पीएम मोदी ने विपक्ष की ‘हमेशा विरोध की राजनीति’ की आलोचना की, रिपब्लिक समिट 2026 में दिया बयान | Source: ANIपीएम मोदी ने विपक्ष की ‘हमेशा विरोध की राजनीति’ की आलोचना की, रिपब्लिक समिट 2026 में दिया बयानSource : ANI

नई दिल्ली में आयोजित रिपब्लिक समिट 2026 को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के दीर्घकालिक विकास, वैश्विक भूमिका और बदलते विश्व पर सरकार का व्यापक विजन सामने रखा। Great Power India: Nation First थीम पर आयोजित इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत किसी क्षणिक घटना के आधार पर फैसले लेने वाला देश नहीं है, बल्कि हजारों वर्षों की सभ्यता, अनुभव और दूरदृष्टि के साथ आगे बढ़ने वाला राष्ट्र है। उन्होंने कहा कि आज भारत जो निर्णय ले रहा है, वे केवल वर्तमान के लिए नहीं बल्कि आने वाले 1,000 वर्षों के भविष्य को आकार देने वाले हैं। प्रधानमंत्री ने इस दौरान अर्थव्यवस्था, गरीबी उन्मूलन, वैश्विक नेतृत्व, राष्ट्रीय हित और भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साख जैसे कई अहम मुद्दों पर अपने विचार रखे।

प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पिछले कई महीनों से पश्चिम एशिया में लगातार उथल-पुथल और संघर्ष का माहौल बना हुआ है। इस क्षेत्र में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्गों और सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है। हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा था कि इसका सबसे अधिक प्रभाव ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ रहा है। ऐसे वैश्विक हालात के बीच रिपब्लिक समिट में दिया गया उनका यह संदेश भारत की दीर्घकालिक सोच, राष्ट्रीय हितों और दुनिया में उसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करने वाला माना जा रहा है।

भारत क्षणिक घटनाओं पर नहीं, हजारों वर्षों की सोच पर चलता है

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी सभ्यता और दीर्घकालिक सोच है। उन्होंने कहा, भारत किसी क्षणिक घटना पर उतावला होने वाला देश नहीं है। हम वो हैं जिसने विकास भी देखा है और विनाश भी झेला है। हमारे जेहन में युगों की मेमोरी चिप लगी हुई है। इसलिए भारत आज जो कर रहा है, वह आने वाले 1,000 वर्षों का भविष्य लिखने वाला है और यही दुनिया के लिए भारत की सबसे बड़ी गारंटी है।

उन्होंने कहा कि दुनिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं, लेकिन भारत अल्पकालिक परिस्थितियों के बजाय अपने दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यही सोच भारत को एक जिम्मेदार, स्थिर और भरोसेमंद वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है।

नेशन फर्स्ट ने बदली भारत की पहचान, दुनिया का बढ़ा भरोसा

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार के हर बड़े फैसले के केंद्र में नेशन फर्स्ट का सिद्धांत रहा है। उन्होंने कहा कि इसी सोच ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया है और वैश्विक मंच पर देश की विश्वसनीयता लगातार बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत को केवल एक उभरती हुई शक्ति नहीं, बल्कि एक विश्वसनीय शक्ति के रूप में देख रही है। वैश्विक संकटों के बीच भी भारत ने संतुलित विदेश नीति अपनाई है और अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता किए बिना दुनिया के साथ सहयोग का रास्ता चुना है। हालिया जी-7 शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व के नेताओं ने भारत के नेशन फर्स्ट दृष्टिकोण और उसकी नीतिगत स्थिरता की सराहना की।

गरीबी से लेकर विकसित भारत तक, भविष्य की बड़ी सोच पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में देश में बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल के वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, जिससे देश में एक नए मध्यम वर्ग का तेजी से विस्तार हुआ है। उनके अनुसार, बुनियादी ढांचे का विस्तार, तकनीकी प्रगति, डिजिटल परिवर्तन और सुशासन भारत की नई पहचान बन रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल वर्ष 2047 तक सीमित नहीं है, बल्कि आज लिए जा रहे फैसले आने वाली कई पीढ़ियों की दिशा तय करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत केवल आर्थिक रूप से मजबूत देश बनने की ओर नहीं बढ़ रहा, बल्कि ऐसा राष्ट्र बनने की दिशा में काम कर रहा है जो वैश्विक स्थिरता, भरोसे और मानवता के हित में नेतृत्व कर सके। उन्होंने दोहराया कि भारत का वर्तमान विकास मॉडल आने वाले 1,000 वर्षों के भविष्य की मजबूत नींव रख रहा है।