लखनऊ। सफलता की राह हमेशा आसान नहीं होती। कई बार मंजिल तक पहुंचने से पहले इंसान को लगातार असफलताओं, पारिवारिक परेशानियों और भावनात्मक झटकों का सामना करना पड़ता है। लखनऊ की सल्तनत परवीन की कहानी भी ऐसे ही संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। उन्होंने अपने भाई को खोने के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभालने और उसके अधूरे स्थान को अपने तरीके से पूरा करने का संकल्प लिया। इसके बाद उन्होंने तमाम मुश्किलों के बावजूद सिविल सेवा की तैयारी जारी रखी और आखिरकार UPPSC 2022 में छठी रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर बनने में सफलता पाई।
TCS की नौकरी मिली, लेकिन मन सिविल सेवा में था
सल्तनत परवीन का जन्म लखनऊ के एक सामान्य परिवार में हुआ। उनकी मां ने बच्चों की पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी। सल्तनत ने शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद बीटेक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्हें कैंपस प्लेसमेंट के जरिए TCS में नौकरी मिल गई।
कॉरपोरेट क्षेत्र में नौकरी शुरू करने के बाद भी उनके मन में सिविल सेवा में जाने की इच्छा बनी रही। वह प्रशासनिक सेवा में जाकर काम करना चाहती थीं। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने TCS की नौकरी छोड़ने का फैसला किया और पूरी तरह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गईं।
भाई के निधन ने तोड़ दिया, फिर उसी दुख को बना लिया ताकत
सिविल सेवा की तैयारी के दौरान सल्तनत की जिंदगी में एक ऐसा हादसा आया जिसने पूरे परिवार को झकझोर दिया। उनका छोटा भाई अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। कुछ समय बाद उसका निधन हो गया। परिवार में पांच सदस्यों की जगह चार सदस्य रह गए।
भाई को खोने का दुख सल्तनत के लिए बेहद कठिन था। इस घटना ने परिवार को भीतर तक प्रभावित किया। लेकिन इसी दौर में उन्होंने खुद को संभालने की कोशिश की। उन्होंने यह संकल्प लिया कि वह परिवार के लिए जिम्मेदारी निभाएंगी और भाई की जगह को अपने तरीके से पूरा करने का प्रयास करेंगी।
मां की एक बात ने फिर खड़ा कर दिया
भाई के निधन के बाद सल्तनत ने अपने माता-पिता के लिए कुछ बड़ा करने का फैसला लिया। ऐसे कठिन समय में उनकी मां ने उनका हौसला बढ़ाया। मां ने उनसे कहा कि जिस दिन उन्होंने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य चुना था, उसी दिन से वह उनके लिए अधिकारी बन गई थीं।
मां के इस भरोसे ने सल्तनत को आगे बढ़ने की ताकत दी। उन्होंने अपने दुख को कमजोरी बनने देने के बजाय उसे अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता में बदलने की कोशिश की। इसके बाद सिविल सेवा की तैयारी उनके लिए केवल एक करियर लक्ष्य नहीं रही, बल्कि परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी माध्यम बन गई।
पिता की किडनी सर्जरी और मां के ऑपरेशन के बीच पढ़ाई
सल्तनत की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। तैयारी के दौरान उनके पिता की किडनी की सर्जरी हुई। इसके अलावा उनकी मां को भी एक गंभीर ऑपरेशन से गुजरना पड़ा। एक तरफ परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी थी और दूसरी तरफ प्रतियोगी परीक्षा की कठिन तैयारी।
ऐसे समय में पढ़ाई के लिए लगातार समय निकालना आसान नहीं था। सल्तनत ने परिवार की जरूरतों और अपनी तैयारी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की। पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी को रुकने नहीं दिया।
कई बार प्रारंभिक परीक्षा में मिली असफलता
सल्तनत की सफलता की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उनकी असफलताएं भी हैं। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी UPPSC की परीक्षाओं के कई प्रयास किए। हालांकि शुरुआती दौर में उन्हें बार-बार प्रारंभिक परीक्षा में असफलता का सामना करना पड़ा।
लगातार असफल होने के बाद भी उन्होंने परीक्षा की तैयारी छोड़ने का फैसला नहीं किया। हर प्रयास के बाद वह अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करती थीं। कमियों को समझने और अगली कोशिश के लिए तैयारी को बेहतर बनाने पर उनका ध्यान रहता था।
असफलताओं से सीखा और रणनीति बदलती रहीं
प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार प्रयास करने के बावजूद सफलता न मिलने पर कई अभ्यर्थी हताश हो जाते हैं। सल्तनत ने इसके बजाय अपनी तैयारी के तरीके पर काम किया। वह पिछली असफलताओं से सीखने और नई रणनीति के साथ आगे बढ़ने की कोशिश करती रहीं।
उनके लिए कठिन दिनों की याद भी प्रेरणा का काम करती थी। उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा पढ़ाई में लगाने का प्रयास किया और लक्ष्य से ध्यान हटने नहीं दिया। परिवार की परिस्थितियों के बीच तैयारी जारी रखना उनके सफर की एक बड़ी चुनौती रही।
UPSC और UPPSC दोनों में आजमाया भाग्य
सल्तनत ने केवल UPPSC तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने UPSC की परीक्षा भी दी और संघ लोक सेवा आयोग तथा उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में कई प्रयास किए। शुरुआती असफलताओं के बावजूद उनका प्रयास जारी रहा।
उनकी कहानी यह दिखाती है कि किसी प्रतियोगी परीक्षा में एक या दो असफल प्रयास अंतिम परिणाम तय नहीं करते। सल्तनत ने लगातार कोशिश, रणनीति में बदलाव और अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा।
UPPSC 2022 में हासिल की छठी रैंक
लंबे संघर्ष और कई असफल प्रयासों के बाद आखिरकार सल्तनत परवीन के प्रयासों को बड़ी सफलता मिली। उन्होंने UPPSC 2022 में छठी रैंक हासिल की। इस उपलब्धि के साथ उनका डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना पूरा हुआ।
जिस सफर की शुरुआत TCS की नौकरी छोड़कर सिविल सेवा में जाने के फैसले से हुई थी, वह कई व्यक्तिगत और पारिवारिक चुनौतियों से गुजरते हुए प्रशासनिक पद तक पहुंचा। भाई को खोने का सदमा, माता-पिता की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार मिली असफलताएं उनके रास्ते में आईं, लेकिन उन्होंने प्रयास जारी रखा।
सल्तनत परवीन की कहानी क्यों बनी प्रेरणा?
सल्तनत परवीन की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उनकी सफलता के पीछे केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि लंबे समय तक लक्ष्य के प्रति टिके रहने की कहानी है। उन्होंने कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर सिविल सेवा को चुना। इसके बाद उन्हें पारिवारिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा और परीक्षा में कई बार असफलता भी मिली।
इसके बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और अंततः UPPSC 2022 में छठी रैंक हासिल की। उनकी यात्रा में परिवार का समर्थन, खासकर मां का भरोसा, महत्वपूर्ण भूमिका निभाता दिखाई देता है।
