पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को तेज कर दिया है। दोनों दलों के बीच संभावित गठबंधन को लेकर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।
Punjab Politics: PM Modi से सुखबीर बादल की मुलाकात ने बढ़ाई हलचल, क्या फिर साथ आएंगे BJP और Akali Dal?Source : Aaj Tak.com
PM मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात से बढ़ी सियासी चर्चा
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच शिरोमणि अकाली दल (SAD) प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। संसद भवन में हुई इस बैठक के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर भाजपा और अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सुखबीर बादल शुक्रवार सुबह दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री से मुलाकात की। हालांकि बैठक के बाद दोनों पक्षों की ओर से आधिकारिक तौर पर बातचीत का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
2020 में टूटा था 25 साल पुराना गठबंधन
भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल लंबे समय तक पंजाब में सहयोगी दल रहे। दोनों पार्टियों का गठबंधन करीब 25 वर्षों तक चला। हालांकि वर्ष 2020 में कृषि कानूनों के विरोध और किसान आंदोलन के दौरान अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग होने का फैसला लिया था।
इसके बाद दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़े और पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनने लगे।
चुनाव से पहले क्यों अहम मानी जा रही है यह मुलाकात?
पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों दल फिर से साथ आते हैं तो पंजाब की चुनावी तस्वीर बदल सकती है। हालांकि फिलहाल किसी भी संभावित गठबंधन को लेकर न तो भाजपा और न ही अकाली दल की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा की गई है।
अटकलों का दौर, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
बैठक के बाद राजनीतिक चर्चाएं जरूर तेज हो गई हैं, लेकिन अभी तक किसी भी दल ने गठबंधन की पुष्टि नहीं की है। दोनों दलों की ओर से सिर्फ मुलाकात की जानकारी सामने आई है।
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में भाजपा और अकाली दल अपने राजनीतिक संबंधों को लेकर क्या फैसला लेते हैं और पंजाब चुनाव से पहले क्या कोई नया समीकरण बनता है।
