erer | Source: ererनई दिल्ली। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को लेकर सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो के बाद CJP नेता अभिजीत दीपके विवादों में घिर गए हैं। दीपके ने एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया था कि उसमें दिखाई दे रहा व्यक्ति जीतेंद्र मिश्रा है और वह अपनी नियुक्ति का जश्न मना रहा है। बाद में वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान पर सवाल उठे, जिसके बाद दीपके ने वीडियो हटा दिया और सफाई दी।

जीतेंद्र मिश्रा के नाम से साझा किया गया वीडियो

मामला उस समय सामने आया जब सौरभ दास के कथित फर्जी दावे को लेकर इंटरनेट पर बहस चल रही थी। इसी बीच अभिजीत दीपके ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले CEO जीतेंद्र मिश्रा का बताते हुए एक वीडियो साझा किया। वीडियो में एक व्यक्ति सिर पर कथित तौर पर शराब का गिलास रखकर नाचता हुआ दिखाई दे रहा था।

दीपके ने वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति जीतेंद्र मिश्रा है और वह अपनी नियुक्ति का इस तरह जश्न मना रहा है। हालांकि, जल्द ही वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान को लेकर सवाल उठने लगे और दीपके ने अपनी पोस्ट हटा दी।

वीडियो हटाने के बाद अभिजीत दीपके ने क्या कहा?

वीडियो हटाने के बाद अभिजीत दीपके ने सफाई देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के निजी जीवन में वह क्या करता है, यह उसका व्यक्तिगत मामला है। उन्होंने कहा कि उनका सवाल इस बात को लेकर था कि यदि यह व्यक्ति राम मंदिर ट्रस्ट का CEO नहीं होता तो ‘धर्म के ठेकेदारों’ की प्रतिक्रिया क्या होती।

दीपके ने यह भी कहा कि किसी को मूर्ख बनाने के लिए अपने धर्म का इस्तेमाल नहीं करने देना चाहिए। हालांकि, गलत पहचान को लेकर उठे सवालों के बाद विवाद थमा नहीं और सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आती रहीं।

पहचान पर सवाल उठने के बाद बदला बयान

गलती की ओर ध्यान दिलाए जाने के बाद अभिजीत दीपके ने कहा, “मुझे बताया गया है कि वीडियो में दिख रहा शख्स जीतेंद्र मिश्रा नहीं।” उन्होंने इसके साथ यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि किसी व्यक्ति का अपने निजी जीवन में क्या करना है, यह पूरी तरह उसका मामला है।

दीपके ने कहा कि उनका मुद्दा किसी व्यक्ति या उसकी पसंद को लेकर नहीं था, बल्कि इस बात को लेकर था कि अलग-अलग लोगों के मामले में चीजों को अलग तरीके से देखा जाता है। उन्होंने अपने बयान में इसे दोहरे मापदंड से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उठाए सवाल

इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने अभिजीत दीपके पर बिना सत्यापन के वीडियो साझा करने का आरोप लगाया। मनोज सिंह नाम के एक एक्स यूजर ने दावा किया कि दीपके ने राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा का बताकर किसी अन्य व्यक्ति का वीडियो साझा किया।

मनोज सिंह ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि वीडियो में कोई और व्यक्ति ‘जमाल कुडू’ गाने पर डांस कर रहा था और यह नवंबर 2025 का पुराना वीडियो था। उन्होंने वीडियो हटाए जाने के बाद दी गई सफाई पर भी सवाल उठाए और मामले में गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलाने की मांग की।

सेना और श्रीराम मंदिर को लेकर भी हुई बहस

कुलदीप पुंडीर नाम के एक एक्स यूजर ने इस विवाद को भारतीय सेना और श्रीराम मंदिर से जोड़कर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी वीडियो के जरिए भारतीय सेना और श्रीराम मंदिर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने अपनी पोस्ट में सौरव दास और अभिजीत दीपके का जिक्र करते हुए कहा कि भ्रामक वीडियो को बिना सत्यापन के आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि राजनीतिक एजेंडे के लिए सेना और श्रीराम मंदिर की प्रतिष्ठा से खिलवाड़ करना उचित है या नहीं।

प्राथमिकी दर्ज करने की मांग भी उठी

किशन शुक्ला नाम के एक एक्स यूजर ने उत्तर प्रदेश पुलिस को टैग करते हुए आरोप लगाया कि अभिजीत दीपके द्वारा गलत खबर फैलाकर समाज में नफरत फैलाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने मामले में गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की।

वहीं, मनोज सिंह समेत कुछ अन्य यूजर्स ने भी वीडियो साझा करने को लेकर कार्रवाई की मांग की। हालांकि, ये आरोप और कार्रवाई की मांग सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाओं के रूप में सामने आई हैं।

विवाद का मुख्य मुद्दा क्या है?

फिलहाल विवाद का मुख्य केंद्र वह वीडियो है, जिसे अभिजीत दीपके ने जीतेंद्र मिश्रा से जोड़कर साझा किया था। बाद में उन्होंने वीडियो हटा दिया और कहा कि उन्हें बताया गया है कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति जीतेंद्र मिश्रा नहीं है।

इस घटनाक्रम ने सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति से जुड़े वीडियो या दावे को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि किए जाने को लेकर भी बहस छेड़ दी है। खासतौर पर सार्वजनिक पद या महत्वपूर्ण संस्थानों से जुड़े लोगों के बारे में गलत पहचान वाला वीडियो साझा होने पर विवाद तेजी से बढ़ सकता है।