
प्रियंका गांधी के बयान देते हुए तस्वीर।Source : Chrome
लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी द्वारा नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर की गई टिप्पणी पर समाजवादी पार्टी ने अलग रुख अपनाया है. सपा के राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि मंत्रिमंडल में किसे शामिल करना है और किसे नहीं, यह प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है. उन्होंने साथ ही पेपर लीक रोकने के लिए केवल कानून बनाने को पर्याप्त नहीं बताया.
प्रियंका गांधी के बयान पर सपा की प्रतिक्रिया
रामगोपाल यादव ने प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर असहमति जताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को मंत्री बनाया जाए या हटाया जाए, यह पूरी तरह प्रधानमंत्री का अधिकार है. उनके मुताबिक, इस फैसले पर सवाल उठाना उचित नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि यह सरकार के प्रमुख का संवैधानिक विशेषाधिकार है.
पेपर लीक कानून पर क्या बोले रामगोपाल यादव?
एंटी पेपर लीक बिल पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा सांसद ने कहा कि सिर्फ नया कानून बना देने से परीक्षा में धांधली और पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी. उनका कहना था कि व्यवस्था में ईमानदारी और जवाबदेही सबसे जरूरी है. अगर प्रश्नपत्र तैयार करने, उसकी छपाई और परीक्षा संचालन से जुड़े लोग निष्पक्ष हों और जांच एजेंसियां व सतर्कता तंत्र प्रभावी तरीके से काम करें, तो पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है.उन्होंने यह भी कहा कि देश में पहले भी कई सख्त कानून बनाए गए, लेकिन केवल कानून बनने से अपराध पूरी तरह खत्म नहीं हुए. इसलिए व्यवस्था को मजबूत करना ज्यादा जरूरी है.
राम मंदिर चंदा विवाद पर भी साधा निशाना
रामगोपाल यादव ने राम मंदिर चंदा चोरी के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि यह मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उनका आरोप था कि मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धालुओं ने जो योगदान दिया, उसका इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए होना चाहिए था. इस तरह के विवाद से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं.
क्या था प्रियंका गांधी का बयान?
मंगलवार को लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति पर सवाल उठाए थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया गया है जिसने एक गर्भवती महिला से दुष्कर्म के दोषियों की रिहाई का समर्थन किया था. उनके इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामा देखने को मिला.
