नई दिल्ली। भारत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह के दौरान आईआईटी दिल्ली के सोनीपत परिसर में स्थापित एआई-संचालित हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग सुविधा ‘परम प्रज्ञा’ का उद्घाटन किया। इस सुपरकंप्यूटिंग सुविधा को देश में अत्याधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जटिल गणनाओं को नई गति देने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
आखिर क्या है ‘परम प्रज्ञा’ और क्यों है इतना खास?
‘परम प्रज्ञा’ कोई सामान्य कंप्यूटर नहीं है, बल्कि इसे अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग तकनीक को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी विशाल मात्रा में डेटा को बेहद तेजी से संसाधित करने की क्षमता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह सामान्य कंप्यूटर की तुलना में लाखों गुना तेज काम करने में सक्षम है।
इस तरह की सुपरकंप्यूटिंग सुविधा का इस्तेमाल उन कार्यों में किया जाता है, जहां सामान्य कंप्यूटरों को जटिल गणनाएं पूरी करने में काफी लंबा समय लग सकता है। बड़े वैज्ञानिक मॉडल, विशाल डेटा सेट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियां और जटिल एल्गोरिदम इसके जरिए अधिक तेजी से संसाधित किए जा सकते हैं।
हर सेकंड खरबों गणनाओं की क्षमता
‘परम प्रज्ञा’ की कंप्यूटिंग क्षमता इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में शामिल है। यह पेटाफ्लॉप्स स्तर की प्रोसेसिंग क्षमता से लैस है। सरल शब्दों में समझें तो पेटाफ्लॉप्स सुपरकंप्यूटिंग की उस क्षमता को दर्शाता है, जिसमें कंप्यूटर बेहद कम समय में बहुत बड़ी संख्या में गणनाएं कर सकता है।
इसमें विशेष एआई एक्सीलरेटर और जीपीयू क्लस्टर भी लगाए गए हैं। ये तकनीकें डीप लर्निंग मॉडल और बड़े कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल को प्रशिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे मॉडल को तैयार करने के लिए बहुत बड़ी मात्रा में डेटा और अत्यधिक कंप्यूटिंग शक्ति की आवश्यकता होती है।
पेटाबाइट्स में डेटा संभालने की क्षमता
किसी भी आधुनिक सुपरकंप्यूटिंग प्रणाली के लिए केवल तेज प्रोसेसर पर्याप्त नहीं होता। बड़ी मात्रा में डेटा को सुरक्षित रखने और जरूरत के समय तेजी से उपलब्ध कराने के लिए मजबूत स्टोरेज व्यवस्था भी जरूरी होती है। ‘परम प्रज्ञा’ सुविधा में पेटाबाइट्स स्तर की सुरक्षित और तेज स्टोरेज व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।
इसका फायदा यह होगा कि शोधकर्ताओं को विशाल डेटा फाइलों और जटिल वैज्ञानिक आंकड़ों के विश्लेषण में मदद मिल सकेगी। बड़े डेटा सेट के साथ काम करने वाले अनुसंधान प्रोजेक्ट में तेज स्टोरेज और प्रोसेसिंग क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मौसम और जलवायु अनुसंधान में बदल सकता है तस्वीर
‘परम प्रज्ञा’ का इस्तेमाल वैज्ञानिक अनुसंधान के कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। इनमें मौसम पूर्वानुमान, चक्रवातों का अध्ययन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का विश्लेषण प्रमुख हैं।
मौसम और जलवायु से जुड़े मॉडल में बड़ी मात्रा में आंकड़ों का विश्लेषण करना पड़ता है। सुपरकंप्यूटिंग क्षमता के जरिए ऐसे जटिल मॉडल को अधिक तेजी से चलाने और उपलब्ध आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन करने में शोधकर्ताओं को मदद मिल सकती है।
नई दवाओं के अनुसंधान में भी होगा इस्तेमाल
स्वास्थ्य और दवा अनुसंधान के क्षेत्र में भी हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ‘परम प्रज्ञा’ जैसी सुविधा का उपयोग नई दवाओं के विकास और उनके परीक्षण से जुड़े अनुसंधान में किया जा सकता है।
जटिल वैज्ञानिक गणनाओं और विशाल डेटा के विश्लेषण को तेज करने से दवा अनुसंधान की प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे वैज्ञानिकों को अलग-अलग संभावनाओं का कंप्यूटर आधारित अध्ययन करने के लिए अधिक शक्तिशाली संसाधन मिलेंगे।
विमान और गाड़ियों की डिजाइनिंग में भी उपयोग
‘परम प्रज्ञा’ का उपयोग केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहने वाला है। विमान, वाहन और दूसरी जटिल मशीनों की डिजाइनिंग में भी सुपरकंप्यूटिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है।
किसी विमान या वाहन को वास्तविक दुनिया में तैयार करने से पहले उसकी डिजाइन और सुरक्षा से जुड़े कई पहलुओं का कंप्यूटर आधारित परीक्षण किया जा सकता है। इस तरह की गणनाओं के लिए काफी अधिक कंप्यूटिंग शक्ति की जरूरत होती है। ‘परम प्रज्ञा’ इस तरह के जटिल डिजाइन और सिमुलेशन कार्यों में शोधकर्ताओं और इंजीनियरों की मदद कर सकता है।
भारतीय भाषाओं की एआई तकनीक को भी मिलेगी ताकत
भारत जैसे बहुभाषी देश में भारतीय भाषाओं के लिए उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल तैयार करना भी एक बड़ी तकनीकी चुनौती है। अलग-अलग भारतीय भाषाओं से जुड़े विशाल डेटा को संसाधित करने और एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग व्यवस्था की आवश्यकता होती है।
‘परम प्रज्ञा’ का इस्तेमाल भारतीय भाषाओं से जुड़े एआई मॉडल और उन्नत कंप्यूटर विजन मॉडल को प्रशिक्षित करने में किया जा सकता है। इससे भारत में विकसित होने वाली एआई आधारित तकनीकों के लिए मजबूत अनुसंधान आधार तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
शोधकर्ताओं को भारत में ही मिलेंगे अत्याधुनिक संसाधन
‘परम प्रज्ञा’ को देश के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और इंजीनियरों की उन्नत अनुसंधान जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे जटिल वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यों के लिए देश में ही उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधा उपलब्ध कराना है, जिनके लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग शक्ति की जरूरत होती है।
इस तरह की सुविधा से भारतीय शोधकर्ताओं को बड़े डेटा सेट, जटिल एल्गोरिदम और उन्नत एआई मॉडल पर काम करने के लिए बेहतर कंप्यूटिंग संसाधन मिल सकेंगे। इससे देश में अनुसंधान और विकास से जुड़े कार्यों को गति देने में मदद मिल सकती है।
भारत के एआई और अनुसंधान अभियान में अहम कदम
‘परम प्रज्ञा’ को भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा IIT दिल्ली के सोनीपत परिसर में इस एआई-संचालित हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग सुविधा का उद्घाटन देश में अत्याधुनिक तकनीकी बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इसका उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान, औद्योगिक तकनीक, मौसम एवं जलवायु अध्ययन, दवा अनुसंधान, डिजाइनिंग, कंप्यूटर विजन और भारतीय भाषाओं से जुड़े एआई मॉडल जैसे कई क्षेत्रों में किया जा सकता है।
