलन को लेकर उनके समर्थन ने एक बार फिर उन्हें चर्चा में ला दिया है।
हालांकि, उन्होंने स्वयं रांची जाने से इनकार किया है। उनका कहना है कि उनकी टीम वहां मौजूद है और वह छात्रों तथा आंदोलन के नेतृत्व के संपर्क में हैं। इस तरह उन्होंने व्यक्तिगत रूप से आंदोलन में शामिल होने के बजाय संगठनात्मक स्तर पर समर्थन जारी रखने का संकेत दिया है।
दीपके ने उठाया छात्रों के अधिकारों का मुद्दा
अभिजीत दीपके ने अपने बयान में छात्रों के अधिकार और भविष्य को प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि सरकारों को छात्रों के साथ किसी भी तरह की कठोरता बरतने से पहले यह सोचना चाहिए कि वे आखिर किस उद्देश्य से प्रदर्शन कर रहे हैं।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब झारखंड में छात्र आंदोलन और विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चा चल रही है। दीपके ने छात्रों के खिलाफ लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए शांतिपूर्ण तरीके से उनकी बात सुने जाने की वकालत की।
