नई दिल्ली। क्रिकेट इतिहास में कई ऐसे खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने निजी जीवन की कठिन परिस्थितियों के बावजूद मैदान पर असाधारण प्रदर्शन किया। पाकिस्तान के पूर्व स्टार सलामी बल्लेबाज सईद अनवर की कहानी भी ऐसी ही प्रेरणादायक मिसाल मानी जाती है। वर्ष 2001 में लंबी बीमारी के बाद उनकी बेटी बिस्माह का निधन हो गया था। इस दुखद घटना ने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया और एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने क्रिकेट छोड़ने तक का विचार किया। हालांकि कठिन दौर से उबरते हुए उन्होंने 2003 क्रिकेट विश्व कप में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया और भारत के खिलाफ शानदार शतक लगाकर अपनी बेटी को श्रद्धांजलि दी।
पाकिस्तान के सबसे सफल बल्लेबाजों में रहे सईद अनवर
सईद अनवर को पाकिस्तान क्रिकेट के सबसे सफल और भरोसेमंद सलामी बल्लेबाजों में गिना जाता है। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 55 टेस्ट मैच खेले, जिनमें 4,052 रन बनाए। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 11 शतक और 25 अर्धशतक दर्ज हैं।
एकदिवसीय क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने 257 वनडे मैचों में 8,824 रन बनाए, जिसमें 20 शतक और 43 अर्धशतक शामिल हैं। 1990 के दशक में भारत और पाकिस्तान के मुकाबलों में उनका बल्ला अक्सर खूब चलता था।
एक घटना ने बदल दी पूरी जिंदगी
साल 2001 में सईद अनवर ने मुल्तान में बांग्लादेश के खिलाफ अपना अंतिम टेस्ट मैच खेला। इस मुकाबले में उन्होंने 101 रन की शतकीय पारी खेली और पाकिस्तान ने मैच 264 रन से जीत लिया।
लेकिन इस जीत के तुरंत बाद उनके जीवन में सबसे बड़ा दुख आया। उनकी बेटी बिस्माह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। बेटी की मौत की खबर ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया और वह तुरंत अपने घर लौट गए।
क्रिकेट से दूर होने लगे सईद अनवर
बेटी के निधन के बाद सईद अनवर का क्रिकेट से मन हटने लगा। उन्होंने दोबारा कोई टेस्ट मैच नहीं खेला और धीरे-धीरे उनका झुकाव धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ने लगा।
कई महीनों तक वह क्रिकेट से दूर रहे और अपने निजी दुख से बाहर निकलने की कोशिश करते रहे। उस समय यह भी सवाल उठने लगे थे कि क्या वह कभी मैदान पर पहले जैसी वापसी कर पाएंगे।
विश्व कप में की दमदार वापसी
कठिन परिस्थितियों के बावजूद सईद अनवर ने वापसी का फैसला किया और 2003 क्रिकेट विश्व कप में पाकिस्तान टीम का हिस्सा बने।
विश्व कप के दौरान भारत के खिलाफ खेले गए मुकाबले में उन्होंने 126 गेंदों में शानदार 101 रन बनाए। यह शतक उनके करियर की सबसे भावनात्मक पारियों में गिना जाता है।
बेटी बिस्माह को समर्पित किया शतक
भारत के खिलाफ लगाए गए इस शतक को सईद अनवर ने अपनी दिवंगत बेटी बिस्माह को समर्पित किया था।
हालांकि उस मुकाबले के कई अन्य पहलू भी चर्चा में रहे, लेकिन निजी दुख के बीच खेली गई उनकी यह पारी आज भी क्रिकेट इतिहास की सबसे भावनात्मक पारियों में शामिल मानी जाती है।
वनडे करियर का अंत और ऐतिहासिक रिकॉर्ड
सईद अनवर ने अपना अंतिम एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच 4 मार्च 2003 को बुलावायो में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेला। इस मुकाबले में वह 45 गेंदों पर 40 रन बनाकर नाबाद लौटे।
इसके कुछ महीनों बाद अगस्त 2003 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी।
भारत के खिलाफ बनाया था 194 रन का रिकॉर्ड
सईद अनवर के नाम लंबे समय तक वनडे क्रिकेट की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी का विश्व रिकॉर्ड भी रहा।
उन्होंने वर्ष 1997 में भारत के खिलाफ 194 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी। यह रिकॉर्ड कई वर्षों तक कायम रहा। बाद में वर्ष 2010 में भारत के सचिन तेंदुलकर ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 200 रन बनाकर इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
अब आध्यात्मिक जीवन बिता रहे हैं सईद अनवर
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद सईद अनवर सार्वजनिक जीवन से काफी हद तक दूर हो गए।
वर्तमान में वह धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन पर अधिक ध्यान दे रहे हैं तथा क्रिकेट की चमक-दमक से दूर सादा जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
