देश की करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र अयोध्या राम मंदिर से जुड़ा कथित चढ़ावा चोरी मामला अब सिर्फ आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह मंदिर प्रशासन, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। इस पूरे विवाद के बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दोनों नेताओं के इस्तीफे को नैतिक जिम्मेदारी और बढ़ते दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर SIT जांच, FIR, गिरफ्तारियां और सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों ने इस पूरे मामले को देशभर की सुर्खियों में ला दिया है।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला? चढ़ावे की गिनती में दिखी पहली गड़बड़ी
पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब मई महीने के अंतिम सप्ताह में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों ने बैंक में जमा हो रही दान राशि का नियमित मिलान किया। शुरुआती जांच में अधिकारियों को पता चला कि मंदिर की दान पेटियों से निकलने वाली रकम और बैंक में जमा हो रही राशि के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। सामान्य तौर पर एक दान पेटी से 7 से 8 लाख रुपये तक की राशि निकलती थी, लेकिन लगातार कई दिनों तक 500 रुपये के नोटों की गड्डियों में कमी मिलने लगी। शुरुआत में इसे सामान्य त्रुटि माना गया, लेकिन जब यह अंतर लगातार सामने आने लगा तो ट्रस्ट को संदेह हुआ कि कहीं अंदरूनी स्तर पर गड़बड़ी तो नहीं हो रही। इसके बाद ट्रस्ट ने बिना किसी कर्मचारी को जानकारी दिए दान राशि गिनने वाले कक्ष में गुप्त (हिडन) कैमरे लगवाए। एक सप्ताह तक रिकॉर्ड हुई फुटेज ने पूरे मामले का रुख बदल दिया। फुटेज में कुछ कर्मचारी सामने लगे सामान्य CCTV कैमरों के सामने खड़े होकर दूसरे कर्मचारियों की गतिविधि छिपाते दिखाई दिए, जबकि उनका साथी नोटों की गड्डियों से नकदी निकालकर अपने कपड़ों में छिपा रहा था। यहीं से यह स्पष्ट हो गया कि चोरी बाहर से नहीं बल्कि गिनती प्रक्रिया के दौरान अंदर से ही हो रही थी।
SIT जांच में सामने आया चोरी का पूरा 'मॉडल', कैसे होती थी कथित हेराफेरी?
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय SIT गठित की। टीम ने लगातार कई दिनों तक मंदिर परिसर में जांच की, कर्मचारियों से पूछताछ की, CCTV फुटेज खंगाली और बैंक रिकॉर्ड का मिलान किया। जांच में सिर्फ नोट चुराने की बात ही सामने नहीं आई, बल्कि कथित तौर पर चोरी का एक बेहद संगठित तरीका भी सामने आया। सूत्रों के अनुसार, नोटों की गिनती के दौरान कर्मचारियों द्वारा कुछ गड्डियों में अतिरिक्त नोट जोड़ दिए जाते थे, जिससे बैंक तक पहुंचने से पहले कुल गड्डियों की संख्या और वाउचर का हिसाब सही दिखाई देता था। लेकिन बैंक में जमा करने से पहले रास्ते में या प्रक्रिया के दौरान वही अतिरिक्त नोट निकाल लिए जाते थे। इस तरह रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी दिखाई नहीं देती थी, जबकि नकदी धीरे-धीरे गायब होती रहती थी।जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में वाउचर तैयार करने वाले कर्मचारियों की भी भूमिका संदिग्ध रही। पुलिस के अनुसार, अनुकल्प मिश्रा कथित रूप से वाउचर प्रक्रिया से जुड़ा था और उसने अपने बहनोई लवकुश मिश्रा के साथ मिलकर इस कथित हेराफेरी को अंजाम दिया। जांच के दौरान लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद किए जाने का भी दावा किया गया है। इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि केवल नकदी ही नहीं बल्कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषण, जैसे झुमके, नथ, बाली, कंगन और पायल जैसी वस्तुओं की भी कथित चोरी की जा रही थी।
FIR, गिरफ्तारियां और इस्तीफे… कार्रवाई कैसे आगे बढ़ी?
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि "जनआस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।" इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई।
एफआईआर में कुल आठ नामजद आरोपी बनाए गए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, करुणेश पांडे पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया और न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी बीच लगातार बढ़ते विवाद और ट्रस्ट पर उठ रहे सवालों के बीच महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि अब तक उनके खिलाफ किसी आपराधिक मामले में नाम शामिल नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार बढ़ते सार्वजनिक दबाव और नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर दोनों ने पद छोड़ने का फैसला लिया।
राम मंदिर में अब क्या बदला? सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए लागू हुए नए नियम
चढ़ावा चोरी के इस कथित मामले ने ट्रस्ट को अपनी पूरी वित्तीय प्रक्रिया की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है। जांच के बाद मंदिर प्रशासन ने दान राशि की सुरक्षा और गिनती व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए हैं। अब नोटों की गिनती में पहले से जुड़े कर्मचारियों की जगह विश्वसनीय कर्मचारियों और बैंक के नए स्टाफ को शामिल किया गया है। पूरे कैश काउंटिंग रूम में हाई-रिजॉल्यूशन CCTV कैमरे लगाए गए हैं और उनकी निगरानी के लिए अलग कंट्रोल रूम बनाया गया है। काउंटिंग रूम में प्रवेश से पहले प्रत्येक कर्मचारी की पूरी तलाशी अनिवार्य कर दी गई है। बाहर निकलते समय भी शत-प्रतिशत जांच होगी। इसके अलावा बैंक में राशि जमा करने से पहले अब तीन अधिकारियों द्वारा क्रॉस वेरिफिकेशन और संयुक्त हस्ताक्षर अनिवार्य कर दिए गए हैं। सरकार और ट्रस्ट दोनों का कहना है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है और यदि आगे किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई केवल कानूनी प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने की कसौटी भी मानी जा रही है।
