H1N1 स्वाइन फ्लू के सामान्य लक्षण और संक्रमण से जुड़ी जानकारी | Source: Chrome

H1N1 स्वाइन फ्लू के सामान्य लक्षण और संक्रमण से जुड़ी जानकारी।Source : Chrome

देश के कई हिस्सों में इन्फ्लुएंजा A(H1N1), जिसे आमतौर पर स्वाइन फ्लू कहा जाता है, के मामलों को लेकर चिंता बढ़ी है। इंदौर में एक महिला की मौत और अलग-अलग शहरों से सामने आ रहे मामलों के बीच लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अब हर बुखार पर स्वाइन फ्लू का टेस्ट कराना चाहिए? इसका जवाब है नहीं, हर बुखार में टेस्ट जरूरी नहीं होता। टेस्ट की जरूरत लक्षणों की गंभीरता, बीमारी की अवधि, संपर्क और मरीज के जोखिम कारकों के आधार पर तय की जाती है।

देशभर में क्यों बढ़ी चिंता?

इन्फ्लुएंजा के मामले मौसम बदलने के दौरान बढ़ सकते हैं। बारिश, नमी और तापमान में बदलाव के बीच सांस से जुड़ी बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ता है। हालांकि, किसी एक इलाके में मामलों की संख्या बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि देश में कोरोना जैसी नई महामारी आ गई है।

भारत में संक्रामक बीमारियों की निगरानी और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) लगातार निगरानी करता है और मौसमी इन्फ्लुएंजा से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराता है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण कैसे पहचानें?

H1N1 के लक्षण आम फ्लू जैसे ही हो सकते हैं। इसमें आमतौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द, ठंड लगना और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में उल्टी या दस्त भी हो सकते हैं। इसलिए केवल बुखार के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति को स्वाइन फ्लू है।

स्वाइन फ्लू फैलता कैसे है?

इन्फ्लुएंजा वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने और सांस लेने के दौरान निकलने वाली सांस की बूंदों और कणों के जरिए फैल सकता है। संक्रमित सतह को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह को छूने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है।यही वजह है कि खांसी या बुखार होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी बनाना, हाथों की सफाई रखना और दूसरों के संपर्क में सावधानी बरतना जरूरी है।

क्या हर बुखार में H1N1 टेस्ट करवाना चाहिए?

हर व्यक्ति में टेस्ट की जरूरत एक जैसी नहीं होती। डॉक्टर मरीज के लक्षण, उनकी गंभीरता, बीमारी की अवधि, आसपास संक्रमण की स्थिति और मरीज के जोखिम कारकों को देखकर जांच की सलाह दे सकते हैं।अगर लक्षण हल्के हैं तो हर मामले में तुरंत H1N1 जांच कराना जरूरी नहीं माना जाता। वहीं, गंभीर या लगातार बिगड़ते लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।विशेष रूप से सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, लगातार बिगड़ता बुखार या गंभीर श्वसन लक्षण दिखाई दें तो मेडिकल मदद लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

जांच के लिए कौन सा टेस्ट किया जाता है?

इन्फ्लुएंजा की पहचान के लिए आणविक यानी molecular tests अधिक संवेदनशील माने जाते हैं। RT-PCR इसी तरह की जांच है, जिसमें आमतौर पर श्वसन मार्ग से लिए गए नमूने की जांच की जाती है। CDC के अनुसार molecular tests इन्फ्लुएंजा वायरस की पहचान के लिए सबसे संवेदनशील और सटीक परीक्षणों में शामिल हैं।हालांकि, किस मरीज को कौन सी जांच करानी है, इसका फैसला डॉक्टर की सलाह और स्थानीय स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों के आधार पर होना चाहिए।

किन लोगों में ज्यादा सावधानी जरूरी?

फ्लू से गंभीर बीमारी का खतरा कुछ समूहों में अधिक हो सकता है। इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से कुछ गंभीर या पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोग शामिल हो सकते हैं।ऐसे लोगों में बुखार और सांस से जुड़े लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

क्या यह कोरोना जैसी नई महामारी है?

अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर H1N1 को कोरोना जैसी नई महामारी बताना सही नहीं होगा। 2009 में H1N1 ने महामारी का रूप लिया था, लेकिन इसके बाद यह मौसमी इन्फ्लुएंजा के रूप में भी फैलता रहा है।इसलिए घबराने के बजाय लक्षणों को समझना, संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाना और गंभीर स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना ज्यादा जरूरी है।

बचाव के लिए क्या करें?

बुखार, खांसी या छींक होने पर दूसरों से उचित दूरी रखें। हाथों को नियमित रूप से साफ करें और सार्वजनिक जगहों पर स्वच्छता का ध्यान रखें। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या दूसरी दवाएं शुरू न करें।सबसे जरूरी बात,हर बुखार को स्वाइन फ्लू मानकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। सही जांच का फैसला मरीज की स्थिति देखकर डॉक्टर ही बेहतर तरीके से कर सकते हैं।