erere | Source: erereमौसम में बदलाव और विशेष रूप से मानसून के दौरान वायरल संक्रमणों के साथ-साथ टाइफाइड बुखार के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी देखी जाती है। टाइफाइड एक गंभीर जीवाणुजनित संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से दूषित पानी और संक्रमित भोजन के माध्यम से फैलता है। खराब स्वच्छता, दूषित जल स्रोत और असुरक्षित खानपान इस बीमारी के प्रसार के प्रमुख कारण माने जाते हैं। यदि समय पर इसकी पहचान और उपचार न किया जाए तो यह आंतों में गंभीर संक्रमण, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) और अन्य जटिल स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। हालांकि, कुछ आसान सावधानियां अपनाकर इस संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

मानसून में क्यों बढ़ जाता है टाइफाइड का खतरा?

बारिश के मौसम में जल स्रोतों के दूषित होने और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होने की वजह से बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं। ऐसे वातावरण में Salmonella Typhi नामक बैक्टीरिया के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जो टाइफाइड बुखार का प्रमुख कारण है। यही वजह है कि मानसून के दौरान इस बीमारी के मामले अधिक सामने आते हैं।

भारत सहित कई विकासशील देशों में टाइफाइड आज भी एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। यह संक्रमण मुख्य रूप से दूषित भोजन और असुरक्षित पेयजल के सेवन से फैलता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े क्या बताते हैं?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार वर्ष 2019 तक उपलब्ध अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक, हर वर्ष दुनिया भर में लगभग 90 लाख लोग टाइफाइड से संक्रमित होते हैं, जबकि करीब 1 लाख 10 हजार लोगों की इस बीमारी से मृत्यु हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता, साफ-सफाई और टीकाकरण के माध्यम से इस बीमारी के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

टाइफाइड कैसे फैलता है?

मायो क्लीनिक (Mayo Clinic) के अनुसार टाइफाइड मुख्य रूप से फीकल-ओरल मार्ग से फैलता है। जब किसी संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित पानी या भोजन किसी स्वस्थ व्यक्ति तक पहुंचता है, तब Salmonella Typhi बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर संक्रमण पैदा करता है।

संक्रमण फैलने के प्रमुख कारण

टाइफाइड संक्रमण कई कारणों से फैल सकता है। इनमें दूषित पानी पीना, सड़क किनारे अस्वच्छ भोजन का सेवन करना, बिना हाथ धोए भोजन बनाना या खाना, संक्रमित व्यक्ति द्वारा तैयार किया गया भोजन खाना तथा खराब सीवेज और स्वच्छता व्यवस्था प्रमुख कारण हैं।

किन लोगों को सबसे अधिक खतरा रहता है?

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार टाइफाइड किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है।

इनमें 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चे, खराब स्वच्छता वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोग, दूषित पानी का उपयोग करने वाले परिवार, बार-बार यात्रा करने वाले विशेषकर टाइफाइड प्रभावित देशों में जाने वाले लोग, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्ति, स्वास्थ्यकर्मी तथा संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहने वाले लोग शामिल हैं।

ये 7 आसान आदतें टाइफाइड से बचाने में कर सकती हैं मदद

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार कुछ दैनिक सावधानियां अपनाकर टाइफाइड संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

हाथों की नियमित सफाई करें

भोजन करने से पहले, खाना बनाने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और साफ पानी से हाथ धोना संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।

सिर्फ सुरक्षित पानी का ही सेवन करें

हमेशा उबला हुआ, फिल्टर किया हुआ या सीलबंद बोतल का पानी ही पीना चाहिए। यदि पानी की शुद्धता को लेकर संदेह हो तो उसे कम से कम एक मिनट तक उबालकर उपयोग करें।

भोजन अच्छी तरह पकाकर खाएं

उच्च तापमान पर अच्छी तरह पकाया गया भोजन टाइफाइड फैलाने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करने में मदद करता है। अधपका भोजन संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकता है।

फल और सब्जियों को अच्छी तरह साफ करें

कच्चे फल और सब्जियों को उपयोग से पहले स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। जहां संभव हो, ऐसे फल चुनें जिन्हें छीलकर खाया जा सके।

खुले और सड़क किनारे मिलने वाले भोजन से बचें

खुले में रखे खाद्य पदार्थ मक्खियों, धूल और दूषित वातावरण के संपर्क में आकर संक्रमण फैला सकते हैं। इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए।

रसोई और घर की सफाई बनाए रखें

भोजन बनाने वाले बर्तनों, रसोई की सतह, पानी रखने वाले बर्तनों और खाद्य सामग्री को स्वच्छ रखना संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक है।

स्वच्छ शौचालय का उपयोग करें

साफ-सुथरे शौचालय और बेहतर सीवेज व्यवस्था संक्रमण की श्रृंखला को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वच्छता दोनों ही इस बीमारी से बचाव के लिए जरूरी हैं।

लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें

यदि किसी व्यक्ति को लगातार तेज बुखार, पेट दर्द, कमजोरी या टाइफाइड से जुड़े अन्य लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच और उचित उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।