
देश के गांवों और दूर दराज के इलाकों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना आज भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। खासकर टीबी जैसी गंभीर बीमारी में समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी होता है। ऐसे में इस समस्या से निपटने के लिए तेलंगाना में एक नई और आधुनिक पहल शुरू की गई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने तेलंगाना के यादाद्री भुवनगिरी जिले में ड्रोन के जरिए टीबी जांच की सुविधा शुरू की है। इस परियोजना में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) बीबीनगर भी सहयोग कर रहा है। इस नई तकनीक की मदद से टीबी की जांच अब पहले से ज्यादा आसान, तेज और कम खर्च में हो सकेगी।
अब सवाल यह है कि ड्रोन आधारित यह व्यवस्था कैसे काम करेगी और इससे गांवों में रहने वाले लोगों को क्या फायदा मिलेगा। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
9451 रुपये से घटकर सिर्फ 91 रुपये रह गया खर्च
पहले गांवों में रहने वाले टीबी मरीजों को जांच कराने के लिए शहर के बड़े अस्पतालों और लैब तक जाना पड़ता था। इसके लिए उन्हें लंबा सफर तय करना पड़ता था, जिससे पूरा दिन निकल जाता था। यात्रा का खर्च अलग से उठाना पड़ता था और कई लोगों की दिहाड़ी भी छूट जाती थी।
आंकड़ों के अनुसार, पहले एक मरीज को टीबी जांच के लिए औसतन 9451 रुपये खर्च करने पड़ते थे। लेकिन ड्रोन सेवा शुरू होने के बाद यह खर्च घटकर सिर्फ 91 रुपये रह गया है। अब मरीज अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ही बलगम का नमूना दे सकते हैं। इसके बाद ड्रोन उन सैंपलों को उड़ाकर बड़े जांच केंद्रों तक पहुंचा देता है। इस नई व्यवस्था से लोगों का समय बच रहा है और जांच का खर्च भी काफी कम हो गया है।
ड्रोन तकनीक से जांच की रफ्तार हुई तेज
टीबी के मरीजों के लिए सबसे जरूरी है कि बीमारी का जल्द पता चल जाए, ताकि समय पर इलाज शुरू किया जा सके। पहले गांवों से सैंपल बड़े जांच केंद्रों तक पहुंचाने और रिपोर्ट वापस आने में करीब 15 दिन लग जाते थे। इतने लंबे समय तक इंतजार करने से मरीज की परेशानी बढ़ जाती थी।
अब ड्रोन की मदद से यह काम काफी आसान हो गया है। नई व्यवस्था के तहत जांच रिपोर्ट आने में सिर्फ 5 दिन लग रहे हैं। इतना ही नहीं, 76 फीसदी से ज्यादा मरीजों को उनकी रिपोर्ट अगले ही दिन मिल जा रही है। जांच के नतीजे जल्दी मिलने से डॉक्टर बिना देरी किए इलाज शुरू कर पा रहे हैं, जिससे मरीजों को बड़ा फायदा मिल रहा है।
ड्रोन के जरिए ऐसे पहुंच रही है स्वास्थ्य सेवा
टीबी की जांच को आसान बनाने के लिए AIIMS बीबीनगर में एक केंद्रीय केंद्र बनाया गया है। यह केंद्र जिले के 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और 60 छोटे उपकेंद्रों से जुड़ा हुआ है। गांवों में लिए गए बलगम के नमूनों को ड्रोन की मदद से सीधे जांच लैब तक पहुंचाया जाता है। यह पूरी व्यवस्था ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ पर काम करती है। यानी छोटे स्वास्थ्य केंद्रों से सैंपल इकट्ठा कर उन्हें कम समय में मुख्य केंद्र तक भेजा जाता है, जिससे जांच में होने वाली देरी कम हो जाती है।
अब दवाइयां भी पहुंचा रहे हैं ड्रोन
इस सेवा का फायदा सिर्फ जांच तक ही सीमित नहीं है। मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद डॉक्टर जो दवाइयां लिखते हैं, उन्हें भी ड्रोन के जरिए गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे मरीजों को दवा लेने के लिए बार-बार शहर नहीं जाना पड़ता। ड्रोन सीधे उनके नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक जरूरी दवाइयां पहुंचा देता है, जिससे इलाज पहले से ज्यादा आसान हो गया है।
