ere | Source: ereनई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य तनाव को लेकर बड़ा दावा किया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने दोनों देशों के बीच संघर्ष को बढ़ने से रोकने में भूमिका निभाई और इसके चलते 3 करोड़ लोगों की जान बची। हालांकि, भारत पहले ही ट्रंप के इस दावे को खारिज कर चुका है और उसका कहना है कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम आपसी सहमति से हुआ था, इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी।

संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप ने सुनाया 8 संघर्ष खत्म कराने का दावा

मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 81वें महासभा सत्र को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में आठ युद्ध या संघर्षों को खत्म कराने में मदद करने का दावा किया। इसी क्रम में उन्होंने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव का भी उल्लेख किया।

ट्रंप ने कहा कि जिन देशों के बीच संघर्ष रोकने में उन्होंने मदद की, वहां के नेताओं ने उन्हें पत्र लिखकर धन्यवाद दिया। भारत और पाकिस्तान के संदर्भ में उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का उल्लेख किया।

ट्रंप ने कहा- शहबाज शरीफ ने मुझे धन्यवाद दिया

ट्रंप के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें धन्यवाद देते हुए कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप 3 करोड़ लोगों की जान बचाने के लिए जिम्मेदार हैं और संभव है कि इससे भी ज्यादा लोगों की जान बची हो।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने शहबाज शरीफ को शानदार व्यक्ति बताते हुए भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में अपनी भूमिका का दावा दोहराया। ट्रंप इससे पहले भी मई 2025 के संघर्ष के बाद हुए युद्धविराम को अपनी मध्यस्थता से जोड़ते रहे हैं।

पहलगाम हमले के बाद बढ़ा था भारत-पाकिस्तान तनाव

भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में सैन्य तनाव उस समय बढ़ा था, जब पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया था।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के बीच कई दिनों तक सैन्य तनाव बना रहा। इसी घटनाक्रम के संदर्भ में ट्रंप का कहना है कि उन्होंने दोनों देशों के बीच संघर्ष को आगे बढ़ने से रोकने में भूमिका निभाई थी।

भारत ने ट्रंप के दावे को किया है खारिज

भारत की ओर से डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता संबंधी दावे को लगातार खारिज किया गया है। भारत का कहना है कि युद्धविराम दोनों देशों के बीच आपसी सहमति से हुआ था और इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता शामिल नहीं थी।

यानी भारत और अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों में इस मुद्दे पर स्पष्ट अंतर है। ट्रंप इसे अपनी भूमिका से जोड़ते रहे हैं, जबकि भारत युद्धविराम को दोनों देशों के बीच हुई आपसी सहमति का परिणाम बताता है।

ट्रंप पहले भी परमाणु युद्ध का कर चुके हैं जिक्र

ट्रंप ने जुलाई में भी भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र करते हुए दावा किया था कि स्थिति परमाणु युद्ध तक पहुंच सकती थी। उन्होंने उस समय संघर्ष के दौरान 11 विमानों के मार गिराए जाने का दावा भी किया था और कहा था कि यदि लड़ाई आगे बढ़ती तो बड़ी संख्या में लोगों की जान जा सकती थी।

अप्रैल में भी ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान समेत आठ युद्ध या संघर्ष खत्म कराने में मदद करने का दावा किया था। उस समय उन्होंने कहा था कि इन प्रयासों के दौरान 3 करोड़ से 5 करोड़ लोगों की जान बचाई गई।

पाकिस्तान ने ट्रंप की भूमिका का समर्थन किया

पाकिस्तान की ओर से ट्रंप के दावे का समर्थन किया जाता रहा है। कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के साथ युद्धविराम में ट्रंप के हस्तक्षेप के लिए उनका आभार जताया था।

शहबाज शरीफ ने ट्रंप को शांति के लिए काम करने वाला व्यक्ति बताया था। उन्होंने कहा था कि 10 मई 2025 को हुआ युद्धविराम ट्रंप के समय पर किए गए हस्तक्षेप के कारण संभव हुआ।

एक ही घटनाक्रम पर भारत और पाकिस्तान के अलग-अलग दावे

भारत-पाकिस्तान के बीच मई 2025 के सैन्य तनाव और उसके बाद हुए युद्धविराम को लेकर दोनों देशों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। ट्रंप और पाकिस्तान की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति की भूमिका को रेखांकित किया जाता रहा है, जबकि भारत किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार करता है।

संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर इसी घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए इसे अपने दूसरे कार्यकाल में संघर्षों को रोकने के प्रयासों का हिस्सा बताया।