मौसम में बदलाव के साथ अचानक सर्दी, खांसी, बुखार और शरीर में दर्द शुरू हो जाए तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। बदलते मौसम में कई लोग सीजनल फ्लू की चपेट में आ जाते हैं। इस दौरान बुखार, नाक बहना, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे समय में डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार के साथ खानपान पर ध्यान देना भी जरूरी माना जाता है। डॉ. मोनिका दीक्षित के अनुसार, सही और हल्का भोजन शरीर को बीमारी से उबरने में मदद कर सकता है।
फ्लू के दौरान सबसे पहले शरीर में पानी की कमी रोकें
सीजनल फ्लू के दौरान बुखार और कम खाने-पीने की वजह से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेते रहना जरूरी है। एक साथ बहुत अधिक पानी पीने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार पानी पी सकते हैं।
सामान्य पानी के अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, हल्का सूप और गुनगुने पेय भी लिए जा सकते हैं। इससे शरीर में तरल पदार्थ की कमी को पूरा करने में मदद मिल सकती है और कमजोरी भी कम महसूस हो सकती है।
भारी भोजन छोड़कर हल्की चीजों को दें प्राथमिकता
फ्लू के दौरान पाचन तंत्र पर अनावश्यक दबाव डालने से बचना बेहतर होता है। ऐसे समय में बहुत अधिक मसालेदार, तला हुआ या भारी भोजन लेने के बजाय आसानी से पचने वाली चीजों को भोजन में शामिल किया जा सकता है।
खिचड़ी, दलिया, मूंग दाल, सादी रोटी और उबली हुई सब्जियां इसके विकल्प हो सकते हैं। ये खाद्य पदार्थ अपेक्षाकृत हल्के होते हैं और बीमारी के दौरान शरीर को जरूरी पोषण उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं।
विटामिन सी वाले फल हो सकते हैं उपयोगी
फ्लू के दौरान पोषण से भरपूर फलों को डाइट में शामिल करना भी महत्वपूर्ण है। संतरा, मौसमी, अमरूद, कीवी और पपीता जैसे फलों में विटामिन सी समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।
इसके साथ हरी और रंगीन सब्जियों को भी भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। पालक, गाजर, टमाटर और शिमला मिर्च जैसी सब्जियां शरीर को आवश्यक पोषक तत्व देने में मदद कर सकती हैं। संतुलित आहार शरीर की सामान्य रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में सहायक होता है।
प्रोटीन की कमी न होने दें
बीमारी से उबरने के दौरान शरीर को पर्याप्त प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसलिए डाइट में प्रोटीन के अच्छे स्रोत शामिल करना उपयोगी हो सकता है।
दाल, पनीर, दही, दूध, सोया और अंडा जैसे खाद्य पदार्थ प्रोटीन के स्रोत हैं। इन्हें व्यक्ति की पसंद, पाचन क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार भोजन में शामिल किया जा सकता है। पर्याप्त पोषण शरीर को कमजोरी से उबरने में सहायता कर सकता है।
फ्लू में किन चीजों से बनानी चाहिए दूरी?
सीजनल फ्लू के दौरान केवल यह देखना जरूरी नहीं है कि क्या खाना है, बल्कि किन चीजों से बचना है, इसका भी ध्यान रखना चाहिए। इस दौरान कोल्ड ड्रिंक, जंक फूड, बहुत ज्यादा मीठी चीजें और अत्यधिक तला-भुना भोजन कम करना बेहतर है।
ऐसे खाद्य पदार्थ बीमारी के दौरान संतुलित पोषण की जरूरत पूरी करने के लिए अच्छे विकल्प नहीं माने जाते। इसके बजाय घर का हल्का, ताजा और पौष्टिक भोजन लेना अधिक उपयुक्त हो सकता है।
आराम और नींद भी रिकवरी का अहम हिस्सा
सिर्फ खानपान पर ध्यान देने से ही फ्लू से राहत नहीं मिलती। बीमारी के दौरान शरीर को पर्याप्त आराम देना भी जरूरी है। पर्याप्त नींद लेने और जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत से बचने से शरीर को रिकवरी के लिए समय मिलता है।
इसके साथ डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेते रहना चाहिए। अपनी ओर से दवा शुरू करने या बंद करने के बजाय स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी?
सामान्य फ्लू के लक्षणों में घर पर आराम और उचित देखभाल से राहत मिल सकती है, लेकिन हर व्यक्ति में बीमारी का असर एक जैसा नहीं होता। अगर बुखार कई दिनों तक बना रहता है, सांस लेने में परेशानी होती है या कमजोरी लगातार बढ़ती जाती है, तो डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
खासकर ऐसे लोगों को लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जिन्हें पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने से उचित उपचार की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है।
फ्लू में डाइट का रखें संतुलन
सीजनल फ्लू के दौरान भोजन का उद्देश्य शरीर को पर्याप्त पानी, ऊर्जा और पोषक तत्व उपलब्ध कराना होना चाहिए। पानी और अन्य उपयुक्त तरल पदार्थों के साथ हल्का भोजन, फल, सब्जियां और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।
साथ ही तला-भुना, अत्यधिक मीठा और जंक फूड कम करना चाहिए। भोजन के साथ पर्याप्त आराम और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार पर ध्यान देना भी जरूरी है।
