ere | Source: rerनई दिल्ली। मणिपुर में जारी तनाव और हालिया हिंसक घटनाओं के बीच केंद्र सरकार ने राज्य के बड़े हिस्से को एक बार फिर ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित करने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय की ओर से 25 सितंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से मणिपुर में छह महीने के लिए सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 यानी AFSPA लागू रहेगा। हालांकि, राज्य के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले इलाकों को इस आदेश से बाहर रखा गया है।

13 थाना क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राज्य में लागू होगा आदेश

गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, मणिपुर में 13 पुलिस थानों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों को छोड़कर शेष राज्य को AFSPA के तहत ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया गया है। यह व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से छह महीने तक प्रभावी रहेगी। हालांकि, केंद्र सरकार यदि इससे पहले आदेश वापस लेती है तो इसकी अवधि उसी के अनुसार समाप्त हो जाएगी।

मणिपुर में हिंसा की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार इससे पहले भी AFSPA के प्रावधानों को लागू करती रही है। वर्ष 2023 में राज्य को AFSPA के तहत ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया गया था और इसके बाद इस व्यवस्था को अलग-अलग मौकों पर आगे बढ़ाया गया।

AFSPA लागू होने पर सशस्त्र बलों को मिलती हैं विशेष शक्तियां

AFSPA के तहत किसी क्षेत्र को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किए जाने के बाद वहां तैनात सशस्त्र बलों को कानून में निर्धारित विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं। इनमें कुछ परिस्थितियों में बिना वारंट गिरफ्तारी, तलाशी और बल प्रयोग की शक्तियां शामिल हैं। कानून के प्रावधानों के तहत निर्धारित परिस्थितियों में सशस्त्र बलों को गोली चलाने का अधिकार भी प्राप्त होता है।

सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 की धारा 3 के तहत राज्यपाल, प्रशासक या केंद्र सरकार किसी राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश के पूरे या किसी हिस्से को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित कर सकती है। इसके लिए संबंधित क्षेत्र में ऐसी स्थिति होना आवश्यक माना जाता है, जिसे कानून के तहत ‘अशांत या खतरनाक’ माना जाए और नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए सशस्त्र बलों की आवश्यकता हो।

हालिया हिंसा के बाद केंद्र का फैसला

मणिपुर में AFSPA के विस्तार का निर्णय ऐसे समय लिया गया है, जब राज्य के कुछ हिस्सों में हिंसा की नई घटनाएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कामजोंग जिले में शुक्रवार को संदिग्ध आतंकवादियों द्वारा चार लोगों की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना सामने आई।

बताया गया है कि म्यांमार सीमा के पास स्थित पिलोंग गांव के एक सुनसान स्थान पर चार लोगों के शव मिले। शवों पर गोली लगने के निशान बताए गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पड़ोसी देश म्यांमार की ओर से आए संदिग्ध आतंकवादियों ने गुरुवार को पांच ग्रामीणों के एक समूह को निशाना बनाकर हमला किया था।

हमले में एक ग्रामीण के बच निकलने का दावा

स्थानीय लोगों के अनुसार, पांच ग्रामीणों के समूह में शामिल एक व्यक्ति कथित हमले के दौरान बच निकलने में कामयाब रहा। इसके बाद उसने स्थानीय अधिकारियों को घटना की जानकारी दी। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।

हालांकि, इन घटनाओं से संबंधित आरोपों और परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में उपलब्ध सामग्री के आधार पर नहीं की गई है। केंद्र सरकार का AFSPA संबंधी फैसला राज्य में सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने घटना की निंदा की

मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने चार लोगों की हत्या की घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा, “इस तरह की हिंसा का हमारे समाज में कोई स्थान नहीं है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” मुख्यमंत्री ने घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना भी व्यक्त की।

छह महीने तक प्रभावी रहेगा नया आदेश

केंद्र सरकार का नया आदेश 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा और सामान्य स्थिति में छह महीने तक लागू रहेगा। इस दौरान 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के शेष हिस्से में AFSPA के प्रावधान लागू रहेंगे।

मणिपुर में पहले से चली आ रही सुरक्षा व्यवस्था और हालिया हिंसक घटनाओं के बीच केंद्र का यह निर्णय राज्य में सुरक्षा बलों की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण है। अब 1 अक्टूबर से नए आदेश के तहत राज्य के अधिकांश हिस्से में AFSPA की व्यवस्था जारी रहेगी, जबकि 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है।