rtr | Source: rttदसवीं कक्षा की एक पुरानी घटना याद करते हुए पेरेंटिंग और लाइफ कोच अंजनी मिश्रा ने माता-पिता को बच्चों की सुरक्षा को लेकर जरूरी सलाह दी है। उन्होंने बताया कि एक दिन स्कूल बस नहीं आने पर वह अपनी दोस्त के पिता के साथ घर जाने के लिए निकल गई थीं। उस समय उन्हें अंदाजा नहीं था कि आगे उनके साथ ऐसी घटना होने वाली है, जिसे वह वर्षों बाद भी नहीं भूल पाई हैं।

दोस्त के पिता ने घर छोड़ने की कही बात

अंजनी मिश्रा के मुताबिक, वह दसवीं कक्षा में पढ़ती थीं और स्कूल से अंतिम अंकपत्र तथा प्रमाणपत्र लेने गई थीं। उस दिन स्कूल बस उपलब्ध नहीं थी, इसलिए उन्होंने सामान्य यात्री बस से स्कूल जाने का फैसला किया था। स्कूल में उनकी मुलाकात एक दोस्त के पिता से हुई। उन्होंने पूछा कि वह घर कैसे जाएंगी। जब अंजनी ने बस से जाने की बात कही तो उन्होंने कहा कि वह भी उसी दिशा में जा रहे हैं और उन्हें घर छोड़ देंगे।

उस समय मोबाइल फोन आम नहीं थे, इसलिए अंजनी अपने माता-पिता को इसकी जानकारी नहीं दे सकीं। उन्होंने भरोसा करते हुए उनके साथ जाने के लिए हामी भर दी।

ere | Source: erreघर पहुंचाने के बजाय कार्यस्थल ले गए

अंजनी ने बताया कि घर छोड़ने के बजाय वह व्यक्ति उन्हें अपने कार्यस्थल पर ले गया। वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों को छुट्टी दे दी गई। इसके बाद उसने अंजनी से ऊपर चलकर जगह देखने के लिए कहा। अंजनी के अनुसार, ऊपर पहुंचने के बाद उसने उन्हें पकड़ने की कोशिश की।

स्थिति को भांपते हुए अंजनी ने खुद को बचाने के लिए पीछे से लात मारी और वहां से भाग निकलीं। इसके बाद उन्होंने बस पकड़ी और किसी तरह अपने घर पहुंचीं।

ere | Source: erreमां ने पूछा तो भी नहीं बता पाईं

घर पहुंचने पर अंजनी काफी घबराई हुई थीं और तेजी से सांस ले रही थीं। उनकी मां ने उन्हें इस हालत में देखकर कारण पूछा, लेकिन उस समय वह अपनी मां को भी पूरी घटना नहीं बता सकीं। उनका कहना है कि घटना को कई वर्ष बीत जाने के बावजूद उसकी याद आज भी उनके मन में बनी हुई है।

बच्चों की सुरक्षा में आंख मूंदकर भरोसा न करें

अपने अनुभव के आधार पर अंजनी मिश्रा ने माता-पिता से अपील की कि बच्चों को किसी के घर बिना निगरानी के खेलने या जाने की अनुमति देते समय सावधानी बरतें। उनका कहना है कि केवल परिचित होने के आधार पर किसी व्यक्ति पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की सुरक्षा का विषय लड़के और लड़कियों दोनों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है। माता-पिता को बच्चों के साथ ऐसा भरोसेमंद माहौल बनाना चाहिए, जिसमें वे किसी असहज या डरावनी घटना के बारे में बिना झिझक खुलकर बता सकें।