NCRB रिपोर्ट | Source: Social media

NCRB रिपोर्ट Source : Social media

देश में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने एक बार फिर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि अलग-अलग तरह के अपराधों में अलग-अलग उम्र की बच्चियां सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। जहां रेप के मामलों में 16 से 17 साल की किशोरियां सबसे अधिक शिकार बनी हैं, वहीं हत्या के मामलों में 6 साल से कम उम्र की बच्चियों की संख्या सबसे ज्यादा दर्ज की गई है। ये आंकड़े बच्चों की सुरक्षा और उनके खिलाफ बढ़ते अपराधों पर कई सवाल खड़े करते हैं।

रेप के मामलों में 16-17 साल की किशोरियां सबसे ज्यादा प्रभावित

NCRB के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कई वर्षों से रेप के मामलों में सबसे अधिक पीड़ित 16-17 साल की किशोरियां रही हैं। वर्ष 2024 में इस आयु वर्ग की 473 किशोरियां रेप की शिकार हुईं। वहीं 2023 में यह संख्या 463, 2022 में 527, 2021 में 1,772 और 2020 में 1,471 दर्ज की गई थी।

इसके मुकाबले 12-15 वर्ष, 6-11 वर्ष और 6 साल से कम उम्र की बच्चियों के मामलों की संख्या कम रही, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के खिलाफ किसी भी तरह का अपराध चिंता का विषय है।

हत्या के मामलों में सबसे ज्यादा शिकार 6 साल से कम उम्र की बच्चियां

हत्या के मामलों में तस्वीर और भी चिंताजनक है। NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, 6 साल से कम उम्र की बच्चियां सबसे अधिक हत्या की शिकार हुई हैं। वर्ष 2024 में इस आयु वर्ग की 178 बच्चियों की हत्या दर्ज की गई। 2023 में यह संख्या 205, 2022 में 200, 2021 में 220 और 2020 में 277 रही। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इन मामलों में कुछ कमी देखने को मिली है, लेकिन इतनी कम उम्र की बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराध अब भी चिंता का कारण बने हुए हैं।

क्या बताते हैं ये आंकड़े?

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के खिलाफ अपराध रोकने के लिए सिर्फ कानून सख्त होना ही काफी नहीं है। परिवार, स्कूल, समाज और प्रशासन सभी को मिलकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। बच्चों को समय रहते गुड टच-बैड टच, ऑनलाइन सुरक्षा और किसी भी गलत घटना की तुरंत जानकारी देने के बारे में जागरूक करना भी बेहद जरूरी है।

बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

NCRB के ये आंकड़े साफ बताते हैं कि बच्चों, खासकर बच्चियों के खिलाफ अपराध आज भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय ऐसे मामलों को रोकने के लिए जागरूकता, सुरक्षा व्यवस्था और कानून के प्रभावी पालन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।