गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले से सार्वजनिक अपमान और उसके बाद हुई एक व्यक्ति की मौत का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। परिजनों के अनुसार, करीब सवा महीने पहले भतीजे से जुड़े एक मामले में 45 वर्षीय अजोड़ सिंह बंजारा को कथित तौर पर बंधक बनाकर प्रताड़ित किया गया। आरोप है कि उनके साथ मारपीट की गई, जूतों-चप्पलों की माला पहनाई गई और गांव में घुमाया गया। इस पूरी घटना का वीडियो भी बनाया गया था।
भतीजे के मामले में चाचा को बनाया गया निशाना
परिजनों के मुताबिक, मामला राघौगढ़ की जंजाली चौकी क्षेत्र के होरिबे गांव का है। बताया गया कि एक शादीशुदा महिला अपने भतीजे के साथ चली गई थी। इसके बाद महिला के ससुराल पक्ष के लोगों ने कथित तौर पर अजोड़ सिंह को पकड़ लिया। आरोप है कि उन्हें बंधक बनाकर प्रताड़ित किया गया और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।
परिजनों का कहना है कि इस दौरान अजोड़ सिंह को जूतों और चप्पलों की माला पहनाई गई तथा गांव में घुमाया गया। घटना का वीडियो भी बनाया गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद डायल-112 पुलिस मौके पर पहुंची और अजोड़ सिंह को वहां से छुड़ाकर ले गई थी।
पुलिस से शिकायत के बाद भी वीडियो ने बढ़ाया सदमा
घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस और प्रशासन से शिकायत भी की थी। परिजनों के अनुसार, घटना के तत्काल बाद मामला शांत नहीं हुआ, बल्कि करीब सवा महीने बाद वही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद अजोड़ सिंह कथित तौर पर गहरे मानसिक सदमे में चले गए।
उनके चचेरे भाई तोफान सिंह के अनुसार, वीडियो देखने के बाद अजोड़ सिंह ने कहा, "अब लोग मुझ पर हंस रहे हैं, मैं जीना नहीं चाहता।" इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर कीटनाशक पी लिया।
अस्पताल ले जाते समय हुई मौत
कीटनाशक पीने की जानकारी मिलने के बाद परिजन अजोड़ सिंह को इलाज के लिए राघौगढ़ के अस्पताल लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर उन्हें जिला अस्पताल, गुना ले जाया जा रहा था। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजनों ने सार्वजनिक अपमान और वीडियो वायरल होने को उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ने तथा इसके बाद उठाए गए कदम से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से उठे सवाल
इस घटना ने सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति के अपमानजनक वीडियो को प्रसारित किए जाने के गंभीर प्रभाव को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का कहना है कि जिस घटना का सामना अजोड़ सिंह ने करीब सवा महीने पहले किया था, उसका वीडियो बाद में वायरल होने के कारण उन्हें दोबारा उसी अपमान का सामना करना पड़ा।
हालांकि, वीडियो वायरल होने, पीड़ित की मानसिक स्थिति और उनकी मौत के बीच की परिस्थितियों की पूरी जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
डायल-112 ने मौके पर पहुंचकर कराया था मुक्त
परिजनों के अनुसार, जब अजोड़ सिंह को कथित तौर पर बंधक बनाया गया था, तब सूचना मिलने पर डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची थी। पुलिस ने उन्हें वहां से छुड़ाया था। इसके बाद उन्होंने पुलिस और प्रशासन के समक्ष अपनी शिकायत भी रखी थी।
अब उनकी मौत के बाद परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों और घटना के पुराने वीडियो की भूमिका की जांच किए जाने की जरूरत सामने आई है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे और सार्वजनिक रूप से अपमानित किए जाने की घटना किन परिस्थितियों में हुई।
जांच में सामने आएंगे घटना से जुड़े तथ्य
गुना जिले की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने और उसकी तस्वीर या वीडियो को प्रसारित करने का उसके जीवन पर कितना गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। अजोड़ सिंह की मौत के बाद उनके परिजनों ने घटना से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल मामले में सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। घटना से जुड़े वीडियो, परिजनों के बयान और पहले की गई शिकायत समेत अन्य तथ्यों की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अजोड़ सिंह की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और घटना से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच अब अहम है।
