यूरोप इन दिनों रिकॉर्डतोड़ गर्मी की चपेट में है। जून 2026 का महीना कई देशों के लिए असामान्य रूप से गर्म साबित हो रहा है, जहां तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। सबसे गंभीर स्थिति फ्रांस में देखने को मिली है, जहां भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों, नहरों और तालाबों में उतरे 40 से अधिक लोगों की डूबने से मौत हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, मृतकों में बड़ी संख्या युवाओं की है, जो अनधिकृत और बिना निगरानी वाले जल स्रोतों में तैरने गए थे।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक सामान्य हीटवेव नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन और विशेष मौसमी परिस्थितियों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है। फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों में रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि प्रशासन लोगों से अत्यधिक सावधानी बरतने की अपील कर रहा है।
फ्रांस में रिकॉर्ड तापमान, कई इलाकों में रेड अलर्ट
फ्रांस के मौसम विभाग के अनुसार, देश ने हाल के दिनों में इस वर्ष का सबसे गर्म दिन दर्ज किया। दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंच गया। हालात को देखते हुए कई विभागों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।
गर्मी का असर सार्वजनिक जीवन पर भी दिखाई दे रहा है। स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है, कई पर्यटन स्थलों के संचालन समय को सीमित किया गया है और परिवहन सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। प्रशासन लगातार लोगों को धूप से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दे रहा है।
फ्रांस तक सीमित नहीं संकट
यह गर्मी केवल फ्रांस तक सीमित नहीं है। ब्रिटेन, स्पेन, इटली, स्विट्जरलैंड और अन्य यूरोपीय देशों में भी तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया जा रहा है। कई स्थानों पर जून महीने के पुराने रिकॉर्ड टूट चुके हैं।
विश्व मौसम संगठन (WMO) के अनुसार, यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक औसत की तुलना में यूरोप में तापमान वृद्धि की दर लगभग दोगुनी है, जिसके कारण हीटवेव जैसी चरम मौसम घटनाएं अधिक बार और अधिक तीव्र रूप में सामने आ रही हैं।
ओमेगा ब्लॉक और जलवायु परिवर्तन का असर
विशेषज्ञ इस भीषण गर्मी के पीछे "ओमेगा ब्लॉक" नामक मौसम प्रणाली को एक प्रमुख कारण मान रहे हैं। इस स्थिति में गर्म हवा का एक विशाल क्षेत्र लंबे समय तक किसी इलाके के ऊपर स्थिर बना रहता है, जिससे ठंडी हवाओं और बारिश की संभावना कम हो जाती है।
जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन ने ऐसी परिस्थितियों को और गंभीर बना दिया है। आर्कटिक और आल्प्स क्षेत्रों में बर्फ के तेजी से पिघलने तथा समुद्री तापमान में वृद्धि को भी इस संकट से जोड़कर देखा जा रहा है।
गर्मी से बचाव बना जानलेवा
फ्रांस में हुई डूबने की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों के अनुसार, कई लोग गर्मी से राहत पाने के लिए बिना सुरक्षा व्यवस्था वाले जल स्रोतों में उतर गए, जिसके कारण हादसे हुए।
विशेषज्ञों का कहना है कि भीषण गर्मी के दौरान लोगों को केवल अधिकृत और सुरक्षित स्थानों पर ही तैराकी करनी चाहिए। साथ ही बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। मौसम विभागों का अनुमान है कि यूरोप के कई हिस्सों में यह गर्मी सप्ताहांत तक बनी रह सकती है।
