erere | Source: erereनई दिल्ली। देश में लगातार सामने आए पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के मामलों के बीच केंद्र सरकार सोमवार को संसद में परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार आज 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पेश करेगी। इस विधेयक का उद्देश्य प्रश्नपत्र लीक, नकल और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी जैसे अपराधों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। इससे पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी सांसदों से इस महत्वपूर्ण विधेयक पर होने वाली चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं की भावनाओं और छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ऐतिहासिक पहल की है। सरकार का लक्ष्य देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाना और भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करना है।

संसद में आज पेश होगा महत्वपूर्ण परीक्षा सुधार विधेयक

केंद्र सरकार आज संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 प्रस्तुत करेगी। सरकार का कहना है कि यह विधेयक परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने, नकल माफिया पर शिकंजा कसने और प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

विधेयक पर संसद में विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है। इसी को लेकर किरेन रिजिजू ने सभी सांसदों से सदन में उपस्थित रहकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को दिया भरोसा

रविवार को जारी अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार की धांधली, भ्रष्टाचार या प्रश्नपत्र लीक को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है। कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और ऐसे मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था भी की गई है।

प्रश्नपत्र लीक की जांच दो महीने में पूरी करने का प्रस्ताव

प्रस्तावित संशोधन विधेयक के अनुसार प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामलों की जांच अधिकतम दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। सरकार का मानना है कि त्वरित जांच और समयबद्ध कार्रवाई से दोषियों को जल्द सजा मिलेगी तथा भविष्य में ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

विधेयक की प्रति के अनुसार, प्रश्नपत्र लीक कराने या परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के लिए कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की कैद का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। इसके साथ ही दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।

संगठित परीक्षा अपराधों पर और सख्त होगी कार्रवाई

यदि कोई व्यक्ति या गिरोह संगठित तरीके से प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा में धोखाधड़ी या अन्य गंभीर अपराधों में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ और अधिक कठोर कार्रवाई का प्रस्ताव रखा गया है।

ऐसे मामलों में कम से कम सात वर्ष की सजा और अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। सरकार का मानना है कि संगठित परीक्षा माफिया पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कड़े दंड की आवश्यकता है।

मौजूदा कानून से अधिक सख्त होंगे नए प्रावधान

वर्तमान कानून के तहत व्यक्तिगत रूप से परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले लोगों के लिए तीन से पांच वर्ष तक की कैद का प्रावधान है। वहीं संगठित रूप से प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा धोखाधड़ी में शामिल लोगों के लिए पांच से दस वर्ष तक की सजा तथा कम से कम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान लागू है।

नए संशोधन विधेयक के माध्यम से सरकार जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने और दंड व्यवस्था को और मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली पर रहेगा जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए व्यापक सुधार लागू करेगी। उन्होंने बताया कि इस दिशा में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री के अनुसार, परीक्षा सुधारों पर सुझाव देने के लिए विश्व प्रसिद्ध प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कार्यबल (हाई-पावर्ड टास्क फोर्स) का गठन किया जाएगा। यह कार्यबल परीक्षा प्रणाली में सुधार, तकनीकी समाधान और भविष्य की परीक्षाओं को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए विस्तृत सुझाव देगा।

टास्क फोर्स की सिफारिशों पर होंगे आगे के सुधार

सरकार ने स्पष्ट किया है कि उच्चस्तरीय कार्यबल की रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार लागू किए जाएंगे। उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें पारदर्शिता, तकनीकी सुरक्षा और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले।

सरकार का कहना है कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को इस तरह मजबूत बनाया जाएगा कि प्रश्नपत्र लीक और अन्य अनियमितताओं की संभावना न्यूनतम रह जाए।