रिश्ते में प्यार, विश्वास और अपनापन जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है मतभेद होने पर एक-दूसरे को समझना। दो लोगों की सोच, पसंद और आदतें अलग हो सकती हैं, इसलिए किसी बात पर बहस या नाराजगी होना असामान्य नहीं है। समस्या तब शुरू होती है, जब बहस के दौरान गुस्से में कही गई बातें और किए गए व्यवहार रिश्ते में ऐसी चोट छोड़ देते हैं, जिसे बाद में भरना मुश्किल हो जाता है। कई बार छोटी-सी बहस भी इसलिए बड़ी बन जाती है क्योंकि दोनों पक्ष समस्या का समाधान खोजने के बजाय एक-दूसरे को गलत साबित करने में लग जाते हैं।
पार्टनर को अपशब्द कहना पड़ सकता है भारी
बहस के दौरान गुस्सा आना स्वाभाविक हो सकता है, लेकिन गुस्से में पार्टनर को बुरा-भला कहना रिश्ते के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। नाराजगी किसी व्यवहार या बात से हो सकती है, लेकिन सामने वाले का अपमान करना समस्या का समाधान नहीं है। जब बातचीत में अपशब्द, ताने या व्यक्तिगत टिप्पणियां शामिल हो जाती हैं तो असली मुद्दा पीछे छूट जाता है।
ऐसी स्थिति में पार्टनर को यह महसूस हो सकता है कि उसकी भावनाओं और सम्मान की कोई कीमत नहीं है। बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं रिश्ते में भावनात्मक दूरी बढ़ा सकती हैं। इसलिए बहस के दौरान समस्या पर बात करना बेहतर है, व्यक्ति के चरित्र या कमियों पर नहीं।
हर हाल में खुद को सही साबित करने की कोशिश न करें
बहस के दौरान एक आम गलती यह होती है कि दोनों लोग अपनी बात को सही साबित करने में जुट जाते हैं। अपनी बात रखना गलत नहीं है, लेकिन हर परिस्थिति में खुद को सही साबित करने की कोशिश बातचीत को समाधान से दूर ले जा सकती है।
अगर वास्तव में गलती हुई है तो उसे स्वीकार करना रिश्ते की कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी मानी जा सकती है। रिश्ते में बहस का उद्देश्य जीतना नहीं होना चाहिए। असली उद्देश्य यह समझना होना चाहिए कि समस्या कहां हुई और उसे दोबारा होने से कैसे रोका जा सकता है।
पार्टनर की बात को अनसुना करना भी बढ़ा सकता है दूरी
कुछ लोग बहस शुरू होते ही बातचीत बंद कर देते हैं या पार्टनर की बात सुनने से इनकार कर देते हैं। कभी-कभी गुस्सा शांत करने के लिए थोड़ी देर दूरी बनाना जरूरी हो सकता है, लेकिन समस्या से लगातार बचते रहना रिश्ते के लिए ठीक नहीं है।
जब किसी व्यक्ति को बार-बार यह महसूस होता है कि उसकी बात सुनी नहीं जा रही है, तो उसके मन में उपेक्षा की भावना पैदा हो सकती है। अगर बहस के दौरान भावनाएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं तो कुछ समय शांत रहने के बाद दोबारा बातचीत करना बेहतर तरीका हो सकता है। महत्वपूर्ण यह है कि बातचीत को पूरी तरह खत्म न किया जाए।
नई बहस में पुरानी गलतियों की फाइल न खोलें
कई रिश्तों में बहस का एक नया मुद्दा देखते ही पुरानी घटनाएं भी सामने आने लगती हैं। आज किसी बात को लेकर विवाद हुआ और कुछ ही मिनटों में महीनों या वर्षों पुरानी गलतियां गिनाई जाने लगीं। इससे मौजूदा समस्या का समाधान और मुश्किल हो सकता है।
पुरानी बातों को बार-बार सामने लाने से पार्टनर को यह महसूस हो सकता है कि उसकी पिछली गलतियां अभी तक माफ नहीं की गई हैं। इससे रिश्ते में कड़वाहट बढ़ सकती है। बेहतर तरीका यह है कि जिस मुद्दे पर इस समय बातचीत हो रही है, उसी पर ध्यान दिया जाए और उसका समाधान खोजने की कोशिश की जाए।
गुस्से में रिश्ते को खत्म करने का फैसला न लें
बहस के दौरान भावनाएं सामान्य स्थिति की तुलना में अधिक तीव्र हो सकती हैं। ऐसे समय में कुछ लोग गुस्से में रिश्ता खत्म करने, अलग होने या पार्टनर को छोड़ देने जैसी बातें कह देते हैं। बाद में गुस्सा शांत होने पर उन्हें अपनी बात पर पछतावा भी हो सकता है।
इसलिए किसी बड़े फैसले से पहले खुद को शांत करना जरूरी है। अगर दोनों के बीच गलतफहमी है तो शांत माहौल में बातचीत के जरिए उसे दूर करने की कोशिश की जा सकती है। छोटी समस्या के बीच लिया गया बड़ा फैसला रिश्ते पर लंबे समय का असर डाल सकता है।
बहस के दौरान समस्या नहीं, समाधान पर ध्यान दें
रिश्ते में मतभेद होना अपने आप में रिश्ते की कमजोरी का संकेत नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि दोनों लोग मतभेद को किस तरह संभालते हैं। अगर बहस के दौरान एक-दूसरे की बात सुनी जाए, सम्मान बरकरार रखा जाए और व्यक्तिगत आरोपों से बचा जाए तो विवाद को सुलझाना आसान हो सकता है।
पार्टनर की बात को बीच में काटने के बजाय उसे पूरी तरह सुनना, अपनी भावनाओं को स्पष्ट शब्दों में बताना और जरूरत पड़ने पर कुछ समय शांत रहने के बाद बातचीत करना बेहतर तरीका हो सकता है।
रिश्ते को मजबूत रखने में संवाद की बड़ी भूमिका
किसी भी रिश्ते में सिर्फ प्यार होना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। आपसी सम्मान, भरोसा और संवाद भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। जब दोनों पार्टनर अपनी बात खुलकर रखते हैं और सामने वाले की भावनाओं को समझने की कोशिश करते हैं तो कई विवाद बड़ी समस्या बनने से पहले ही सुलझ सकते हैं।
