नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़े कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ी राहत दी। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मामले में मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को बंद कर दिया। यह फैसला उनके निधन के करीब दो साल बाद आया है।
कोयला ब्लॉक आवंटन का यह मामला उस दौर से जुड़ा है, जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ कुछ समय के लिए कोयला मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। उस समय कोयला ब्लॉकों के आवंटन को लेकर कई सवाल उठे थे और बाद में इस मामले की जांच शुरू हुई थी। यह मामला देश की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा।
CBI की ओर से मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई थी। जांच एजेंसी की रिपोर्ट में मनमोहन सिंह के खिलाफ किसी आपराधिक गड़बड़ी का पर्याप्त आधार नहीं पाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने CBI की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मामले को बंद कर दिया। इसके साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया भी समाप्त हो गई।
मनमोहन सिंह का नाम कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सामने आने के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी काफी गर्म रहा था। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच इस मामले को लेकर कई बार तीखी बहस देखने को मिली। उस समय सरकार की ओर से आवंटन की प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष रखा गया था, जबकि विपक्ष ने इसे लेकर तत्कालीन सरकार पर गंभीर सवाल उठाए थे।
अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है। खास बात यह है कि यह फैसला मनमोहन सिंह के निधन के करीब दो साल बाद आया है। मनमोहन सिंह का निधन दिसंबर 2024 में हुआ था। वह 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे और भारतीय राजनीति में एक अर्थशास्त्री तथा शांत स्वभाव के नेता के रूप में उनकी अलग पहचान रही।
अदालत के फैसले के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। हालांकि, कानूनी तौर पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है और मनमोहन सिंह से जुड़ी इस आपराधिक कार्यवाही को बंद कर दिया है।
इस फैसले के साथ ही कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भूमिका को लेकर चली लंबी कानूनी प्रक्रिया का यह अध्याय भी समाप्त हो गया है। हालांकि, कोयला आवंटन का मुद्दा भारतीय राजनीति के इतिहास में लंबे समय तक चर्चा में रहने वाले विवादों में शामिल रहेगा।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। मनमोहन सिंह के समर्थकों के लिए यह फैसला राहत की खबर के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर बहस शुरू होने की संभा
वना है।
