ereer | Source: ereराज कपूर और नरगिस की सुपरहिट फिल्म 'श्री 420' का गाना 'प्यार हुआ इकरार हुआ' आज भी बॉलीवुड के सबसे रोमांटिक गानों में गिना जाता है। साल 1955 में रिलीज हुई इस फिल्म और इसके गानों ने दुनिया भर में अपनी एक अलग छाप छोड़ी थी। बारिश में छाता लिए राज कपूर और नरगिस का वह रोमांटिक अंदाज आज भी लोगों के दिलों में ताजा है, लेकिन इस अमर गीत के पीछे के गीतकार की कहानी बेहद भावुक कर देने वाली है।

किसने लिखा था 'प्यार हुआ इकरार हुआ'?

राज कपूर के साथ एक खास शख्स का रिश्ता 40 के दशक से जुड़ा था, जो उनके लिए खूबसूरत गीत लिखा करता था। इस दिग्गज गीतकार का नाम शैलेंद्र था। शैलेंद्र ने ही राज कपूर के करियर के कई सबसे बड़े और सुपरहिट गाने जैसे 'मेरा जूता है जापानी', 'आवारा हूं', 'जीना इसी का नाम है', और 'जाने कहां गए वो दिन' लिखे थे। उन्होंने ही अपनी कलम से फिल्म 'श्री 420' का यह सदाबहार गाना रचा था, जिसे हिंदी सिनेमा के इतिहास के बेहतरीन गानों में शुमार किया जाता है।

भोजपुरी गीतों को पहचान और शैलेंद्र का सफर

गीतकार गुलजार भी शैलेंद्र को हिंदी सिनेमा के बेहतरीन गीतकारों में मानते थे। शैलेंद्र का जन्म भले ही रावलपिंडी (पाकिस्तान) में हुआ था, लेकिन उनके पुरखे बिहार के आरा से थे। यही वजह थी कि उनके लिखे गीतों और शब्दों में मिट्टी की खुशबू और भोजपुरी का प्रभाव साफ झलकता था, और उन्होंने ही पहला भोजपुरी गीत भी लिखा था। उन्होंने अपने गीतों के जरिए प्यार, समाज और दर्द को बेहद आसान व असरदार शब्दों में बयां किया।

एक फिल्म ने ले ली लीजेंड्री गीतकार की जान?

जीवन में अपार सफलता और शोहरत देखने के बाद शैलेंद्र ने खुद एक फिल्म प्रोड्यूस करने का फैसला किया, जिसका नाम 'तीसरी कसम' था। इस फिल्म में उनके जिगरी दोस्त राज कपूर ने मुख्य भूमिका निभाई थी। हालांकि, बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म फ्लॉप साबित हुई। कहा जाता है कि इस फिल्म में शैलेंद्र ने अपनी गाढ़ी कमाई की सारी सेविंग लगा दी थी, जिसके फ्लॉप होने के बाद वह गहरे सदमे में चले गए और कुछ ही महीनों बाद उनका निधन हो गया। सबसे बड़ा विडंबना यह रही कि जिस फिल्म के घाटे और सदमे ने उनकी जान ली, उसी 'तीसरी कसम' को अगले साल नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया, लेकिन तब तक शैलेंद्र इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे।