erer | Source: ererनई दिल्ली। मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बाद घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार से ही भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि बाजार के सभी 16 प्रमुख सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता और महंगे कच्चे तेल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट

शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 512.07 अंक की गिरावट के साथ 75,869.38 अंक पर खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 153 अंक टूटकर 23,713.60 अंक पर पहुंच गया।

मौजूद आंकड़ों के अनुसार सुबह लगभग 9:15 बजे तक सेंसेक्स 0.89 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,708.19 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 0.85 प्रतिशत फिसलकर 23,666.35 अंक पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में ही बाजार में बिकवाली का दबाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला।

मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ी तेल आपूर्ति की चिंता

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार गिरावट की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद ईरान और हूती समूह के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है।

इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिसका सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी का सीधा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इसके साथ ही व्यापार घाटा बढ़ने, महंगाई में तेजी आने और विभिन्न उद्योगों की लागत बढ़ने जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। इन परिस्थितियों का असर कंपनियों के मुनाफे और निवेशकों के भरोसे पर भी पड़ सकता है।

सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का दबाव

शेयर बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली देखने को मिली। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बाजार के सभी 16 प्रमुख सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और वैश्विक परिस्थितियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि छोटे और मझोले आकार की कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। दोनों प्रमुख सूचकांकों में करीब 0.6 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे व्यापक बाजार में भी कमजोरी का माहौल बना रहा।

इन्फोसिस और इंटरग्लोब एविएशन के शेयर भी टूटे

सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इन्फोसिस के शेयर में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं विमानन क्षेत्र की कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के शेयर भी करीब 1.5 प्रतिशत तक फिसल गए।

बताया जा रहा है कि इन कंपनियों के हालिया तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया अपेक्षा से कमजोर रही, जिसका असर इनके शेयरों पर देखने को मिला।

विशेषज्ञों की राय: सतर्कता का समय

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान समय में निवेशकों का सतर्क रहना स्वाभाविक है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है।

यदि आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था दोनों पर जारी रह सकता है।