नई दिल्ली। ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया, जिसने लंबे समय से कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे समय रैना समेत पांच कॉमेडियन्स को बड़ी राहत दे दी। शीर्ष अदालत ने इन पांचों के खिलाफ दर्ज सभी संबंधित प्राथमिकी और आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि इस पूरे विवाद से जुड़े व्यापक मुद्दे अभी खत्म नहीं हुए हैं और ऑनलाइन सामग्री को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश तय करने के सवाल पर सुनवाई आगे जारी रहेगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह फैसला सुनाया। पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के अलावा न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति जेवी मोहना शामिल थे। अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात को विशेष रूप से ध्यान में रखा कि समय रैना और अन्य लोगों ने पहले दिए गए न्यायालय के निर्देशों का पालन किया है। संबंधित लोगों ने दिव्यांगजनों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए और उनके हित में धन जुटाने का भी काम किया।
कोर्ट की टिप्पणी ने चौंकाया, कहा- ‘ये बहुत होनहार युवा हैं’
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना समेत इन युवाओं द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। अदालत ने कहा, “जब प्रयास सच्चे हों, तो सकारात्मक परिणाम जरूर मिलते हैं। ये बहुत होनहार युवा हैं। अगर इन्होंने सकारात्मक दिशा में काम करना शुरू किया है, तो इसके अच्छे नतीजे भी सामने आएंगे।”
अदालत की इस टिप्पणी के साथ ही समय रैना और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया गया। इससे इस मामले में लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे पांच लोगों को बड़ी राहत मिली है।
किन पांच लोगों के खिलाफ खत्म हुई आपराधिक कार्यवाही?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जिन पांच लोगों को राहत मिली है, उनमें समय रैना, विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर उर्फ सोनाली आदित्य देसाई और निशांत जगदीश तंवर शामिल हैं।
इन लोगों के खिलाफ ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ से जुड़े विवाद और दिव्यांगजनों के प्रति कथित असंवेदनशील टिप्पणियों को लेकर आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। अलग-अलग स्थानों पर दर्ज मामलों के कारण विवाद का कानूनी दायरा काफी बढ़ गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार के आदेश के बाद इन पांच लोगों के खिलाफ संबंधित आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो गई है।
एफआईआर खत्म होने के बावजूद बड़ा सवाल अभी बाकी
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद से जुड़े सभी कानूनी सवाल समाप्त हो गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन सामग्री और उससे जुड़े व्यापक मुद्दों पर सुनवाई जारी रहेगी।
शीर्ष अदालत भविष्य में इस तरह के ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी और उससे संबंधित दिशा-निर्देश तय करने के मुद्दे पर विचार करेगी। अदालत दिव्यांग व्यक्तियों से मिलने वाले सुझावों पर भी विचार करेगी। इस तरह शुक्रवार का फैसला पांच लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही खत्म करने से जुड़ा है, जबकि ऑनलाइन सामग्री के व्यापक नियमन से जुड़े सवाल अभी विचाराधीन हैं।
रणवीर अल्लाहबादिया को अभी नहीं मिली अंतिम राहत
इस मामले में रणवीर अल्लाहबादिया का नाम भी प्रमुख रूप से सामने आया था, लेकिन उनके मामले में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। रणवीर अल्लाहबादिया की ओर से अपने खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने के लिए दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
रणवीर अल्लाहबादिया को ‘बीयर बाइसेप्स’ के नाम से भी जाना जाता है। विवाद के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए अपने खिलाफ अलग-अलग स्थानों पर दर्ज प्राथमिकी को एक साथ जोड़ने और दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की थी। अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी, लेकिन उनकी याचिका पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
इस विवाद से जुड़े अन्य लोगों में यूट्यूबर आशीष चंचलानी भी शामिल रहे हैं। ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के विवादित कार्यक्रम के बाद कई लोगों के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में मामले दर्ज हुए थे।
14 नवंबर 2024 को खार हैबिटैट में शूट हुआ था विवादित एपिसोड
‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ का वह विवादित एपिसोड 14 नवंबर 2024 को खार हैबिटैट में शूट किया गया था। इसे बाद में प्रसारित किया गया था। कार्यक्रम में कथित अश्लील और असंवेदनशील टिप्पणियों को लेकर विवाद खड़ा हुआ और इसके बाद कई लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए।
विवाद में दिव्यांगजनों, विशेष रूप से स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी यानी एसएमए से प्रभावित लोगों को लेकर की गई असंवेदनशील टिप्पणियों पर भी गंभीर आपत्ति जताई गई थी। Cure SMA India Foundation ने इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के सामने उठाया था। अलग-अलग राज्यों में कई प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामला देश की शीर्ष अदालत तक पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी कही थी अहम बात
मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों की कड़ी निंदा की थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार किसी व्यक्ति को सामाजिक मानदंडों का उल्लंघन करने वाली भाषा इस्तेमाल करने का लाइसेंस नहीं देता।
इसके बाद रणवीर अल्लाहबादिया ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज मामलों को एक साथ जोड़ने और दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की थी। जान से मारने की धमकियों की शिकायत के बाद अदालत ने उन्हें अंतरिम सुरक्षा भी प्रदान की थी।
कनाडा में दिए बयान के बाद समय रैना को मिली थी कड़ी चेतावनी
मार्च 2025 में यह विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इसकी वजह समय रैना का कनाडा में अपने एक कार्यक्रम के दौरान इस मामले का उल्लेख करना था। 3 मार्च 2025 को अदालत ने समय रैना को कड़ी चेतावनी दी थी।
उस समय अदालत ने कहा था, “ये युवा सोच सकते हैं कि हम पुराने ख्यालात के हैं, लेकिन हमें पता है कि इनसे कैसे निपटना है। अदालत को हल्के में न लें।”
दरअसल, समय रैना ने कनाडा में अपने कार्यक्रम के अंत में दर्शकों से मजाक करते हुए कहा था, “मेरे वकील की फीस भरने के लिए धन्यवाद।”
इसी दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रणवीर अल्लाहबादिया को अपना पॉडकास्ट ‘द रणवीर शो’ दोबारा शुरू करने की अनुमति दी थी। अदालत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नैतिकता के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया था।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा था कि पॉडकास्ट रणवीर अल्लाहबादिया और उनके 280 कर्मचारियों की आजीविका का एकमात्र साधन है।
जुलाई 2026 में रैना और अल्लाहबादिया पर लगा था तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना
यह मामला 14 जुलाई 2026 को फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने आया था। उस सुनवाई में अदालत ने अपने निर्देशों का पालन नहीं करने को लेकर समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया को कड़ी फटकार लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पर तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। साथ ही अनुपालन हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया था।
मुख्य न्यायाधीश ने उस समय समय रैना के रवैये को लेकर सख्त टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, “हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि समय रैना ने अदालत को गुमराह करने की कोशिश की है। यह अदालत में दिए गए बयानों का खुला उल्लंघन है।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि विदेश में होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति भारतीय न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो गया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा था, “अब उन्हें भुगतने दें। अगर यह अहंकार नहीं है, तो हमें ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी को भी बदलना पड़ेगा।”
माता-पिता से जुड़े अश्लील सवाल ने भी मचाया था बड़ा बवाल
‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद का एक बड़ा कारण रणवीर अल्लाहबादिया द्वारा शो में माता-पिता से संबंधित पूछा गया अश्लील सवाल भी था। इस टिप्पणी के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध हुआ और कई प्राथमिकी दर्ज की गईं।
विवाद बढ़ने के बाद कार्यक्रम के संबंधित एपिसोड को हटाया गया और मामले को लेकर कई कानूनी याचिकाएं दायर की गईं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की और संबंधित लोगों को विभिन्न निर्देश दिए।
दिव्यांगजनों से जुड़ी टिप्पणियों के मामले में अदालत ने समय रैना और अन्य लोगों को माफी मांगने, जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने तथा धन जुटाने जैसे कदम उठाने का निर्देश दिया था। जुलाई 2026 में इन निर्देशों के अनुपालन को लेकर अदालत ने समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया पर तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
अब पांच लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले समाप्त
लंबे समय तक चली कानूनी कार्रवाई, अदालत की सख्त टिप्पणियों और कई निर्देशों के बाद शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना समेत पांच लोगों के खिलाफ दर्ज संबंधित प्राथमिकी और आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी। अदालत ने उनके द्वारा दिव्यांगजनों के लिए किए गए जागरूकता कार्यक्रमों और धन जुटाने के प्रयासों को महत्वपूर्ण माना।
हालांकि, रणवीर अल्लाहबादिया से जुड़ी याचिका अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसके अलावा ऑनलाइन सामग्री की निगरानी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सामाजिक संवेदनशीलता और भविष्य के लिए आवश्यक दिशा-निर्देशों से जुड़े व्यापक सवालों पर अदालत आगे भी विचार करेगी।
