सोशल मीडिया पर 15 अगस्त के एक स्कूल कार्यक्रम का वीडियो वायरल होने के बाद गुजरात के भावनगर में विवाद खड़ा हो गया। वीडियो में कुछ छात्राएं बुर्का पहने नजर आ रही हैं। बताया गया कि छात्राओं ने एक नाटक में आतंकवादियों का किरदार निभाया था। वीडियो सामने आने के बाद इस प्रस्तुति को लेकर सवाल उठे और मामला शिक्षा विभाग तक पहुंच गया।
यह मामला भावनगर के कुंभारवाड़ा इलाके में स्थित नगर निगम के एक स्कूल से जुड़ा है। स्कूल में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित एक नाटक प्रस्तुत किया गया था। नाटक में पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर की थीम दिखाई गई थी।
वायरल वीडियो में कुछ छात्राएं सफेद कपड़ों में कश्मीर से जुड़ा कार्यक्रम करती दिखाई देती हैं। इसके बाद बुर्का पहनी छात्राएं मंच पर आती हैं और नाटक के एक हिस्से में आतंकियों का किरदार निभाती हैं। उनके हाथ में खिलौना हथियार भी दिखाई देते हैं। इसी दृश्य को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।
वीडियो सामने आने के बाद कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि नाटक में बुर्के को आतंकवाद से जोड़कर दिखाया गया है। इसको लेकर स्थानीय स्तर पर आपत्ति जताई गई और शिक्षा विभाग से कार्रवाई की मांग की गई।
मामला बढ़ने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने नगर निगम के शिक्षा विभाग से पूरे कार्यक्रम को लेकर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी। अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे फैसला लिया जाएगा।
स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र कुमार दवे ने सफाई देते हुए कहा कि नाटक का उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं था। उनके मुताबिक, छात्राओं को आतंकवादी किरदार के लिए काले कपड़े पहनने को कहा गया था। छात्राओं ने अपनी तरफ से बुर्के को पोशाक के तौर पर चुना।
स्कूल की ओर से यह भी कहा गया कि नाटक का मकसद पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर की घटना को बच्चों के सामने प्रस्तुत करना था। इसमें कुछ छात्राओं ने सैनिकों, कुछ ने पीड़ितों और कुछ ने आतंकवादियों की भूमिका निभाई थी।
बाद में इस मामले की जांच भी हुई। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा मामला अनजाने में हुआ था। रिपोर्ट में कहा गया कि स्कूल के प्रिंसिपल, शिक्षकों और छात्रों का किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने या सांप्रदायिक माहौल खराब करने का दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था। हालांकि, स्कूल को भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंट गई। कुछ लोगों ने स्कूल की प्रस्तुति पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने कहा कि इसे एक नाटक के रूप में देखा जाना चाहिए। इसी वजह से यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
इस मामले में एक बात साफ है कि वायरल वीडियो के आधार पर किसी पूरे धर्म या समुदाय के बारे में निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। स्कूल और शिक्षा विभाग की ओर से भी यह स्पष्ट किया गया कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं था।
फिलहाल यह मामला एक वायरल वीडियो से शुरू होकर शिक्षा विभाग की जांच तक पहुंचा और बाद में इसे अनजाने में हुई घटना बताया गया। इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि स्कूलों में संवेदनशील और धार्मिक विषयों पर कार्यक्रम करते समय भाषा, पोशाक और प्रस्तुति को लेकर कितनी सावधानी जरूरी है।
