नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरभ दास को रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को रिहा कर दिया गया। हालांकि, उनकी रिहाई के बाद सामने आई एक घटना ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को नया विषय दे दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जब तीनों नेता पुलिस स्टेशन से बाहर निकले, तो उनका स्वागत करने के लिए वहां पार्टी का कोई समर्थक मौजूद नहीं था। जिस पार्टी के नेताओं ने बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया था, उनके रिहा होने के समय समर्थकों की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए।
रिहाई के समय कहां थे CJP के समर्थक?
अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास की रिहाई से जुड़ी खबर में सबसे अधिक चर्चा इस बात की हो रही है कि तीनों नेताओं को लेने के लिए कोई समर्थक पुलिस स्टेशन नहीं पहुंचा। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, News18 ने दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से बताया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीनों नेता पुलिस स्टेशन से अकेले बाहर निकले। रिपोर्ट में दावा किया गया कि पार्टी की ओर से किए गए बड़े-बड़े दावों के बावजूद नेताओं की रिहाई के समय उनका स्वागत करने के लिए कोई समर्थक या अनुयायी वहां मौजूद नहीं था। हालांकि, समर्थकों की गैरमौजूदगी के पीछे क्या कारण था, इस बारे में रिपोर्ट में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए केवल इस घटना के आधार पर पार्टी के जनसमर्थन या संगठन की स्थिति के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
50 हजार रुपये का जमानती बांड, एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त
तीनों नेताओं को रिहाई के साथ कानूनी शर्तों का पालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं। कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने उनसे 50 हजार रुपये के जमानती बांड भरवाए और एक साल तक शांति बनाए रखने से संबंधित बांड पर हस्ताक्षर करवाए। अदालत की ओर से तीनों नेताओं को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अशांति से बचने की हिदायत दी गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उन्हें सार्वजनिक सभाएं नहीं करने का निर्देश दिया गया है। इन शर्तों के कारण रिहाई के बाद भी तीनों नेताओं की गतिविधियों पर चर्चा बनी हुई है। यहां यह ध्यान देना जरूरी है कि अदालत की ओर से लगाई गई शर्तों का सटीक दायरा उसके लिखित आदेश से ही स्पष्ट होता है। इसी तरह, किसी शर्त का उल्लंघन होने पर क्या कानूनी कार्रवाई हो सकती है, यह आदेश की प्रकृति और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
दिल्ली पहुंचते ही विमान से उतरने के बाद हिरासत में लिए गए थे नेता
CJP ने शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित था। इसी घटनाक्रम के बीच अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पहुंचने के बाद एयर इंडिया की उड़ान से उतरते ही दिल्ली पुलिस ने तीनों नेताओं को रोककर हिरासत में ले लिया। पुलिस ने यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत की थी। शनिवार रात तक करीब सात हजार प्रदर्शनकारियों को रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन तीनों प्रमुख नेताओं की रिहाई उस समय नहीं हो सकी थी। बाद में रविवार को उन्हें कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां से निर्धारित शर्तों के साथ रिहाई का आदेश दिया गया।
BNSS की धारा 126 क्या कहती है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा संबंधी कार्यवाही से जुड़ी है। इसके तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट को ऐसी स्थिति में कार्रवाई करने का अधिकार है, जब उन्हें जानकारी मिले कि कोई व्यक्ति शांति भंग कर सकता है या सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका है। कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए संबंधित व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बांड भरवाया जा सकता है। इसका उद्देश्य संभावित अशांति को रोकना और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है। इस प्रावधान के तहत कार्रवाई किए जाने का अर्थ अपने आप में यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति ने कोई अपराध किया हुआ साबित हो गया है। यह शांति बनाए रखने से संबंधित कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें मजिस्ट्रेट परिस्थितियों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर निर्णय लेते हैं।
BNSS की धारा 170 में पुलिस को क्या अधिकार हैं?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170 पुलिस को संज्ञेय अपराध किए जाने की आशंका की स्थिति में निवारक गिरफ्तारी का अधिकार देती है। इसका इस्तेमाल तब किया जा सकता है, जब पुलिस अधिकारी को किसी संज्ञेय अपराध की योजना या उसे अंजाम दिए जाने की आशंका के बारे में जानकारी हो और अपराध को अन्य तरीके से रोकना संभव न हो। इस अधिकार का इस्तेमाल कानूनी शर्तों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाना चाहिए। केवल आशंका के आधार पर असीमित कार्रवाई की अनुमति नहीं मिल जाती। संबंधित परिस्थितियों, कानूनी सीमाओं और लागू प्रक्रिया का पालन आवश्यक होता है। अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास के मामले में दिल्ली पुलिस ने धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की थी। हालांकि, इस मामले में पुलिस के विस्तृत आधार और अदालत के पूरे लिखित आदेश की जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।
