ere | Source: eerरियाद। सऊदी अरब ने खनिज संसाधनों के क्षेत्र में एक ऐसी खोज की घोषणा की है, जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। देश के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अजीज बिन सलमान ने सोमवार को बताया कि मदीना के जबल सय्यद क्षेत्र में करीब 11 करोड़ टन कच्चा अयस्क मिला है। इस अयस्क में रेयर अर्थ खनिजों के साथ यूरेनियम की भी आशाजनक मात्रा होने की जानकारी दी गई है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब सऊदी अरब तेल पर अपनी पारंपरिक निर्भरता से आगे बढ़कर खनन, नवीकरणीय ऊर्जा और नागरिक परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

11 करोड़ टन अयस्क के भंडार ने बढ़ाई हलचल

ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अजीज बिन सलमान ने यह जानकारी वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA के सम्मेलन में दी। उन्होंने बताया कि जबल सय्यद परियोजना में किए गए सर्वेक्षण और भूवैज्ञानिक अध्ययनों के दौरान इस विशाल संसाधन का अनुमान सामने आया है। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, यहां करीब 110 मिलियन टन यानी 11 करोड़ टन अयस्क मौजूद है।

इस खोज की खासियत सिर्फ अयस्क की बड़ी मात्रा नहीं है। बताया गया है कि इसमें रेयर अर्थ खनिजों के भारी तत्व अच्छी मात्रा में मौजूद हैं। साथ ही यूरेनियम की भी आशाजनक मात्रा का पता चला है। हालांकि, सऊदी ऊर्जा मंत्री ने यूरेनियम की सटीक प्रतिशत मात्रा का आंकड़ा साझा नहीं किया है। ऐसे में फिलहाल इस खोज को उपलब्ध प्रारंभिक संसाधन आकलन के आधार पर देखा जा रहा है।

मदीना का जबल सय्यद क्यों बन गया चर्चा का केंद्र?

जबल सय्यद क्षेत्र सऊदी अरब के मदीना इलाके में स्थित है। यह स्थान जेद्दा से करीब 350 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बताया जाता है। इस क्षेत्र में पहले भी दुर्लभ धातुओं और अन्य खनिज संसाधनों की मौजूदगी को लेकर चर्चा होती रही है। नए सर्वेक्षण और भूवैज्ञानिक अध्ययन के बाद यहां उपलब्ध संसाधनों का अनुमान अब बड़े स्तर पर सामने आया है।

सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री के अनुसार, जबल सय्यद परियोजना दुनिया के उन महत्वपूर्ण स्थलों में शामिल हो सकती है जहां दुर्लभ धातुओं के विकास की संभावनाएं मौजूद हैं। हालांकि, अभी अलग-अलग खनिजों की अंतिम मात्रा और आर्थिक रूप से निकाले जा सकने वाले संसाधन का विस्तृत आकलन सार्वजनिक नहीं किया गया है।

रेयर अर्थ खनिजों की मांग क्यों बढ़ रही है?

रेयर अर्थ खनिज आधुनिक तकनीक और उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लेकर विद्युत वाहनों, पवन ऊर्जा की तकनीक और रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों तक में किया जाता है। इसी वजह से दुनिया के कई देशों के लिए रेयर अर्थ संसाधनों की उपलब्धता रणनीतिक महत्व रखती है।

जबल सय्यद क्षेत्र में भारी रेयर अर्थ तत्वों की मौजूदगी की जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक उद्योगों में इन संसाधनों की उपयोगिता लगातार बढ़ी है। दूसरी ओर, यूरेनियम परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रमुख कच्चा माल है। इसलिए दोनों प्रकार के संसाधनों की मौजूदगी सऊदी अरब की भविष्य की ऊर्जा और खनन योजनाओं से जुड़ सकती है।

तेल के बाद खनन पर सऊदी अरब का बढ़ता फोकस

सऊदी अरब दुनिया की प्रमुख तेल अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन देश अब अपनी अर्थव्यवस्था को केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं रखना चाहता। विजन 2030 के तहत सरकार आय और आर्थिक गतिविधियों के नए स्रोत विकसित करने पर जोर दे रही है। खनन, नवीकरणीय ऊर्जा और नागरिक परमाणु ऊर्जा इसी व्यापक योजना का हिस्सा हैं।

सरकार अपने ऊर्जा मिश्रण में भी विविधता लाने की कोशिश कर रही है। सौर और पवन ऊर्जा के साथ परमाणु ऊर्जा को भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था में शामिल करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में घरेलू स्तर पर यूरेनियम की खोज और उसके संभावित उपयोग की योजना इस रणनीति को और महत्वपूर्ण बनाती है।

यूरेनियम के लिए राष्ट्रीय स्तर पर खोज अभियान

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि सऊदी अरब यूरेनियम संसाधनों की खोज के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम चला रहा है। इसके तहत देश में मौजूद संभावित स्रोतों की पहचान और उनके उपयोग की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

यूरेनियम प्राप्त करने के लिए सऊदी अरब फॉस्फेट उर्वरक उत्पादन प्रक्रिया से निकलने वाले अम्ल से यूरेनियम निकालने की संभावना पर भी काम कर रहा है। सऊदी अरब के उत्तरी हिस्से में फॉस्फेट का बड़ा उत्पादन होता है। इसी वजह से फॉस्फेट आधारित प्रक्रिया से यूरेनियम निकालने के विकल्प पर ध्यान दिया जा रहा है।

फ्रांस की ओरेनो कंपनी के साथ भी हुआ परीक्षण

सऊदी अरब ने इस दिशा में फ्रांस की कंपनी ओरेनो के साथ परीक्षण भी किए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन परीक्षणों से जुड़े आर्थिक संकेत सकारात्मक बताए गए हैं। इससे पता चलता है कि सऊदी अरब केवल जमीन में मौजूद यूरेनियम संसाधनों की खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग स्रोतों से यूरेनियम प्राप्त करने की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है।

हालांकि, किसी भी परियोजना को बड़े स्तर पर शुरू करने से पहले संसाधन की वास्तविक मात्रा, गुणवत्ता, लागत और उसे निकालने की व्यवहारिकता का विस्तृत मूल्यांकन जरूरी होता है। इसलिए मौजूदा घोषणा को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिका के साथ परमाणु समझौते के बीच बड़ी घोषणा

सऊदी अरब की यह घोषणा उस समय सामने आई है, जब अमेरिका और सऊदी अरब के बीच नागरिक परमाणु सहयोग को लेकर समझौता हो चुका है। जुलाई में दोनों देशों ने द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते के साथ नागरिक परमाणु सहयोग से जुड़ा समझौता भी किया था।

इस समझौते को कई दशकों तक चलने वाली और अरबों डॉलर की संभावित साझेदारी की नींव के रूप में बताया गया था। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास में सहयोग करेंगी।

क्या सऊदी अरब बदल रहा है अपनी ऊर्जा तस्वीर?

जबल सय्यद में 11 करोड़ टन अयस्क के अनुमान की घोषणा सऊदी अरब की बदलती ऊर्जा और औद्योगिक रणनीति के बीच हुई है। देश एक ओर तेल और गैस क्षेत्र को बनाए रखते हुए दूसरी ओर खनन और नई ऊर्जा तकनीकों में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है।

रेयर अर्थ और यूरेनियम जैसे संसाधनों की मौजूदगी इस रणनीति के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, इन संसाधनों का वास्तविक आर्थिक महत्व उनकी गुणवत्ता, उपलब्ध मात्रा और उन्हें व्यावसायिक स्तर पर निकालने की क्षमता पर निर्भर करेगा।

दुनिया की नजर अब सऊदी अरब के खनिज भंडार पर

जबल सय्यद में सामने आए संसाधन आकलन ने सऊदी अरब को केवल तेल उत्पादक देश के रूप में देखने की धारणा से आगे एक नई चर्चा को जन्म दिया है। रेयर अर्थ खनिजों और यूरेनियम की मौजूदगी की जानकारी से देश के खनन और ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाएं चर्चा में आ गई हैं।

सऊदी अरब के लिए यह खोज विजन 2030 के तहत अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की कोशिश से भी जुड़ी हुई है। यदि इन संसाधनों का विकास आगे बढ़ता है, तो खनन क्षेत्र देश की भविष्य की आर्थिक और ऊर्जा रणनीति में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।