अमरेली। गुजरात के अमरेली जिले में 12 साल से लंबित एक गुमशुदगी का मामला पुलिस ने तकनीकी जांच और सोशल मीडिया के जरिए सुलझा लिया है। वर्ष 2014 में 13 साल की उम्र में लापता हुई लड़की को पुलिस ने 12 साल बाद खोज निकाला। जब पुलिस उसके ठिकाने तक पहुंची तो पता चला कि अब वह 26 साल की हो चुकी है और चार बच्चों की मां है। इस पूरे मामले में सबसे अहम सुराग सोशल मीडिया पर मिला एक ‘हैप्पी बर्थडे’ संदेश बना, जिसने पुलिस की लंबी जांच को नई दिशा दी।
2014 में दर्ज हुआ था मामला, कई साल तक नहीं मिला सुराग
अमरेली तालुका पुलिस थाने में वर्ष 2014 में 13 वर्षीय नाबालिग लड़की के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपहरण और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो अधिनियम के तहत धाराएं लगाई गई थीं। समय बीतता गया, लेकिन लड़की का कोई पता नहीं चल सका। इस दौरान मामले की जांच करने वाले 10 से अधिक पुलिस निरीक्षक भी बदल गए, फिर भी गुमशुदा लड़की की तलाश पूरी नहीं हो पाई।
कई वर्षों तक मामला अनसुलझा रहने के बाद एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने इस पुराने मामले को दोबारा उठाया। पुलिस टीम ने पुराने दस्तावेजों और उपलब्ध तकनीकी जानकारियों को आधार बनाकर जांच नए सिरे से शुरू की। उस समय पुलिस के पास लड़की की पुरानी तस्वीर, उसकी जन्मतिथि और परिवार से जुड़ी जानकारी ही प्रमुख आधार थी।
1500 से ज्यादा सोशल मीडिया खातों की जांच, एक पोस्ट ने बदल दी पूरी दिशा
लड़की की तलाश के लिए पुलिस ने महिला कर्मचारियों की एक विशेष टीम बनाई। टीम ने लड़की की जन्मतिथि को आधार बनाकर इंस्टाग्राम और फेसबुक पर 1500 से अधिक सोशल मीडिया खातों की जांच शुरू की। इस दौरान पुलिस को एक ऐसा संदिग्ध खाता मिला, जिसमें लड़की की जन्मतिथि वाले दिन ही ‘हैप्पी बर्थडे’ की पोस्ट दिखाई दी।
पुलिस के लिए यह पोस्ट बेहद महत्वपूर्ण सुराग साबित हुई। इसके बाद टीम ने संबंधित खाते पर मौजूद तस्वीरों और अन्य जानकारियों की बारीकी से जांच शुरू की। पुलिस ने सोशल मीडिया पर मिली तस्वीरों में दिखाई देने वाली छोटी-छोटी जानकारियों को भी नजरअंदाज नहीं किया।
तस्वीर के पीछे दिखा रिक्शा और खुलता चला गया पूरा रास्ता
जांच के दौरान पुलिस को एक तस्वीर में पीछे की ओर एक रिक्शा दिखाई दिया। पुलिस ने इसी रिक्शे को अगला सुराग बनाया। रिक्शे की पहचान और उसके मालिक तक पहुंचने के लिए टीम ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय यानी आरटीओ से संपर्क किया।
रिक्शे के नंबर के आधार पर उसके मालिक का मोबाइल नंबर हासिल किया गया। इसके बाद मोबाइल नंबर से जुड़ी जानकारी की जांच की गई तो पुलिस को पता चला कि इसी नंबर का इस्तेमाल गुजरात ग्रामीण बैंक में खाता खोलने के लिए भी किया गया था। इस तरह सोशल मीडिया की एक तस्वीर से शुरू हुई जांच अब बैंक खाते तक पहुंच चुकी थी।
बैंक खाते में मिली पुरानी तस्वीर ने मजबूत किया पुलिस का शक
पुलिस के लिए बैंक खाते से मिली जानकारी बेहद अहम साबित हुई। खाते में पहचान के लिए वही पुरानी तस्वीर लगी हुई थी, जो लड़की के लापता होने के समय पुलिस के पास उपलब्ध थी। तस्वीर का मिलान किए जाने के बाद पुलिस का संदेह और मजबूत हो गया कि जिस महिला की तलाश की जा रही है, वह संभवतः इसी स्थान से जुड़ी हुई है।
हालांकि, पुलिस के सामने अभी सबसे बड़ी चुनौती उस महिला का सही ठिकाना पता करना थी। साथ ही उसके साथ रहने वाले व्यक्ति तक पहुंचना भी जरूरी था। बैंक से प्राप्त जानकारी ने पुलिस को गुजरात के मोरबी जिले की ओर पहुंचाया।
मोरबी के गांव में पुलिस ने बदला अपना रूप
बैंक खाते से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम मोरबी जिले के हलवद तालुका के भलगामडा गांव पहुंची। पुलिस को आशंका थी कि लापता लड़की इसी इलाके में रह रही है। उसकी पहचान सार्वजनिक न हो और स्थानीय लोगों को जांच का संदेह न हो, इसलिए पुलिसकर्मियों ने जनगणना करने वाले शिक्षक कर्मचारियों का रूप अपनाया।
टीम ने गांव में घर-घर जाकर जानकारी जुटानी शुरू की। करीब पांच से सात घरों की जांच के बाद पुलिस एक संदिग्ध घर तक पहुंची। वहां एक युवती मिली, लेकिन उसने अपना नाम कुछ और बताया। इसके बाद पुलिस ने उसकी वास्तविक पहचान की पुष्टि करने के लिए उसके मायके और पिता से संबंधित जानकारी पूछनी शुरू की।
पिता का नाम पूछते ही खुल गया 12 साल पुराना राज
पुलिस ने युवती से कहा कि यदि उसका पंजीकरण उसके मायके में हो चुका होगा तो उसे यहां सरकारी लाभ प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है, इसलिए पिता का नाम बताना जरूरी है। युवती ने जैसे ही अपने पिता का सही नाम बताया, पुलिस के सामने वर्षों पुराना रहस्य खुल गया।
उसका बताया हुआ पिता का नाम वर्ष 2014 में दर्ज गुमशुदगी की शिकायत में दर्ज नाम से मेल खा गया। इसके बाद पुलिस ने पुष्टि की कि जिस युवती के सामने टीम खड़ी है, वही 12 साल पहले 13 वर्ष की उम्र में लापता हुई लड़की है।
आरोपी को भी जनगणना के बहाने घर बुलाया
जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि युवती के साथ रहने वाला युवक उस समय रिक्शा चलाने के लिए बाहर गया हुआ था। पुलिस ने उसे भी जनगणना के बहाने घर बुलाया। युवक के घर पहुंचते ही पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
पुलिस की जांच में सामने आया कि वर्ष 2014 में नाबालिग लड़की की अपनी मां से अनबन हुई थी। इसके बाद वह गुस्से में घर से निकल गई थी। वह राजकोट बस स्टैंड पर करीब दो से तीन दिन तक रही। वहां एक व्यक्ति ने उसकी देखभाल की। इसके बाद वह आरोपी के संपर्क में आई।
पुलिस के मुताबिक सामाजिक रीति-रिवाज से हुई थी शादी
पुलिस के अनुसार, बाद में उस व्यक्ति ने नाबालिग और आरोपी युवक की सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार शादी करवा दी। इसके बाद लड़की उसी व्यक्ति के साथ रहने लगी। वर्ष 2014 में परिवार से अलग हुई यह लड़की अगले 12 वर्षों तक अपने मूल परिवार से दूर रही।
इस दौरान उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। परिवार जिस बच्ची को वर्षों से तलाश रहा था, वह 12 साल बाद एक 26 वर्षीय महिला के रूप में मिली।
12 साल बाद मिली तो चार बच्चों की मां थी
पुलिस के मुताबिक, जब युवती मिली तो वह चार बच्चों की मां बन चुकी थी और अपने परिवार के साथ रह रही थी। एक 13 वर्षीय लड़की के रूप में वर्ष 2014 में गायब होने के बाद उसकी जिंदगी के करीब 12 वर्ष अलग परिस्थितियों में बीते।
पुराने मामले की जांच के दौरान पुलिस ने युवती की पहचान सुनिश्चित करने के बाद उसके मौजूदा पति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक, आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुई तलाश, कई तकनीकी सुरागों ने पहुंचाया मंजिल तक
इस मामले की सबसे खास बात यह रही कि 12 साल पुराने मामले को सुलझाने में सोशल मीडिया पर मिली एक साधारण सी जन्मदिन की पोस्ट अहम कड़ी बनी। पुलिस ने लड़की की जन्मतिथि के आधार पर 1500 से अधिक इंस्टाग्राम और फेसबुक खातों की जांच की। एक संदिग्ध खाते से मिली ‘हैप्पी बर्थडे’ पोस्ट के बाद तस्वीरों की जांच हुई।
एक तस्वीर में नजर आए रिक्शे से आरटीओ तक पहुंच बनाई गई। आरटीओ से मिले मोबाइल नंबर ने बैंक खाते की जानकारी तक पहुंचाया और बैंक खाते में मौजूद पुरानी तस्वीर ने पुलिस के संदेह को मजबूत किया। इसके बाद जांच मोरबी के भलगामडा गांव तक पहुंची, जहां पुलिस ने जनगणना करने वाले कर्मचारियों के रूप में जाकर युवती की पहचान सुनिश्चित की।
12 साल पुराने मामले का आखिरकार हुआ खुलासा
अमरेली में वर्ष 2014 में दर्ज हुई यह गुमशुदगी की शिकायत करीब 12 वर्षों तक पुलिस के लिए चुनौती बनी रही। जांच के दौरान कई अधिकारी बदले, लेकिन लड़की का सुराग नहीं मिल पाया। बाद में एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने मामले को दोबारा उठाया और तकनीकी जांच के जरिए पुराने रिकॉर्ड को नए सुरागों से जोड़ना शुरू किया।
एक सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुई जांच ने पुलिस को तस्वीर, रिक्शा, आरटीओ रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर और बैंक खाते के जरिए उस गांव तक पहुंचाया, जहां लापता लड़की अपने परिवार के साथ रह रही थी।
